Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 4:8 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 4:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है*। (नीति. 10:12)
1 पतरस 4:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 4:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

नीतिवचन 10:12 (HINIRV) »
बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं।* (1 कुरिन्थियों. 13:7, याकूब. 5:20,1 पतरस 4:8)

नीतिवचन 17:9 (HINIRV) »
जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता* है, वह प्रेम का खोजी ठहरता है, परन्तु जो बात की चर्चा बार-बार करता है, वह परम मित्रों में भी फूट करा देता है।

1 पतरस 4:8 पर सार संक्षेप: प्रेम सबसे बड़ी बात
सीधे शब्दों में यह वचन कहता है: सबमें श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है।
स्थिति-परिप्रेक्ष्य
यह प्रेरित पतरस का अंतिम सुझाव है: समुदाय के भीतर प्रेम की गहराई और निरंतरता से जीवन की अशांत परिस्थितियों में भी ईश्वर की मय्या बनी रहती है। पीड़ाओं और कठिनाइयों के बीच प्रेम एक दवा है जो पाप-प्रवृत्ति को रोकता है, न कि केवल भावनात्मक अनुराग। नीतिपरक ढंग से प्रेम का यह ढाँपना संदिग्ध पापों के कारण होने वाले विभाजन और गलत निर्णयों को रोकने की भूमिका निभाता है।
Interpretive observations (व्याख्यात्मक अवलोकन)
कंटेक्स्ट और अन्य दृष्टि-चिह्न
1 पतरस 4 में मसीही जीवन की वास्तविक परीक्षा बाहरी कठिनाइयों में है, परन्तु भीतर प्रेम की गतिशीलता इसे स्थिर बनाती है। एक समुदाय के भीतर भाईचारे का ऐसा प्रेम दिखाता है कि जब एक-दूसरे के दोषों को ढंकना संभव हो, तो व्यावहारिक क्रिया-कलापों से भी समाज सुरक्षित रहता है।
छोटे थीमैटिक बिंदु
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसे
यथार्थ संबंध: (कॉलोसी 3:13) बताता है कि जन्म-जन्मांतर तक प्रेम को ढाँपना और क्षमा करना कैसे एक समुदाय को एक करता है; (यूहाना 13:34-35) बताता है कि प्रेम ही सबसे बड़ी पहचान है; (याकूब 5:19-20) में प्रेम के लिए एक-दूसरे के गलतियों को सुधारने के महत्व पर प्रकाश डाला गया है।
संक्षिप्त निष्कर्ष / व्यावहारिक takeaway
हमेशा प्रेम को प्राथमिक मानें ताकि वह गलतियों को ढंकने का ढांचा बने, न कि निष्ठूर आलोचना। जब परिवार, समुदाय या चर्च एक-दूसरे के लिए प्रेम दिखाते हैं, तब उनका जीवन दबावों के बीच भी स्थिर रहता है और वास्तविक बदलाव संभव होता है।
उद्धरण-नोट
यह भाग 1 पतरस 4:8 के सामान्य पार्थक्यों पर आधारित है—नीति. 10:12 के परिप्रेक्ष्य के साथ. लेखक के रूप में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के बिल्कुल शब्दों का संक्षेपण आवश्यक हिस्सों में शामिल किया गया है; अगर किसी उद्धरण का पूर्ण पाठ उपलब्ध हो, तो उसे यहाँ उद्धृत किया गया नहीं है ताकि मूल संदर्भ की प्रेरणा संरक्षित रहे।