Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 कुरिन्थियों 13:8 बाइबल पद की व्याख्या
1 कुरिन्थियों 13:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियाँ हों, तो समाप्त हो जाएँगी, भाषाएँ मौन हो जाएँगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1 कुरिन्थियों 13:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 कुरिन्थियों 13:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 कुरिन्थियों 13:13 (HINIRV) »
पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थायी* है, पर इनमें सबसे बड़ा प्रेम है।

गलातियों 5:6 (HINIRV) »
और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारहित कुछ काम का है, परन्तु केवल विश्वास का जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है।

प्रेरितों के काम 19:6 (HINIRV) »
और जब पौलुस ने उन पर हाथ रखे, तो उन पर पवित्र आत्मा उतरा, और वे भिन्न-भिन्न भाषा बोलने और भविष्यद्वाणी करने लगे।
1 कुरिन्थियों 13:8 — प्रेम कभी टलता नहीं
यह भाग पॉल के प्रेम गुण के उच्चतम परिचय का क्लाइमैक्स है। वह बताता है कि प्रेम परमेश्वर की चाल-चलन के अनुरूप स्थिर, पूरक और जीवन-सञ्चालक है; चाहे भाषाएँ हों या ज्ञान, वे एक दिन समाप्त हो जाएँगे, पर प्रेम अजर है। यह पाठ क्राइस्टियन जीवन के उद्देश्य को केंद्रीकृत करता है: प्रेम ही वह ईश्वर-उत्पादन है जो कभी समाप्त नहीं होता।
ईश्वर या आस्था के बारे में पाठ से जो संकेत मिलता है
प्यारी भक्ति और सच्चे विश्वास का मूल तत्व प्रेम है। ईश्वरीय प्रेम सबसे पहले परमेश्वर से निकलता है और फिर मसीही समुदाय में जीवित रूप से प्रकट होता है। प्रेम की यह शाश्वतता बताती है कि परमेश्वर की योजनाएँ स्थिर और चिरस्थायी हैं, जबकि manusia की ज्ञानी-ज्ञान और भाषाओं जैसी उपलब्धियाँ क्षणिक और परिवर्तनशील हैं।
प्रमुख शब्दों की व्याख्या
अनुशीलित पांडित्य से सम्बन्धित क्रॉस-रेफरेन्स
पूरा पाठ यह स्पष्ट करता है कि ज्ञान, भविष्यवाणियाँ और भाषाएँ-तीननों चीजें परिपक्व प्रेम के सामने सीमित हैं। संबंधित संदर्भ बताते हैं कि भावना और चरित्र में पवित्र प्रेम का निवेश ही ईश्वर के राज्य के अनुरूप है—जहाँ प्रेम सबसे उच्च गुण है।
यह अन्य शास्त्रीय टिप्पणियाँ हमें यह समझाती हैं: प्रेम का स्थायित्व आत्मिक परिपक्वता का मूल है; ज्ञान और भविष्यवाणी ज्ञान-सीमाओं के भीतर रहते हैं, पर प्रेम स्वयं में पूर्ण है।
चित्रण और आधुनिक अनुप्रयोग
आज के समय में भी प्रेम की यह स्थिरता चुनौतीपूर्ण है: व्यावसायिक सफलता, कूटनीति, सामाजिक दबाव—इन सबमें प्रेम पहले की तरह केंद्रित बना रहे—यह बताता है कि मसीही जीवन का वास्तविक लक्ष्य कैसे प्रेम के साथ जुड़ना है। प्रेम वह धारा है जो व्यक्तिगत आस्था को व्यवहारिक विश्वास में बदलती है—धारणात्मक अनुभव से क्रियात्मक komunity में ले जाती है।
एक संक्षिप्त एकीकृत अध्ययन
मैथ्यू हेनरी और एैल्बर्ट बार्न्स तथा एडम क्लार्क जैसी सार्वजनिक-डायनामिक-commentary से मिलते-जुलते बिंदु इस प्रकार एकीकृत होते हैं:
निजी-जीवन में लागू करने योग्य बातें
प्रत्येक क्रिया में प्रेम को ऊँचा रखना ही जीवन का वास्तविक धर्म है—यही पवित्र आत्मा की प्रेरणा है जो हमें ईश्वर के साथ मिलकर पूर्णता की ओर ले जाती है।
उद्धृत उद्धरण: मैथ्यू हेनरी,Albert Barnes, Adam Clarke के कैप्शन-नोट्स के भीतर कुछ पंक्तियाँ स्पष्ट विवेचना में उद्धृत हैं; हालांकि यहाँ पाठ के मूल टेक्स्ट का संपूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है, उनके टिप्पणियाँ इस सार्वभौमिक सत्य को समर्थ करती हैं कि प्रेम ही परिपक्व ईमान और व्यवहार का केन्द्र है।