Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 4:7 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 4:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सब बातों का अन्त तुरन्त होनेवाला है; इसलिए संयमी होकर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। (याकू. 5:8, इफि. 6:18)
1 पतरस 4:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 4:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 1:13 (HINIRV) »
इस कारण अपनी-अपनी बुद्धि की कमर बाँधकर, और सचेत रहकर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलनेवाला है।

2 तीमुथियुस 4:5 (HINIRV) »
पर तू सब बातों में सावधान रह, दुःख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर।

1 पतरस 4:7 पर सार-संक्षेप और तात्पर्य
पण्डितों के शब्दों में यह संदेश संसार की अस्थिरता को उजागर करता है ताकि विश्वासियों का जीवन परमेश्वर के लिए जागरूक और प्रार्थनात्मक बने। प्रेषक पतरस समझाते हैं कि सभी चीजों का अन्त निकट है; इसलिए मनुष्य को संयमी होकर प्रार्थना के लिये सचेत रहना चाहिए। यह वाक्य मुख्य रूप से जीवन के नैतिक और आध्यात्मिक दिशा-निर्देशन की ओर संकेत करता है: समय का प्रभावी उपयोग, पवित्र जीवन और एक दूसरे के प्रति प्रेम का स्थापत्य।
केंद्रीय अर्थ
यह चेतावनी नहीं कि दिन-रात भागदौड़ और चिंताओं पर नियंत्रण खो दें, बल्कि यह कि संसार की अस्थिरता के बीच हम दृढ़ विश्वास से गहरी प्रार्थना में टिके रहें। सचेत प्रार्थना जीवन के हर क्षेत्र को मार्गदर्शित करती है—परिवर्तनशील परिस्थितियों में भी हमारी नजर परमेश्वर पर बनी रहती है।
मुख्य विषय
related passages
याकूब 5:8 के साथ समानता दिखती है—धीरज बनाए रखना और प्रभु के आगमन की तैयारियों में एकाग्र रहना। इफिसियों 6:18 में भी प्रार्थना और आत्म-नियन्त्रण की आवश्यकता पर बल है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
कृपा-आधारित सारांश
इस verse में तोहफे की तरह नहीं, बल्कि दायित्व का आस्वादन है: जीवन की गति तेज है, पर हमारी प्रार्थना और संयम उसे संयत करते हैं। यह स्मरण दिलाता है कि हमारा संसार-जीवन अस्थिर है, पर परमेश्वर की योजना स्थिर है।
Cross-references with brief explanations
याकूब 5:8 — धीरज बनाए रखने की प्रेरणा देता है, ताकि प्रभु के आगमन के समय तक हम दृढ़ रहें।
इफिसियों 6:18 — हर प्रकार की प्रेरणा, निवेदन और प्रार्थना के साथ परमेश्वर के सामने रहें; आत्म-नियंत्रण की माँग।
रोम 12:12 — ध्यान और आशा के साथ प्रार्थना में स्थिर रहने की exhortation; चरित्र-निर्माण में सहयोगी।
हिंदी स्रोत-उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke)
इस अनुभाग में हमने उनके सार्वजनिक-डायरी तात्पर्यों को एकीकृत करने की कोशिश की है।
कहा गया है कि Henry द्वारा प्रार्थना के लिए सचेत रहना मसीही जीवनी के केन्द्र में है; Barnes इसे धर्मशास्त्रीय जागरूकता और संयम के साथ देखते हैं; Clarke ने समय-सारिणी और संसार की स्थिरता के विरोधी तत्वों को पकड़ने की बात कही है। लघु उद्धरण: “प्रार्थना वह अस्त्र है जो कठिन समय में सृष्टि के प्रति विश्वास को मजबूत बनाता है।” (इन्हें संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है—पूर्ण पाठ संदर्भ पुस्तकों में देखें।)
समाप्ति में, यह प्रेषक के संदेश की तरह है: समय निकट है; इसलिए हर दिन प्रभु के साथ निकटता बनाएं, ताकि हमारी आंतरिक स्थिति और बाह्य कार्य एक साथ प्रार्थना के साथ पवित्र दिशा पाएं।
सूचनात्मक नोट: इस पंक्ति के लिए HINIRV अनुवाद में प्रयुक्त शैली का ध्यान रखा गया है ताकि हिन्दी पाठक सीधे अर्थ समझ सकें, साथ ही अन्य उद्धरणी theologians के दृष्टिकोण का समुचित संकलन हो सके।