Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 5:1 1 तीमुथियुस 5:2 1 तीमुथियुस 5:3 1 तीमुथियुस 5:4 1 तीमुथियुस 5:5 1 तीमुथियुस 5:6 1 तीमुथियुस 5:7 1 तीमुथियुस 5:8 1 तीमुथियुस 5:9 1 तीमुथियुस 5:10 1 तीमुथियुस 5:11 1 तीमुथियुस 5:12 1 तीमुथियुस 5:13 1 तीमुथियुस 5:14 1 तीमुथियुस 5:15 1 तीमुथियुस 5:16 1 तीमुथियुस 5:17 1 तीमुथियुस 5:18 1 तीमुथियुस 5:19 1 तीमुथियुस 5:20 1 तीमुथियुस 5:21 1 तीमुथियुस 5:22 1 तीमुथियुस 5:23 1 तीमुथियुस 5:24 1 तीमुथियुस 5:25



संक्षिप्त व्याख्या — संदर्भ में पद
1 तीमुथियुस 5:6 पौलुस की पत्रिका का एक आगाह करने वाला वचन है; यह चिट्ठी अफ़ीम के प्रवचन और समुदाय की व्यवस्था के प्रासंगिक निर्देशों में आती है। इसके पहले पद वृद्ध-विधवाओं, धार्मिक जिम्मेदारियों और प्रयोजनशीलता पर निर्देश हैं। यह विशेष पद उन लोगों की स्तिथि का वर्णन करता है जो अपने जीवन को भोग-विलास और आराम-प्रवृत्तियों में खर्च कर देते हैं।
मुख्य अर्थ
यह वचन बौद्धिक या शारीरिक मृत्यु का वर्णन नहीं कर रहा, बल्कि आध्यात्मिक पतन और जीवन के उद्देश्य का अभाव दिखा रहा है। "जीते जी मर गई" का अर्थ है कि व्यक्ति प्रभु के प्रति जीवित भरोसे, सेवा और परोपकार की स्थिति से विचलित होकर आत्मिक रूप से निष्क्रिय और फलहीन हो गया। जो केवल अपने सुख और विलासिता में लगा रहता है, वह समुदाय और परमेश्वर के काम में भाग नहीं ले पाता।
मुख्य विषय
संबंधित स्थान
यह विचार अनेक स्थानों पर प्रतिध्वनित होता है:
व्यावहारिक चिंतन
पढ़ने वालों के लिए यह वचन व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर आत्म-जांच का निमंत्रण है। कुछ प्रश्न मदद कर सकते हैं: मेरा जीवन किन गतिविधियों के इर्द-गिर्द घूमता है? क्या मेरा धर्म आध्यात्मिक अनुशासन, सेवा और प्रेम पर केन्द्रित है, या आराम और सुख-सुविधा पर? क्या मैं कमजोरों का सहारा बनने के बजाय स्वार्थी सुखों में खोया हुआ हूँ?
व्यावहारिक कदम:
पुरानी टिप्पणी की झलक
मैथ्यू हेनरी के विचारों में अक्सर आत्म-जागृति और नैतिक अनुशासन पर ज़ोर मिलता है; उन्होंने कहा है कि आत्मिक सुस्ती की उपमा और भोग-विलास का परिणाम आध्यात्मिक मृत्यु जैसा होता है (संक्षेप)। अल्बर्ट बार्न्स ने भी उल्लेख किया कि यह वचन व्यवहार और चरित्र की उपेक्षा पर चेतावनी है, जबकि ऐडम क्लार्क ने सामुदायिक उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित किया। (यहाँ से कोई शब्दशः उद्धरण नहीं किया गया है।)
संक्षेप
1 तीमुथियुस 5:6 हमें चेतावनी देता है कि भोग-विलास में लिप्तता आत्मिक जीवन को नष्ट कर देती है। यह हमें पुनः निर्देशित करता है—परमेश्वर के कार्य में जीवित और सक्रिय रहना, सेवा और प्रेम को प्राथमिकता देना ईसाई जीवन की पहचान है।