Old Testament
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याकूब 5:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
देखो, जिन मजदूरों ने तुम्हारे खेत काटे, उनकी मजदूरी जो तुमने उन्हें नहीं दी; चिल्ला रही है, और लवनेवालों की दुहाई, सेनाओं के प्रभु के कानों तक पहुँच गई है। (लैव्य. 19:13)
याकूब 5:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 5:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 19:13 (HINIRV) »
“एक दूसरे पर अंधेर न करना, और न एक दूसरे को लूट लेना। मजदूर की मजदूरी तेरे पास सारी रात सवेरे तक न रहने पाए। (मत्ती 20:8, 1 तीमु. 5:18, याकूब. 5:4)

यिर्मयाह 22:13 (HINIRV) »
“उस पर हाय जो अपने घर को अधर्म से और अपनी उपरौठी कोठरियों को अन्याय से बनवाता है; जो अपने पड़ोसी से बेगारी में काम कराता है और उसकी मजदूरी नहीं देता।

व्यवस्थाविवरण 24:14 (HINIRV) »
“कोई मजदूर जो दीन और कंगाल हो, चाहे वह तेरे भाइयों में से हो चाहे तेरे देश के फाटकों के भीतर रहनेवाले परदेशियों में से हो, उस पर अंधेर न करना;
याकूब 5:4 पर टिप्पणी: मेहनत की कमाई और न्याय का चिल्लाहट
यह पद याकूब के उस उद्घोष के भीतर आता है जहाँ वे गरीब और दबे हुए लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। बेलदारों, खेतिहर मजदूरों और दिन-पर-दिन मेहनत करने वालों के साथ अन्याय हुआ है; उनके कठिन परिश्रम की वापसी उनके मालिकों द्वारा उचित मुआवजे के बिना ली जा रही है। याकूब बताते हैं कि मजदूरों की चिल्लाहट परमेश्वर के कानों तक पहुँची है, और उसी परमेश्वर के विरुद्ध जाँच-परख का दिन आयेगा।
मुख्य अर्थ
इस संदेश का केंद्र यह है कि समाज में आर्थिक असमानता and शोषण को समाप्त करने के लिए ईमानदार व्यवहार जरूरी है। जो लोग खेतों में काट-छाँट करते हैं, वे अपनी मेहनत का उचित वेतन चाहते हैं; पर उनके मालिक उसे नहीं देते, और वे चिल्लाते हैं—परमेश्वर उन चिल्लाहटों को अबाध नहीं रहने देता। यह एक नैतिक चेतावनी है कि व्यावसायिक जीवन में धन-लाभ के नाम पर ईमानदारी के साथ जाकर भी गलत कदम उठाने से बचना चाहिए।
मुख्य विषय
प्रमुख cross-reference
1) लैव्यवकि 19:13 — कर्तव्यपूर्ण वेतन और रुकावट-रहित व्यवहार की नींव दोनों में समानता: यह संदर्भ सीधे इस पाठ के साथ जुड़ता है कि श्रम की देन एक नैतिक और धार्मिक दायित्व है।
2) निराकरण के लिए न्याय: गलत वेतन के विरुद्ध चेतावनी और समय पर भुगतान की महत्ता को दिखाता है।
3) मसीह-आस्थाओं के साथ समानता: ईश्वर के अधिकार के अधीन जीवन जीना, बिना भेदभाव, एक न्याय-सम्मत समाज की स्थापना के लिए प्रेरित करता है।
व्यावहारिक विचार
परिवर्तन निम्न तरीकों से संभव हो सकता है: (a) मालिकों के लिए पेड-डायरी और वेतन-चेक प्रणाली को पारदर्शी बनाना; (b) मजदूरों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और समय पर भुगतान का पालन करना; (c) समुदाय-स्तर पर ऐसी नीति-आलोचना और समर्थन जहां दबे-छूटे लोगो के अधिकार संरक्षित हों।
संक्षिप्त समापन
याकूब 5:4 एक स्पष्ट चेतावनी है कि आर्थिक अन्याय परमेश्वर के न्याय-निर्वाह से बच नहीं सकता। मजदूरों की आवाज और उनकी दे दी गई मेहनत की पूर्ति होना चाहिए—ताकि समाज में सुरक्षा, सुरक्षा और सम्मान बना रहे।
संश्लेषण: एक unified दृष्टिकोण
पद के तीन प्रमुख पाठ्यांश— मजदूर की चिल्लाहट, लवनेवालों की दुहाई, और सेनाओं के प्रभु के कान—एक साथ मिलकर यह बताते हैं कि ईश्वर हर प्रकार के शोषण को नहीं बर्दाश्त करते। धार्मिक जीवन में ईमानदारी और न्याय की गहरी जड़ें हैं: सत्य, समानता और करुणा के साथ काम करना परमेश्वर के निकट चलना है।
उद्धरण-नोट: अगर पूर्वार्द्ध से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्द उपलब्ध होते, तो वे इस विषय पर स्पष्ट पुख्ता टिप्पणियाँ देंगे; यहाँ उनका प्रभाव एक समान-शब्दार्थ में समाहित है ताकि पाठक को एक संगत, धर्मनिष्ठ पंक्ति मिले।