Old Testament
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याकूब 5:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तुम भी धीरज धरो*, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का आगमन निकट है।
याकूब 5:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 5:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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याकूब 5:9 (HINIRV) »
हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, न्यायाधीश द्वार पर खड़ा है।

भजन संहिता 37:7 (HINIRV) »
यहोवा के सामने चुपचाप रह, और धीरज से उसकी प्रतिक्षा कर; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!

याकूब 5:8 का विश्लेषण
यह पद पवित्र आत्मा के प्रेरित याकूब के उपदेश का भाग है, जो वफादार आत्माओं को धीरज बनाए रखने और प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा के सद्व्यवहार की शिक्षा देता है। संदर्भ में, चर्मरूढ़, कठिनाई और धीरज के परीक्षणों के बीच विश्वासियों को स्थिर रहने के लिए प्रेरित किया गया है ताकि वे प्रत्यक्ष आशीर्वाद और पूर्णता के लक्ष्य को पकड़ सकें।
मुख्य अर्थ
“तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का आगमन निकट है।” यह पाठक को मानसिक एवं आध्यात्मिक धार धारण करने की मांग करता है—धैर्य बनाये रखना जब जीवन में कठिनाइयां प्रबल हों, क्योंकि प्रभु का दिनSoon आ रहा है और वह न्यायपूर्ण तरीके से पुनः आकाश से प्रसिद्ध करेंगे। यह कहता है कि विश्वास के साथ धैर्य से प्रतीक्षा करना ही वास्तविक चरितार्थ है, न कि क्षणिक हलचलें और चिंता।
2-3 प्रमुख विषय
संबंधित पद
मत्ती 24:42–44; रोम 8:25; हब 10:36—ये संदर्भ संकेत करते हैं कि विश्वासियों को कब्र नहीं बल्कि आशा के साथ जागृत रहना है, धीरज के फल और प्रभु के पुनः आगमन के समय सचेत रहना है।
व्यावहारिक reflection
कठिन समय में धीरज कैसे बनाये रखें? जिम्मेदारी—काम के प्रति समर्पण, नम्रता, और प्रार्थना के साथ दिनचर्या को बनाए रखें। यदि दिल में अ Zweifels स्थिति हो, तब परमेश्वर के वादों को स्मरण करें, ताकि हृदय दृढ़ रहे और प्रत्याशा में ठहराव बना रहे।
संक्षेप
याकूब 5:8 हमें धैर्य, दृढ़ व्यवस्था और प्रभु की निकटकालीन वापसी की आशा की धारणाएं देता है। यह अवसर देता है कि हम कठिन समय में भी अपने विश्वास को सुदृढ़ करें और प्रेरणा प्राप्त करें कि प्रभु का आगमन सत्य और न्याय का दिन है।
क्रॉस-रेफरेंस
1) मत्ती 24:42–44 — जागरूकता और तैयारी की महत्ता; 2) रोम 8:25 — विश्वास की प्रतीक्षा की दृढ़ आशा; 3) हब 10:36 — धैर्य से सुधार और ईश्वर के वादों की पूर्णता।
नोट: इस पाठ के साथ जुड़े विचारीय सरोकार सामान्य पवित्र-वचन व्याख्या-प्रधान हैं और पूर्व-प्रचलित आधुनिक टिप्पणीकारों की सार्वजनिक-domain धारणाओं से प्रेरित हैं, जैसे मैथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार-सारांश।