Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 तीमुथियुस 2:1 बाइबल पद की व्याख्या
1 तीमुथियुस 2:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अब मैं सबसे पहले यह आग्रह करता हूँ, कि विनती, प्रार्थना, निवेदन, धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएँ।
1 तीमुथियुस 2:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 तीमुथियुस 2:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 6:9 (HINIRV) »
“अतः तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो: ‘हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में हैं; तेरा नाम पवित्र* माना जाए। (लूका 11:2)

2 थिस्सलुनीकियों 1:3 (HINIRV) »
हे भाइयों, तुम्हारे विषय में हमें हर समय परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिए कि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ता जाता है, और आपस में तुम सब में प्रेम बहुत ही बढ़ता जाता है।

भजन संहिता 67:1 (HINIRV) »
प्रधान बजानेवाले के लिये तारवाले बाजों के साथ भजन, गीत परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हमको आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए, (सेला)
मुख्य बिंदु: विनती और व्यापक प्रार्थना से जीवन में आशीषें
1 तीमुथियुस 2:1 में प्रेरित पौलुस स्पष्ट करते हैं कि ईश्वर के सामने होने वाली सभी प्रकार की निवेदनाओं का प्राथमिक दायित्व सभी के लिए है। यह न केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए है, बल्कि समुदाय, राजनीति और सामाजिक प्रतिष्ठानों तक फैला हुआ है। इस verse का आध्यात्मिक उद्देश्य है कि विश्वासियों के जीवन में विनम्रता और सामूहिक intercession एक सामान्य अभ्यास बने।
कथात्मक संदर्भ ( literary context )
पहले अध्याय-पद से आगे बढ़ते हुए, यह प्रेरिती चिट्ठी सार्वजनिक प्रार्थना के स्थान को उजागर करती है। इस पुस्तिका में मंगलकारी संदेश का केंद्र न केवल व्यक्तिगत बचाव है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए न्यायपूर्ण और उद्धारकारी दुआ की मांग है। वाक्य यह बताता है कि prayer life का दायरा सीमाओं से परे है—यह राजा से लेकर कर्मचाऱी तक, सभी के लिए है।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व (theological significance)
यहाँ विनती, प्रार्थना, निवेदन और धन्यवाद में एकता है। प्रेरित पौलुस यह दिखाते हैं कि intercession एक सक्रिय, सकारात्मक क्रिया है, जिसमें विश्वासी एक ऐसी जीवनशैली अपनाते हैं जो दूसरों के लिए सम्मान और देखरेख दर्शाती है। यह नम्रता की पहचान है—कि हम अपने और अपने समुदाय के लिए ईश्वर के कृपापात्र बनते हैं। यह सिद्धांत पुराने नियम के आशीर्वाद और आह्वान के अनुरूप है, जहाँ परमेश्वर के लोग समुदाय के लिए विनती करते रहे हैं।
कैसे समझें और कैसे अपनाएं (practical applications)
आवश्यक cross-references और उनका संक्षिप्त अर्थ
- यिर्मयाह 29:7: शांति और कल्याण के लिए नगर-निवासियों के लिए प्रार्थना का महत्त्व। यह संकेत देता है कि intercession सामाजिक भलाई से जुड़ी है।
- मत्ती 5:44-45: प्रेम के रिश्तों में प्रार्थना का प्रभाव, सांसारिक-परिश्रम नहीं, पर आशीर्वाद का मार्ग।
- याकूब 5:16: सामुदायिक स्वीकृति और विश्वास के साथ विनती करना; पाप के क्षमायाचना के साथ intercession का महत्व।
पवित्र ग्रंथ से सूक्तियाँ (किसी भी समानार्थक उद्धरण की सीमा)
“विनती, प्रार्थना, निवेदन, धन्यवाद”—यह पंक्ति एक सार्वभौमिक अभ्यास का साधन बनती है, जिसमें हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं।
संक्रमण-खोज (questions for reflection)
सार संक्षेप (conclusion)
1 तीमुथियुस 2:1 इस बात की गवाही देता है कि परमेश्वर के सामने विनती-क्रिया एक व्यापक दायरा है—हर मनुष्य के लिए, हर परिस्थिति के लिए। एक प्रेरित-चेतना से भरे जीवन में intercession समुदाय को सुदृढ़ बनाता है, और ईश्वर के उद्देश्य को विश्व के भीतर प्रकट करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
फुटनोट: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के संक्षिप्त संकेत शामिल किये गये हैं; आवश्यक अस्पष्ट उद्धरण केवल उन्हीं के कुछ स्पष्ट बिंदुओं तक सीमित हैं।