Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 तीमुथियुस 2:2 बाइबल पद की व्याख्या
1 तीमुथियुस 2:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
राजाओं और सब ऊँचे पदवालों के निमित्त इसलिए कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गरिमा में जीवन बिताएँ।
1 तीमुथियुस 2:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 तीमुथियुस 2:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 2:9 (HINIRV) »
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5-6, व्य. 7:6, व्य. 14:2, यशा. 9:2, यशा. 43:20-21)

एज्रा 6:10 (HINIRV) »
इसलिए कि वे स्वर्ग के परमेश्वर को सुखदायक सुगन्धवाले बलि चढ़ाकर, राजा और राजकुमारों के दीर्घायु के लिये प्रार्थना किया करें।

यिर्मयाह 29:7 (HINIRV) »
परन्तु जिस नगर में मैंने तुमको बन्दी कराके भेज दिया है, उसके कुशल का यत्न किया करो, और उसके हित के लिये यहोवा से प्रार्थना किया करो। क्योंकि उसके कुशल से तुम भी कुशल के साथ रहोगे।
1 तीमुथियुस 2:2 (हिन् इरव) — विश्राम और चैन के साथ भक्ति
स्थान-संदर्भ: यह पद धर्मगामी जीवन के लिए नम्रतापूर्वक और व्यवस्थित जीवनशैली की महत्ता बताता है, विशेषकर प्रभु-सेवा और समाजिक व्यवस्था में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से। पैग़ंबरों और प्रेरितों के समय से प्रेरित यह उपदेश आज भी विश्वस्तरीय नागरिक-vyavahaar और चर्च-पालन के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देता है।
पाठ का तत्कालिक अर्थ — परमेश्वर के आगे शांतिपूर्ण जीवन की रूपरेखा
यह वचन राजा-हुक़्मरां और उच्च पदधारियों के लिए लिखित है ताकि लोग विश्राम और चैन के साथ प्रेरित-जीवन बिताएं। इसका मुख्य तात्पर्य है कि विश्वस्त ईमानदार जीवन परमेश्वर की महिमा के अनुरोध के साथ संगत हो, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक ढांचे में भी शांति और व्यवस्था बनाये रखे।
प्रमुख शब्दों और छवियों की स्पष्टता
संबंधित पद और पाठक के लिए संदर्भ
मार्था-जीवन तथा चर्च-प्रशासन के संदर्भ में इस विचार को आगे बढ़ाने वाले अन्य दार्शनिक पाठ—
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि विश्वसनीय ईमानदारी और विनम्रता के साथ सामाजिक-राजनीतिक संरचना के भीतर जीवन बिताना—वह उद्देश्य है जो भक्ति को मैच देता है और समाज में स्थिरता बनाता है।
गंभीर टिप्पणी — प्रसिद्ध विवेचनाओं से संजोए विचार
Matthew Henry के प्रवचन में यह बात उभरती है कि भक्ति का व्यवहार केवल चर्च-सभा तक सीमित नहीं है, बल्कि घर-परिवार, बाज़ार और सरकार तक फैला रहता है। Albert Barnes यह बताता हैं कि शासन के प्रति आस्था के साथ नागरिक-कर्तव्य भी निभाने चाहिए, ताकि राज्य-चर्च का संयोग सुधरे। Adam Clarke इसे ईमानदार जीवन के आवश्यक अंग के रूप में देखते हैं—जहाँ शांति और मर्यादा प्रत्यक्षतः विश्वास की पुष्टि करती है। (यह तीनों टिप्पणीकारों के तात्पर्य सार्वजनिक-domain विचारों से प्रेरित हैं; नीचे उनके वास्तविक उद्धरण नहीं दिये जा रहे हैं, पर उनकी सामान्य धारणा को संग्रहित किया गया है।)
आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षेप निष्कर्ष
1 तीमुथियुस 2:2 हमें बताता है कि एक संतुलित ईमानदार जीवन समाज के भीतर शांति, विश्राम और गरिमा के वातावरण को बनाये रखने के लिए आवश्यक है। परमेश्वर की सत्ता के अनुरूप रहते हुए एक विश्वासी नागरिक के रूप में हमें उच्च पदधरों के साथ भी उचित वर्ताव करना चाहिए ताकि हमारी भक्ति प्रभावी रूप से दिख सके और मानवीय संस्थाओं में ईमानदारी का प्रकाश बढ़े।