Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 तीमुथियुस 2:14 बाइबल पद की व्याख्या
1 तीमुथियुस 2:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और आदम बहकाया न गया, पर स्त्री बहकावे में आकर अपराधिनी हुई। (उत्प. 3:6)
1 तीमुथियुस 2:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 तीमुथियुस 2:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 11:3 (HINIRV) »
परन्तु मैं डरता हूँ कि जैसे साँप ने अपनी चतुराई से हव्वा को बहकाया, वैसे ही तुम्हारे मन उस सिधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्ट न किए जाएँ। (1 थिस्स. 3:5, उत्प. 3:13)

उत्पत्ति 3:6 (HINIRV) »
अतः जब स्त्री ने देखा* कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उसमें से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, जो उसके साथ था और उसने भी खाया। (1 तीमु. 2:14)

उत्पत्ति 3:12 (HINIRV) »
आदम ने कहा, “जिस स्त्री को तूने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैंने खाया।”
1 तिमुथियुस 2:14 — पवित्र मार्गदर्शन में स्त्री का मान
इस पवित्र पाठ में प्रेरित पौलुस समकालीन चर्च को यह स्मरण दिलाते हैं कि परमेश्वर की बनावट के अनुसार पुरुष-स्त्री के विन्यास में विशेष भूमिका और जिम्मेदारियाँ हैं। यहाँ “आदम बहकाया न गया, पर स्त्री बहकावे में आकर अपराधिनी हुई” से यह स्पष्ट होता है कि इच्छुक दुष्टता भटकाव से आया, पर नैतिक जवाबदेही दोनों के लिए है, और स्त्री के संदर्भ में विशेष चेतावनी है कि बहकावे में आने पर परिणाम तीव्र होते हैं। यह वाकय हमारे विश्वास में पूर्ण निर्भरता, सच्ची शिक्षा और नियमित धार्मिक आचरण की आवश्यकता को दर्शाता है।
परिचयित सेटिंग —Immediate setting
लेखक पौलुस इस पत्र के माध्यम से सरल-उद्घोषणा कर रहे हैं कि चर्च-प्रवचन में प्रार्थना और शिक्षण को शुद्ध बनाए रखना आवश्यक है। यहाँ उल्लेखित प्रकरण असफलताओं के बजाय पवित्र जीवन के तरीके दिखाता है, जहाँ क्रमशः नियम, विनम्रता और सीखना उपस्तिथ रहते हैं।
ईश्वर, faith और जिम्मेदारी
यह वाक्य ईश्वर की रचना-स्थापना के अनुरूप नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है। पुरुष-गुण ऐसे समय में भी सत्य के संरक्षण का दायित्व निभाते हैं, जबकि स्त्री के लिए सतर्कता, साक्षर ज्ञान और सही शिक्षण को अपनाने की आवश्यकता रेखांकित होती है। परमेश्वर कभी गलत मार्ग नहीं देता; यह पाठ मानव-चयन और अनुभव के बीच साक्षरता का आह्वान है ताकि चर्च एक निर्भीक और विवेकपूर्ण समुदाय बन सके।
शब्दों का संकल्पना — शब्दार्थ स्पष्टीकरण
Related passages — संदर्भ
ध्यान देने योग्य अन्य रिकॉर्ड जो विचार को मजबूत करते हैं:
इन संदर्भों से एक विचार उभरता है: निर्भरता परमेश्वर पर, शिक्षा ठोस सामाजिक-आचरण पर, और बहकाव से बचाव के लिए सावधानी आवश्यक है।
आज के लिए अनुप्रयोग
चर्च और व्यक्तिगत जीवन में उपयोगी कदम:
संक्षेप
1 तीमुथियुस 2:14 एक पाठ है जो बताता है कि प्रभु की रचना के अनुसार वाक्यों, मार्गदर्शन और नैतिक जिम्मेदारी में संतुलन आवश्यक है। आदम के बजाय स्त्री के बहकावे से जुड़ी चेतावनी स्पष्ट है—पर हमारा लक्ष्य है विश्वास-आचरण में दृढ़ता, ताकि ईश्वरीय इच्छा की दिशा में चर्च जीवन चले।
उद्धृतियाँ (संक्षेप में)
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