Old Testament
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याकूब 5:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठाकर खड़ा करेगा; यदि उसने पाप भी किए हों, तो परमेश्वर उसको क्षमा करेगा।
याकूब 5:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 5:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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याकूब 5:13 (HINIRV) »
यदि तुम में कोई दुःखी हो तो वह प्रार्थना करे; यदि आनन्दित हो, तो वह स्तुति के भजन गाएँ।

1 यूहन्ना 5:14 (HINIRV) »
और हमें उसके सामने जो साहस होता है, वह यह है; कि यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ माँगते हैं*, तो हमारी सुनता है।

याकूब 5:16 (HINIRV) »
इसलिए तुम आपस में एक दूसरे के सामने अपने-अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिससे चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।
याकूब 5:15 — पाठ का परिचय और संदर्भ
यह verses का भाग याकूब की आखिरी शिक्षा-सीरीज़ के बीच में आता है, जहां वह विश्वास के कार्यों की महत्ता पर जोर देता है। रोग से चंगाई और क्षमा—दोनों एक साथ एक विश्वास-आचरण के परिणाम के रूप में देखे जाते हैं। यह संदर्भ समुदाय के भीतर माफी, प्रार्थना और एक जीवंत विश्वास की गवाही देता है।
पठित पाठ का अर्थ: परमेश्वर की दया, विश्वास और चंगा होने की भूमिका
कथन कहता है: विश्वास की प्रार्थना द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसे उठाकर खड़ा करेगा; यदि उसने पाप भी किए हों, तो परमेश्वर उसको क्षमा करेगा। यहां तीन प्रमुख संकेत मिलते हैं:
गॉड और विश्वास के बारे में पाठ की प्रकाश-रेखा
याकूब बताता है कि परमेश्वर रोगी को बचाता है, यानी शारीरिक चंगा केवल एक प्रतिफल नहीं, बल्कि विश्वास-जीवन की पूर्णता है। यह दिखाता है कि विश्वास सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं होता; यह प्रार्थना, क्रिया और परोपकार के साथ जुड़ा होता है। भगवान क्षमा करने वाले हैं, और वह उद्धार की पूरी प्रक्रिया में भाग लेते हैं—दर्द, प्रार्थना और चंगा करने के क्रम में।
महत्वपूर्ण शब्द-चित्र
“विश्वास की प्रार्थना” एक सक्रिय, आश्वस्त और निर्भर-आचरण है। “उठाकर खड़ा करेगा” का अर्थ है स्वास्थ्य की पुनःस्थापना और जिंदगी में पुनः स्थिरता, जो परमेश्वर के योजनाबद्ध उद्धार के साथ जुड़ी है। “क्षमा करेगा” से संकेत मिलता है कि पश्चाताप और विश्वास के साथ परमेश्वर अपनी दया दिखाते हैं और भीतर की शुद्धि भी मिलती है।
अन्य आयतों से संबद्ध विचार
— पवित्रता और प्रार्थना की शक्ति पर प्रेरणा: 마태 21:22; जेम्स 1:6-7; 1 यीशु 1:9. इन संदर्भों में विश्वास के साथ प्रार्थना के परिणाम स्पष्ट होते हैं—चंगा होना, आशीष मिलना और परमेश्वर की क्षमा।
वर्तमान परिस्थिति के लिए अनुप्रयोग
आज के विश्वासियों के लिए यह संदेश दो ओर केंद्रित है: पहले, रोगी के लिए समुदाय की प्रार्थना और विश्वास से उपचार की उम्मीद बनती है; दूसरे, पाप की क्षमा और आत्म-समाधान से मानसिक-आत्मिक सुरक्षा मिलती है। चिकित्सा और प्रार्थना साथ-साथ चलें; समुदाय में किसी बीमारी के समय एकता बनाए रखें और विश्वास-आदय के साथ परमेश्वर की कृपा की आशा रखें।
प्रभावी cross-references
1) मत्ती 18:19-20: समुदाय की एकता और दो या तीन के मिलन से विश्वास की शक्ति खुलकर दिखती है—यहीं पर प्रार्थना और देखरेख का असर होता है।
2) इब्रानियों 4:16: विपत्ति के समय भी हम पास जाते हैं, कृपादत्त परमेश्वर के सिंहासन के पास, ताकि हमें दया और सहायता मिले।
3) 1 पतरस 4:8: प्रेम परम प्रभावी नियम है; क्षमाभाव और प्रार्थना एक-दूसरे के साथ जुड़ते हैं ताकि समुदाय सुरक्षित रहे।
संक्षिप्त समेकन
याकूब 5:15 में बताया गया है कि प्रार्थना-आश्वस्त विश्वास रोग-चंगा कर सकता है, जबकि परमेश्वर क्षमा देने वाला है। यह पाठ एक जीवंत विश्वास के चार आधार दिखाता है: विश्वास-आचरण, प्रार्थना की शक्ति, चंगेपन की आशा और पाप-क्षमा की पुष्टि।
कहावतों के रूप में शीर्ष उद्धरण (केवल उद्धरण, यदि उपलब्ध):
“विश्वास की प्रार्थना”—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से उपलब्ध समान विचारों के छोटे उद्धरण पाठ में मिलते हैं; इन theologians ने धर्म-सिखावन की गहराई से इस विषय को समझाया है, हैंडबुक-स्तर पर प्रयोज्य व्याख्या देते हैं।