Old Testament
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याकूब 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तुम ने धर्मी को दोषी ठहराकर मार डाला; वह तुम्हारा सामना नहीं करता।
याकूब 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 2:22 (HINIRV) »
न तो उसने पाप किया, और न उसके मुँह से छल की कोई बात निकली। (यशा. 53:9, 2 कुरि. 5:21)

प्रेरितों के काम 8:32 (HINIRV) »
पवित्रशास्त्र का जो अध्याय वह पढ़ रहा था, वह यह था : “वह भेड़ के समान वध होने को पहुँचाया गया, और जैसा मेम्ना अपने ऊन कतरनेवालों के सामने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला,

यूहन्ना 19:9 (HINIRV) »
और फिर किले के भीतर गया और यीशु से कहा, “तू कहाँ का है?” परन्तु यीशु ने उसे कुछ भी उत्तर न दिया।
याकूब 5:6 पर टिप्पणी—सीधा अर्थ
इस पद का मुख्य संदेश है: धर्मी को दुष्कर अत्याचार से मारना वह गलत है और उसे अपराधी ठहराने की वजह से तुम स्वयं दोषी ठहरते हो। याकूब हमें यह सिखाते हैं कि अनिर्णय और पक्षपात के कारण समाज में न्याय का गला घोंटा जाता है, और इस प्रकार हम परमेश्वर के सामने जवाबदेह ठहरते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
याकूब का लेखक ईश्वरीयासी जीवन में सत्य और न्याय की मांग करता है। यहाँ वह सामाजिक-साम्राज्य की दबंग ताकतों के द्वारा निर्दोषों के साथ किए गए अन्याय की चर्चा करते हैं। उस समय धार्मिक नेता और समाज के शक्तिशाली वर्ग अक्सर धर्म के मुखौटे के पीछे दबाव बनाकर गरीबों और निर्दोषों को दोषी ठहराते थे। यह पाठ हमें उसी जोखिम की याद दिलाता है: धर्म का अपमान तब होता है जब कमज़ोरों के खिलाफ भ्रष्टाचार और पक्षपात बढ़ता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- “धर्मी को दोषी ठहराकर मार डाला” का मतलब है कि उसने निर्दोष मान लिया गया व्यक्ति, जो न्याय के अनुरूप खड़ा था, उसे बिना प्रत्यक्ष प्रमाण के दोषी ठहराया गया।
- “उसका सामना तुम्हारे सामने नहीं करता” बताते हैं कि निर्दोष से दूरी बनाए रखना ही असली अपराध का हिस्सा है; विरोध न करना समान रूप से अन्याय में भाग लेना है।
मुख्य विचार
अन्य प्रासंगिक संदर्भ
व्याख्या के तानेबाने: यह पद Yaakov के अन्य आह्वानों के समान है जो सामाजिक अन्याय, पक्षपात और गरीबों के अधिकारों की रक्षा पर बल देते हैं.
1) प्रलोभन से बचना और धैर्य रखना: जब दबाव और वित्तीय लाभ दिखे, तब भी सत्य के पक्ष में खड़े होना महत्वपूर्ण है।
2) सत्य की गवाही: प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई और सत्यपरक प्रमाण देने चाहिए।
संभावित पाठ-गत अंतरंग संबंध
याकूब 2–4 अध्यायों में सामाजिक उद्धार और धनी-निर्दोष के बीच के तनाव पर केंद्रित है; इसे 5:6 के प्रकाश में पढ़ना वह स्पष्ट करता है कि बाहरी धर्म के भीतर भी अन्याय की प्रवृत्ति कैसे दिखती है और कैसे सीधा-सीधा निर्णय लेने की नैतिकता से मापा जाना चाहिए।
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
जब समाज में धर्म, धन या शक्ति के कारण किसी निर्दोष को दोषी ठहराया गया हो, तब हमें सच के साथ खड़े रहना चाहिए, उसे बचाने के लिए स्पष्ट गवाही देनी चाहिए, और विपक्ष के दबाव के बावजूद न्यायपूर्ण निर्णय का पक्ष लेना चाहिए।
संदर्भ-चिन्हित उद्धरण (अगर उपलब्ध हों)
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मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के संहितात्मक सार का संक्षेप यहाँ समाहित है; ये टिप्पणीकार सार्वजनिक-डोमेन से हैं और नीचे आवश्यक जगहों पर उनके विचारों के संकेत देखे जा सकते हैं।
Cross-references (संक्षेप):
नोट: उपलब्ध पवित्र-पाठ के अनुसार संक्षेप मात्र जोड़ा गया है; पूर्ण आयतन पाठ शामिल नहीं किया गया है।