Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 5:1 1 तीमुथियुस 5:2 1 तीमुथियुस 5:3 1 तीमुथियुस 5:4 1 तीमुथियुस 5:5 1 तीमुथियुस 5:6 1 तीमुथियुस 5:7 1 तीमुथियुस 5:8 1 तीमुथियुस 5:9 1 तीमुथियुस 5:10 1 तीमुथियुस 5:11 1 तीमुथियुस 5:12 1 तीमुथियुस 5:13 1 तीमुथियुस 5:14 1 तीमुथियुस 5:15 1 तीमुथियुस 5:16 1 तीमुथियुस 5:17 1 तीमुथियुस 5:18 1 तीमुथियुस 5:19 1 तीमुथियुस 5:20 1 तीमुथियुस 5:21 1 तीमुथियुस 5:22 1 तीमुथियुस 5:23 1 तीमुथियुस 5:24 1 तीमुथियुस 5:25



अर्थ का प्रत्यक्ष सार
1 तीमुथियुस 5:17 में कहा गया है कि जो प्राचीन अच्छा प्रबन्ध करते हैं, विशेषकर वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, उन्हें दो गुना आदर के योग्य समझना चाहिए। यह वाचा मौलिक रूप से धार्मिक नेतृत्व और पादरी–शिक्षक की जिम्मेदारी की महत्ता को दर्शाती है: सक्षम और निष्ठावान शिक्षकों के लिए सम्मान और समर्थन आवश्यक है, ताकि उद्धारकर्ता येशु मसीह के सन्देश का सही ढंग से प्रचार और अनुशासन हो सके।
परिप्रेक्ष्यीय पृष्ठभूमि
पहली पत्र तीमुथियुस एक निजी निर्देशन है जो यीशु-समुदाय के प्रतिनिधियों के लिए मार्गदर्शक नियम देता है। यहाँ प्रेरित पौलुस नवीन समझ में प्रेस्बाइटरों (elder) और शिक्षकों के दायित्वों की समीक्षा करते हैं: श्रेष्ठता से भरा जीवन जीना, प्रबन्धन की कुशलता, और शिक्षण-कार्य में सत्कार्य। प्रचलित मौखिक परंपरा के अनुसार, प्राचीनों (elders) को विद्वत् और आत्म-नियमन के साथ कार्य करना चाहिए।
व्याख्यात्मक अवलोकन
सम्बद्ध अंश और उनका संक्षिप्त अर्थ
धर्मग्रंथों में समान विचारधारा के कुछ उद्धरण शामिल होते हैं, जो इस संदर्भ को गहरा करते हैं:
अन्य प्रामाणिक टिप्पणी से संक्षिप्त दृष्टि
यहाँ के अनुभवी टिप्पणीकारों के विचार हैं जो public-domain स्रोतों से मिलते हैं, क्रमशः:
— Matthew Henry: सक्षम शिक्षकों का सम्मान, क्योंकि वे विश्वास की दीवारों को मजबूत करते हैं और सत्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
— Albert Barnes: शिक्षकों के रूप में उनके दायित्व पर बल—वचन-प्रचार और अनुशासन की कुशल व्यवस्था।
— Adam Clarke: परिश्रम से आशय है सक्रिय और निष्कपट सेवा; समुदाय ने उनका सम्मान तभी किया जो सत्य के प्रति दृढ़ रहते हैं।
इनमें से संक्षेपित विचार: preached and taught diligently, receive double honor, क्योंकि उनका कार्य साझा विश्वास के निर्माण में एक सशक्त सहारा है।
संक्षिप्त thematic सूची
Cross-References और उनके बिंदु
संलগ্ন विचारों के लिए तीन छोटे जिक्र:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि चर्च-समुदाय में शिक्षकों की भूमिका समुदाय के लिए कितनी मौलिक है: उनका मार्गदर्शन विश्वास के स्वस्थ विकास की कुंजी है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
यदि आप किसी चर्च-शिक्षक या नेता की सेवा में हैं, तो leur परिश्रम और सच्ची शिक्षा के प्रति आपका समर्थन और सम्मान समुदाय की स्थिरता का आधार बनेगा। यदि आप शिक्षक नहीं हैं, तब भी अपने क्षेत्र के उन सदस्यों को सहयोग दें जो सत्य के संदेश को सरल, स्पष्ट और धैर्यपूर्वक प्रस्तुत करते हैं।