फिलिप्पियों 2:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि सब अपने स्वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की।

फिलिप्पियों 2:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

फिलिप्पियों 2:21 पर टिप्पणी (HINIRV)

पद का संदर्भ: पॉल फिलिप्पियों को संबोधित करते हैं और प्रेरित यीशु मसीह के विचारों के अनुरूप जीवन बिताने की प्रेरणा दे रहे हैं। इस पंक्ति में वह अपने भाइयों को चिंतन के लिए आमंत्रित करते हैं कि अन्य सभी अब भी अपने स्वार्थी खोज में लगे रहते हैं, तब भी वे मसीह के साथ नम्रता, सेवा और संघ को प्राथमिकता नहीं देते। इस संदर्भ में पौलुस विशेषकर उन सहयोगियों की जाँच कर रहे हैं जो प्रचार-प्रसार में सहयोगी नहीं बन रहे, जबकि यीशु मसीह के अनुकरण हेतु आदर्श हैं।

मुख्यinandcentral meaning

वाक्य स्पष्ट करता है कि एक समर्पित विश्वासी के लिए स्वार्थी उद्देश्यों से ऊपर उठकर यीशु मसीह की गतिविधियों और प्रेरणाओं को अपनाना आवश्यक है। यह पथ स्वार्थ पर आधारित योजनाओं के विरुद्ध है; मसीह की प्रेरणा का अनुकरण कर के ही जीवन प्रभावशाली बन सकता है।

मुख्य विषय

  • स्वार्थ बनाम सेवा: सब अपने स्वार्थी खोज में हैं—यानी सांसारिक लाभ, मान-सम्मान या पुरस्कारों के पीछे भागना।
  • यीशु मसीह की प्रेरणा: मसीह की तरह करुणा, निष्ठा और दूसरों के लिए जीवन निकालने का उद्देश्य चाहिए।
  • सहकार्य की जिम्मेदारी: चर्चित सहयोगी किन कारणों से पीछे रहते हैं, जिससे 공동कारीय मिशन बाधित होता है।

संदर्भित पाठ और उनके भावार्थ

— फिलिप्पियों 2:3-4 से प्रेरित होना: अपने अभिमान को किनारे रखकर दूसरों की भलाई को बढ़ावा देना। जीवन में दूसरों के हितों को अपने ऊपर रखना।

— इब्रानियों 12:1-2: ईमानदारी से धारण किया गया पथ—यीशु के पीछे चलते हुए धैर्य और विनम्रता का मार्ग।

2-3 प्रमुख विषयों के साथ संदेह-समझ

1) स्वार्थ के पीछे भागना व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा को रोक सकता है; 2) मसीह के नक्शे पर चलना तोड़-फोड़ नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण को बनाता है; 3) समूह में एकजुटता के लिए सहयोगियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।

उपयोगी क्रॉस-रेफरेंसेस

  • याकूब 4:1-3: स्वार्थी चाहतें कैसे संघर्षों का कारण बनती हैं; आत्म-आत्म- हत्या नहीं, बल्कि पवित्रता के साथ यापन।
  • रोमियों 12:10: प्रेमपूर्वक एक-दूसरे से प्रेम दिखाने की हिदायत; सम्मान और सहयोग की भावना।
  • कुलुस्सियों 3:23-24: जो भी करो, पूर्ण आत्मा से करो, न कि मनुष्य के मान के लिए; यह मसीही जीवन का आधार है।

व्यावहारिक विचार

1) अपने दैनन्दिन कार्यों में दूसरों के हित को प्राथमिकता दें—परिवार, मित्र और चर्च समुदाय के प्रयासों में स्वयं को सीमित न करें। 2) समूह-कार्य में सक्रिय भागीदारी अपनाएं; जहां भी अवसर मिले, सेवा के उद्देश्य से योगदान दें। 3) आत्म-निरीक्षण करें: क्या मेरे निर्णय स्वार्थ से प्रेरित हैं? यदि हाँ, तो दया और नम्रता के अभ्यास को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

फिलिप्पियों 2:21 हमें स्मरण दिलाता है कि सच्ची ईमानदारी और समुदाय की समृद्धि यीशु मसीह की निष्ठा के अनुरूप काम करने में है—जहाँ हर व्यक्ति अपने स्वार्थ की खोज से ऊपर उठकर प्रभु की सेवा में संलग्न हो।

उद्धरण योग्य टिप्पणियाँ (पब्लिक डोमेन से):

Matthew Henry से:"... they seek their own things, not the things of Christ." (संक्षेप में) और Albert Barnes/Adam Clarke के सार-ज्ञान ने इस वाक्य को सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी की धरोहर के रूप में सजाया है; यदि आप उनकी विशिष्ट वाक्यांशों की पुष्टि चाहते हैं, तो वे पाठ-विश्लेषण में प्रकट होते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

फिलिप्पियों 2:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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