यिर्मयाह 29:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु जिस नगर में मैंने तुमको बन्दी कराके भेज दिया है, उसके कुशल का यत्न किया करो, और उसके हित के लिये यहोवा से प्रार्थना किया करो। क्योंकि उसके कुशल से तुम भी कुशल के साथ रहोगे।

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यिर्मयाह 29:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यह शास्त्र क्यों महत्वपूर्ण है

यिर्मयाह 29:7 एक कठिन परिस्थिति में आशा और व्यावहारिकता दोनों का सम्मिश्रण प्रस्तुत करता है। यह आयत परिसंघ के समय भेजी गई स्त्री और पुरुषों को निर्देश देती है कि वे अपने निर्वासनस्थल में केवल अस्थायी अतिथि न बनें, बल्कि वहां के भले का काम करें और प्रभु से प्रार्थना करें। आज भी यह वाक्य हमें सिखाता है कि सच्चा धर्म आत्मकेंद्रित भक्ति से आगे बढ़ कर सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक कल्याण में दिखाई देता है।

मूल संदर्भ

व्यवहारिक रूप से यह पत्र बैबिलोन में निर्वासित याहूदियों को भेजा गया था। यह गीतों और भविष्यवाणियों का सम्बंधित परिप्रेक्ष्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का आदेश है: जो नगर जहाँ उन्हें रखा गया है, उसके हित के लिये काम करो। यह आज्ञा निर्वासन को स्वीकार करने और पारस्परिक हित में लगन से भाग लेने की पूरक चेतावनी है।

मुख्य संदेश

तीन मुख्य बातें उभर कर आती हैं:

  • सामाजिक उत्तरदायित्व: अपने परिवेश के कल्याण के लिए प्रयास करना अनिवार्य है, भले ही वह स्थान अस्थायी क्यों न हो।
  • आध्यात्मिक जीवन और व्यवहार का समन्वय: प्रार्थना और लोकहित दोनों साथ-साथ रखने चाहिए—यहोवा से प्रार्थना व्यक्तिगत विश्वास को बनाए रखती है, जबकि नगर की भलाई क्रियात्मक प्रेम को दर्शाती है।
  • परस्पर निर्भरता: "क्योंकि उसके कुशल से तुम भी कुशल के साथ रहोगे" यह स्पष्ट करता है कि समुदाय की भलाई व्यक्तिगत भलाई से जुड़ी है।

समर्थक बाइबिल विषय

यह वचन बाइबिल के उन कई स्थानों से मेल खाता है जहाँ आम कल्याण और परोपकार को महत्व दिया गया है। नीतिवचन और यशायाह जैसे ग्रंथों में भी समाज के हित के कारण न्याय और करुणा का आग्रह मिलता है। यह मानवता के प्रति सक्रिय प्रेम और समुदाय के सुधार की बाइबिलीय परंपरा में ठोस योगदान देता है।

प्रासंगिक पारस्परिक संदर्भ

कुछ उपयोगी संदर्भ और उनका संबंध:

  • मत्ती 5:16 — जहाँ भलाई का कार्य दूसरों के सामने प्रकट होना चाहिए; यिर्मयाह 29:7 की तरह यहाँ भी विश्वास का प्रदर्शन समाज के लाभ में होता है।
  • नीतिवचन 11:11 — नगर और समुदाय की स्थिति पर उसके निवासियों के आचरण का प्रभाव बतलाया गया है; यही सिद्धांत यहाँ भी है।
  • यशायाह 56:7 — विदेशी और पराये लोगों को स्वीकारने और उनके साथ न्याय करने की बात; निर्वासनस्थियों में बने रहकर भलाई का काम करना इसी आदर्श को प्रदर्शित करता है।

पुरानी टिप्पणीकारों की संक्षिप्त टिप्पणियाँ

मैथ्यू हेन्‍री का एक संक्षिप्त उद्धरण: "Seek the peace of the city"—हेनरी सरलता से कहता है कि परमेश्वर की इच्छा है कि लोग समृद्धि की कामना करें जहाँ वे रहते हैं। (शॉर्ट उद्धरण)

एलबर्ट बार्न्स ने कहा कि यह आज्ञा न केवल प्रार्थना के लिए है, बल्कि सक्रिय भागीदारी के लिए भी; और एडम क्लार्क ने समाज के कल्याण में धर्म का औचित्य स्पष्ट किया। (शॉर्ट संदर्भ)

आत्मिक प्रतिबिम्ब

व्यक्तिगत स्तर पर यह आयत चुनौती देती है: जहाँ भी आप हैं — चाहे वह अस्थायी व्यवस्था हो, नौकरी का परिवर्तित स्थान, या नया नगर — आप अपने परिवेश के लिए क्या कर रहे हैं? प्रार्थना के साथ मिलकर सामाजिक हित में काम करना आपके विश्वास को व्यावहारिक रूप देता है और आपके और समुदाय दोनों के लिए जीवन के साधन मजबूत करता है।

निष्कर्ष के रूप में, यिर्मयाह 29:7 हमें बताता है कि सच्‍चा धर्म आशावादी, सक्रिय और परोपकारी होता है; वह स्थान जहाँ हम हैं, वहीं से हमें शांति और भलाई की खोज शुरू करनी चाहिए—और प्रार्थना द्वारा परमेश्वर से उस भलाई के लिये भागीदारी माँगनी चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 29:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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