Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 4:17 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 4:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि वह समय आ पहुँचा है, कि पहले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उनका क्या अन्त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते? (इब्रा. 12:24-25, यिर्म. 25:29, यहे. 9:6)
1 पतरस 4:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 4:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 25:29 (HINIRV) »
देखो, जो नगर मेरा कहलाता है, मैं पहले उसी में विपत्ति डालने लगूँगा, फिर क्या तुम लोग निर्दोष ठहरके बचोगे? तुम निर्दोष ठहरके न बचोगे, क्योंकि मैं पृथ्वी के सब रहनेवालों पर तलवार चलाने पर हूँ, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।' (1 पत. 4:17)

2 थिस्सलुनीकियों 1:8 (HINIRV) »
और जो परमेश्वर को नहीं पहचानते, और हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते उनसे पलटा लेगा। (भज. 79:6, यशा. 66:15, यिर्म. 10:25)

रोमियों 2:9 (HINIRV) »
और क्लेश और संकट हर एक मनुष्य के प्राण पर जो बुरा करता है आएगा, पहले यहूदी पर फिर यूनानी पर;
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
इस पद में प्रेरित पतरस बताता है कि परमेश्वर के न्याय का समय निकट है और वह सबसे पहले अपनी पूजा करने वाली, विश्वास रखने वाली सन्तानियों का परीक्षण और न्याय करेगा; इससे यह स्पष्ट होता है कि सच्चाई की परीक्षा विश्व में न्याय का आरम्भ है और उन लोगों के भाग के लिए जो सुसमाचार को ठुकराते हैं, परिणाम अधिक गंभीर होगा।
साहित्यिक संदर्भ
1 पतरस का यह भाग पत्र के अंतिम अनुभागों में आता है जहाँ लेखक कठिनाइयों में स्थिरता, पवित्र जीवन और अंतिम समय के संबंध में सलाह दे रहा है। अध्याय 4 में पहले से दंड और कष्ट सहने वाले विश्वासियों को याद दिलाया जा रहा है कि उनका दुःख अस्थायी है और परमेश्वर का न्याय आनेवाला है। यहाँ "न्याय का आरम्भ हम ही से होगा" वाक्यांश सामुदायिक परीक्षण की प्राथमिकता पर जोर देता है—पहले चर्च की परीक्षा और शुद्धि होगी, फिर संसार के अन्य लोग।
धार्मिक-थीमातिक महत्त्व
यहाँ दो मुख्य theological पहलू दिखते हैं: (1) सुधार और परिशोधन के लिए परमेश्वर का न्याय — जो विश्वासियों के जीवन में शुद्धता लाने के लिए है; (2) सुसमाचार अस्वीकार करने वालों के लिए गंभीर परिणाम — उन पर भी न्याय लागू होगा, और उनका भाग प्रश्नचिह्न में रखा गया है। यह पद विश्वासियों को दिलासा और चेतावनी दोनों देता है: दिलासा इस बात का कि वे निष्पक्ष जांच के भीतर सुरक्षित नहीं रहेंगे बल्कि परमेश्वर उन्हें परिष्कृत करेगा; चेतावनी इस बात की कि जो सुसमाचार से दूर है, उसका अंत भयावह हो सकता है।
शास्त्रगत संबंध और संदर्भ
चिंतन के लिए प्रश्न
1) क्या मेरी जीवनचर्या और निर्णय ऐसे हैं कि वे परमेश्वर के न्याय में स्थायी पाए जाएँ? 2) जब समुदाय के भीतर सुधार हो रहा हो, तो क्या मैं इसे सहयोगी और नम्र मन से अपनाता/अपनाती हूँ? 3) क्या मैं सुसमाचार के प्रति उजागर नकारात्मकता को पहचानकर उसे बदलने की चिन्ता कर रहा/रही हूँ?
महत्वपूर्ण उद्धरण (सारांश और संभ्रमित उद्धरण नियम)
मैथ्यू हेनरी की शैली बहुत बार हमें न्याय और परिशोधन के उपदेशों में गहरी व्याख्या देती है; अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने भी इस तरह के पदों में आत्मिक परीक्षण और सावधानी का उल्लेख किया है। अल्बर्ट बार्न्स का एक संक्षिप्त उद्धरण उपयोगी है: "न्याय का आरम्भ" के संदर्भ में बार्न्स लिखते हैं कि न्याय की शुरुआत चर्च से होना प्रशासनिक तार्किक और ऐतिहासिक रूप से व्याख्यायित की जा सकती है। (सटीक, संक्षिप्त शब्द उद्धृत किए गए हैं।)
समाप्ति — एकीकृत टिप्पणी
1 पतरस 4:17 विश्वासियों को यह समझाने का प्रयास करता है कि परमेश्वर का न्याय केवल सजा देनेवाला नहीं, बल्कि परिष्करण और परीक्षा करनेवाला भी है। पहले जो परमेश्वर के लोगों में होगा वह समुदाय के शुद्धिकरण और दृश्य विश्वास-निष्ठा का परीक्षण है; इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सुसमाचार का अस्वीकार करने वालों का भाग और भी गंभीर होगा। यह पद आशा और चेतना दोनों देता है: आशा कि परमेश्वर निष्पक्ष और परिष्कृत करनेवाले हैं; चेतना कि सुसमाचार को ठुकराने का परिणाम नकारात्मक होगा। विश्वासियों के लिए लागू शिक्षा यह है कि वे अपनी जाँच-परख में ईमानदार रहें और परिक्षाओं में धैर्य एवं पवित्रता बनाए रखें।