यिर्मयाह 29:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा नेहेलामी शमायाह के विषय यह कहता है: 'शमायाह ने मेरे बिना भेजे तुम से जो भविष्यद्वाणी की और तुमको झूठ पर भरोसा दिलाया है,

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यिर्मयाह 29:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 29:31 — इस कथन का अर्थ

यहोवा शमायाह के विरुद्ध शिकायत करता है कि शमायाह ने मेरे बिना भविष्यद्वाणी की और तुमको झूठ पर भरोसा दिलाया है; यह वाक्य यह दिखाता है कि भविष्यद्वाणी के अधिकार और सत्यता परमेश्वर के पक्ष में स्थापित मापदंडों के अनुसार होनी चाहिए, न कि मनगढ़ंत या स्वार्थपूर्ण विचारों से:

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यिर्मयाह का समय बन्दी-काल के पूर्वक्ठ का है जब लोगों का आध्यात्मिक ठहराव डगमगाता है। यह अध्याय त्या काल के एक प्रेषित की ओर इशारा करता है जो गलत भविष्यवाणी कर के लोगों को भ्रमित करता रहा। यिर्मयाह के संदेश में परमेश्वर स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि न्युकृत या निजी लाभ के लिए किसी के द्वारा दी गई भविष्यवाणी, यदि वह परमेश्वर के निर्देशों के विपरीत है, सत्य नहीं मानी जाएगी।

interpretive observations

  • झूठी भविष्यवाणी की पहचान: जो लोग परमेश्वर के नाम पर वास्तविक निर्देशों के विपरीत भविष्य कहें, वे विश्वासयोग्य नहीं माने जाते।
  • नैतिक जिम्मेदारी: भविष्यद्वक्ता से यह अपेक्षा है कि वे सत्य और आदेशित मार्ग पर ही रहे; अन्यथा उनके दावे से लोगों को नुकसान पहुँच सकता है।
  • आध्यात्मिक संरक्षण: परमेश्वर अपने लोगों को भ्रम से बचाने हेतु सच्चे मार्ग का संकेत देता है, ताकि वे आत्मिक ठहराव बनाए रखें।

छोटा थीम-योजनात्मक सार

  1. परमेश्वर की पवित्रता बनाम झूठी आशा
  2. भविष्यवाणी की कसौटी: सत्य-परमेश्वर के निर्देशों से संगति
  3. कठिन समय में भी ईमानदारी और सचेत सूचना की अहमियत

संबंधित क्रॉस-रेफरेंस (संदर्भ व स्पष्टीकरण)

1) यिर्मयाह 14:14-15 — झूठी भविष्यवाणी के प्रभाव और दुष्परिणामों का सामाजिक प्रभाव; यह संदेश भी बताता है कि गलत भविष्यवाणी कैसे ईश्वर की अनुमति के बिना अस्तित्व में आ जाती है।

2) मत्ती 7:15 — सावधान रहें कि झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहने की चेतावनी; पहचान की कसौटी व्यक्तिगत जीवन के फल से जुड़ी है।

3) यूहना 14:26 — पवित्रात्मा की सहायता से सही ज्ञान का मार्गदर्शन; सही मार्गदर्शक वह है जो यथार्थ में परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप हो।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जो कुछ भी भविष्यवाणी या आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रस्तुत किया जाए, वह परमेश्वर की प्रकृति, वाक्यों और सत्यता से संगत होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति या प्रवक्ता का संदेश भटकाने, भय या स्वार्थपूर्ण लाभ के लिए प्रेरित हो, तो उसे स्वीकार न करें। सतर्क रहें, और आलोचनात्मक विवेक को खुला रखें ताकि सही मार्ग ढूंढ़ा जा सके।

संदर्भ-व्याख्या (संक्षेप में)

यिर्मयाह 29:31 की पंक्ति स्पष्ट करती है कि परमेश्वर ऐसे किसी भी संदेश को मान्यता नहीं देता जो उसके बिना या उसके कथन के विपरीत हो। यह चेतावनी भय से मुक्त होकर सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, ताकि समुदाय भरोसेमंद और स्थिर बना रहे।

नोट: इस पाठ के चलते Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; नीचे उल्लेखित लिंक शब्द उनके मौलिक विचार-प्रवाह से प्रेरित सामान्य निष्कर्ष हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 29:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 29:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 29:9 (HINIRV) »
क्योंकि वे मेरे नाम से तुमको झूठी भविष्यद्वाणी सुनाते हैं; मैंने उन्हें नहीं भेजा, मुझ यहोवा की यह वाणी है।

यिर्मयाह 14:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 14:14 (HINIRV) »
तब यहोवा ने मुझसे कहा, “ये भविष्यद्वक्ता मेरा नाम लेकर झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं, मैंने उनको न तो भेजा और न कुछ आज्ञा दी और न उनसे कोई भी बात कही। वे तुम लोगों से दर्शन का झूठा दावा करके अपने ही मन से व्यर्थ और धोखे की भविष्यद्वाणी करते हैं। (यहे. 13:6)

यिर्मयाह 29:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 29:23 (HINIRV) »
क्योंकि उन्होंने इस्राएलियों में मूर्खता के काम किए, अर्थात् अपने पड़ोसियों की स्त्रियों के साथ व्यभिचार किया, और बिना मेरी आज्ञा पाए मेरे नाम से झूठे वचन कहे। इसका जाननेवाला और गवाह मैं आप ही हूँ, यहोवा की यही वाणी है।'”

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