1 कुरिन्थियों 13:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अशोभनीय व्यवहार नहीं करता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुँझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।

1 कुरिन्थियों 13:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 कोरिन्थियों 13:5 का सरल अर्थ

इस पवित्र वचन में प्रेम की वास्तविक चरित्रता को दर्शाया गया है: प्रेम अशोभनीय व्यवहार नहीं करता, अपनी भलाई नहीं चाहता, झुँझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। इसका मतलब है—जब हम प्रेम में होते हैं, तो हमारी कसौटी यह नहीं कि मैं क्या पा रहा हूँ या कितना लाभ ले रहा हूँ, बल्कि क्या मैं दूसरे के लिए क्या कर रहा हूँ, कैसे आत्म-हित से ऊपर उठकर आराम दे सकूं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह वचन 1 कुरिन्थियों को दिए गए प्रेम-खत के भाग का एक भाग है, जहाँ पौलुस ईश्वर के प्रेम की परिभाषा देते हैं। कुरिन्थ की congregation सामाजिक-आर्थिक विविधता से भरी थी, और उनमें दाग और वैमनस्य के संकेत थे। प्रेम के वास्तविक स्वरूप की यह परिभाषा उस समय की सामुदायिक जीवनशैली को सुधारने की मांग करती है—क्योंकि ईश्वर का प्रेम व्यवहारिक है, न कि केवल विचारों में।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

- अशोभनीय व्यवहार नहीं करता: प्रेम कलह-कर्तव्य से परे है; यह दूसरों की पीड़ा के सामने शर्म नहीं दिखाता, न उनके अधिकारों के खिलाफ क्रोध को अंजाम देता है।

- अपनी भलाई नहीं चाहता: प्रेम स्वयं लाभ की चकाचौंध से मुक्त है; यह दूसरों को ऊपर उठाने में संतुष्टि ढूंढ़ता है, न कि अपने लिए स्वार्थ-लाभ।

- झुँझलाता नहीं: प्रेम तीखे तेवरों और छोटी-छोटी बातों पर नियंत्रण रखता है, अहंकार या चिड़चिड़ाहट से नहीं जला जाता।

- बुरा नहीं मानता: प्रेम अन्य की गलती पर कठोर नहीं होता; यह क्षमा को प्राथमिकता देता है और गलत के लिए न्याय के मार्ग को सम्मान देता है।

थीमेटिक पॉइंट्स

  • प्रेम का आचरण दूसरों के सम्मान और दूसरों की भलाई के लिए है।
  • स्वार्थ-हित से ऊपर उठना प्रेम की पहचान है।
  • धैर्य और क्षमा, प्रेम की स्थिर आत्मा के संकेत हैं।

अनुदर्शी क्रॉस-रेफरेंस

- रोमियों 12:10: भलाइन, आपसी प्रेम में प्रेम से प्यार करिए; बहुमूल्यता के साथ। यह संदर्भ दिखाता है कि प्रेम के व्यवहार में सम्मान और भाइचारे की भावना कितनी गहराई से जुड़ी है।

- याकूब 1:19-20: धीमे सुनो, धीरे-धीरे बोलो, क्रोध से नहीं; यह व्यावहारिक परामर्श है ताकि प्रेम-व्यवहार स्थिर रहे।

- Colossians 3:12-14: दयालुता, नम्रता, कोमलता और सहनशीलता—इन गुणों के साथ प्रेम सर्वोपरि है; यह पाठ प्रेम के व्यवहारिक कोर को और स्पष्ट करता है।

पक्का करने वाला निष्कर्ष

इस वचन का मूल संदेश है: प्रेम वह जीवनशैली है जिसमें दूसरों की गरिमा और हानि-हरपन से बचना, अपने आप को दूसरे के स्थान पर रखना, और क्षमा की भावना को बनाए रखना शामिल है। धार्मिक आचरण केवल पवित्र उपदेशों का पालन नहीं, बल्कि दूसरों के साथ व्यवहार के हर पल में प्रेम को व्यक्त करने का नाम है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 13:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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