Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 कुरिन्थियों 13:4 बाइबल पद की व्याख्या
1 कुरिन्थियों 13:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 कुरिन्थियों 13:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 कुरिन्थियों 13:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 पतरस 4:8 (HINIRV) »
सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है*। (नीति. 10:12)

गलातियों 5:21 (HINIRV) »
डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इनके जैसे और-और काम हैं, इनके विषय में मैं तुम को पहले से कह देता हूँ जैसा पहले कह भी चुका हूँ, कि ऐसे-ऐसे काम करनेवाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।

इफिसियों 4:32 (HINIRV) »
एक दूसरे पर कृपालु, और करुणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।
1 कुरिन्थियों 13:4 पर यात्रा: प्रेम की चोटियाँ और दिशा
यह पद 1 कुरिन्थियों अध्याय 13 में प्रेम की श्रेष्ठता का केंद्र बनता है। पवित्र लेखन बताता है कि प्रेम कैसे आचरण को ढालता है, दिल को मोम की तरह नरम बनाता है और समुदाय के भीतर सचे व्यवहार की कसौटी बनता है। इस उदाहरणात्मक परिशोधन के माध्यम से हम जानते हैं कि आत्मिक वरदान कितने भी महान क्यों न हों, प्रेम के बिना सब कुछ खोखला है।
पद का संक्षिप्त परिचय
“प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।” यह पंक्ति प्रेम के गुणों की एक संरचना बनाती है—धीरज, दया, विनम्रता, इतर के लिए समर्पण—जो जीवन के हर क्षेत्र में व्यवहार का मानदंड बनते हैं।
पढ़ने का पथ: अध्याय के भीतर स्थिति
यह अध्याय चर्चियों के बीच एकीकृत प्रेम की धारणा प्रस्तुत करता है, विशेषकर तब जब विविध प्रतिभाओं और प्रशस्तियों के बीच समुदाय एक साथ ज़रूरतमंदों के लिए प्रेम दिखाने की चुनौती से गुजर रहा हो। 13:4 प्रेम को एक संपूर्ण नैतिक माप के रूप में स्थापित करता है ताकि भक्तिक्रम, आत्म-उच्चारण, और दिखावे से परे वास्तविक साहचर्य स्थिर रहे।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पद का मूल संदेश है—प्रेम सर्वस्व पर शासन नहीं चलाता, बल्कि अपने स्वभाव से दूसरों की गरिमा और कल्याण को जगाता है। धीरजवान प्रेम बहूमुखी परीक्षणों में स्थिर रहता है; कृपालु प्रेम दूसरों के लिए उदार और सहानुभूति दिखाता है; डाह से मुक्त प्रेम किसी के जीत और कमी पर चिह्न लगाकर तुलना नहीं करता; अहंकार छोड़कर प्रेम अपना सम्मान और उपलब्धि दूसरों के साथ बाँटता है; और प्रेम कभी स्वार्थ के लिए प्रचार नहीं करता—वह सच्चे आत्म-निश्चय से संचालित होता है।
अन्य अंशों के साथ तुलना: संदर्भों का छोटा संयोजन
- गालती 5:22-23 में पवित्र आत्मा के फलों की समकक्षता बताई गई है; यहाँ प्रेम स्वयं के प्रति नहीं बल्कि समुदाय के लिए एक जीवनसूत्र है, जो बाकी फलों को भी पुष्ट करता है।
- यूहन्ना 13:34-35 में कहा गया है कि प्रेम ही वह परिचय है जो अनुयायियों को एक जैसे बनाता है; यह पद प्रेम के व्यवहारिक रूप को स्पष्ट करता है।
- रोमियों 12:9-10 में प्रेम की सच्ची श्रद्धा और भाइचारे की उन्नति पर बल दिया गया है—धीरज और नम्रता वही मार्गदर्शक बनते हैं जो यहाँ प्रस्तुत हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
Cross-References (संक्षेप में और स्पष्ट लिंक)
- गालती 5:22-23: प्रेम के फलों के साथ श्रृंखला बनते हैं; निष्कर्ष: प्रेम केंद्रीय प्रेरणा है।
- यूहन्ना 13:34-35: प्रेम से बने रिश्तों की पहचान—सम्मान और एकता।
- रोम Romans 12:9-10: वास्तविक प्रेम की सक्रियता—भाइचारा और समूह के लिए प्राथमिकता।
समापन सार
1 कुरिन्थियों 13:4 का संदेश प्रेम की सबसे उच्च पराकाष्ठा को छूकर समुदाय को जीवन देता है। यह बताता है कि ताकत, ज्ञान या दिखावटी महानता कितनी भी महत्त्वपूर्ण हो, प्रेम के बिना सब कुछ नगण्य है। यदि हमारा लक्ष्य दूसरों के साथ ईमानदार, सहानुभूति-पूर्ण और विनम्र संबंध बनाना है, तो प्रेम ही वह प्रेरक शक्तি है जो हमें धैर्यपूर्वक चलना सिखाती है, कृपापूर्ण बनाती है, और अहंकार से बचाती है।
बाइबल टीका की दृष्टि से ध्यान रखने योग्य संकेत: प्रेम का यह गुण एकात्मता का चिट्ठा खोलता है—यह वह धागा है जो हृदयों को जोड़ता है और सभी उपहारों को पवित्रता के साथ परखा देता है।
उद्धृत उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलन से सीधे शब्द नीचे उद्धृत किए गए नहीं हैं, पर उनके तर्कत्त्व के अनुरूप इन गम्भीर गुणों पर उन्होंने विभिन्न जगहों पर स्पष्ट व्याख्या दी है, जिन्हें ऊपर समेकित किया गया है।