Old Testament
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याकूब 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तुम पृथ्वी पर भोग-विलास में लगे रहे और बड़ा ही सुख भोगा; तुम ने इस वध के दिन के लिये अपने हृदय का पालन-पोषण करके मोटा ताजा किया।
याकूब 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 16:25 (HINIRV) »
परन्तु अब्राहम ने कहा, ‘हे पुत्र स्मरण कर, कि तू अपने जीवनकाल में अच्छी वस्तुएँ पा चुका है, और वैसे ही लाज़र बुरी वस्तुएँ परन्तु अब वह यहाँ शान्ति पा रहा है, और तू तड़प रहा है।

लूका 16:19 (HINIRV) »
“एक धनवान मनुष्य था जो बैंगनी कपड़े और मलमल पहनता और प्रति-दिन सुख-विलास और धूम-धाम के साथ रहता था।

याकूब 5:5 का संदर्भ और उद्देश्य
पंक्त में याकूब ने शास्त्री-धर्मियों और धनिक-स्वार्थियों के जीवन की एक स्पष्ट तस्वीर दी है। वे भोग-विलास में लिप्त रहते हैं, आरामपूर्वक सुख-सुखदायिनी चीजों को एकत्रित करते हैं, जबकि गरीब और प्रताडि़त लोग दयनीय स्थिति में हैं। यह वाक्य उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आंतरिक रूप से अन्याय और असमानता के साथ जीवन जीते हैं और अपनी मोह-लोभ से दिलों को मोटा बना लेते हैं।
मुख्य अर्थ
यह शास्त्रीय अवलोकन बताता है कि जिनका हृदय इतना दाम्पत्य-संवेदना से दूर है कि वे मृत्युलोक की वाणी पर चलते हैं, वे अपने धन-संपत्ति के कारण ईश्वर की सृष्टि, पर्यावरण और लोगों के बीच संतुलन को भंग कर देते हैं। “अपने हृदय का पालन-पोषण करके मोटा ताजा किया” का आशय है—आंतरिक आत्म-आनंद, धन की आसक्ति और दुष्कर्म-स्वरूप भोग का प्रोत्साहन, जो किन्हीं कठोर कदमों से प्राप्त होता है, और गरीबों के दर्द को अनदेखा किया जाता है।
मुख्य विषय
संदर्भित सम्बन्धी पद
1) मत्ती 6:19-21 में यीशु स्मरण कराते हैं कि जहां आपका धन है, वहीं आपका दिल होगा; भला-कर के धने की सुरक्षा नहीं, बल्कि आकाश का खज़ाना स्थिर होता है। यह verse इस पाठ से जुड़कर धन और दिल के बीच द्वंद्व की चेतावनी को पुष्ट करता है।
2) लूका 12:15-21 में समृद्ध और आत्म-ग़ौरव की कहानी दिखती है—जो संपत्ति से संतुष्ट रहता है, वह दूसरों के दर्द को नहीं देख पाता। यह भी याकूब के संदेश को समर्थ बनाता है कि वास्तविक जीवन धन से नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ रिश्ते से मापा जाता है।
3) 1 यात्री 5:8 में हमें सतर्क रहने की शिक्षा मिलती है—मोह से भरे संसार में शैतान चपल-चालाक है; हमारी भूख-लालसा हमें न केवल आत्मा बल्कि समाज पर भी चोट पहुँचाती है।
व्यावहारिक विचार
- अपने धन-सम्पत्ति के स्रोतों की जाँच करें: क्या लाभ के साथ दूसरों की ज़रूरतों का ख्याल भी है?
- जो व्यक्ति निर्धन है, उनके लिए दया और न्याय की पहल करें; भोग-आनंद के पीछे हत्या नहीं, पराक्रमी करुणा की देन दें।
- आदत बदलें: अगर हृदय कठोर हो गया है, तो प्रार्थना, दयानिधि, और कर्म-युक्त प्रेम से उसे नरम बनाएं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य हमें स्मरण दिलाता है कि धन-वैभव यदि दिव्य प्रेम और न्याय के विरुद्ध हो जाए, तो वह आत्मा के लिए खतरा बन सकता है। याकूब का संदेश है कि भोग के साथ ईश्वर की दिशा याद रखें और समाज के कमज़ोर हिस्से के प्रति संवेदना बनाए रखें—तभी हमारा व्यवहार सचमुच धर्मपूर्ण माना जाएगा।
क्रॉस-रेफरेंसेस
याकूब 5:1-6 — धनियों के अन्याय और गरीबों के अधिकार के बारे में स्पष्ट सन्देश। उपदेश: धन के साथ अन्याय से बचना और गरीबों के हितों की रक्षा करना परमेश्वर के प्रत्यक्ष विचार के अनुरूप है।
मत्ती 6:24 — एक से अधिक मालिक की सेवा नहीं; धन और परमेश्वर दोनों को एक साथ नहीं रखा जा सकता।
लूका 12:33-34 — तैयार रहने और खज़ाने को ऊँचे स्थान पर रखने की प्रेरणा; जहां आपका खज़ाना है, वहां आपका दिल है।
एनोटेड उद्धरण (यदि प्रयुक्त हो):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियाँ से उपयुक्त टिप्पणी: “धन के प्रति कोमल नहीं, बल्कि दयालु और न्यायपूर्ण होना चाहिए”—यह वाक्यांश इन टिप्पणीकारों के सामान्य सिद्धांत से संगत है।