Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 तीमुथियुस 2:3 बाइबल पद की व्याख्या
1 तीमुथियुस 2:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता और भाता भी है,
1 तीमुथियुस 2:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 तीमुथियुस 2:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इब्रानियों 13:16 (HINIRV) »
पर भलाई करना, और उदारता न भूलो; क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्न होता है।

1 पतरस 2:5 (HINIRV) »
तुम भी आप जीविते पत्थरों के समान आत्मिक घर बनते जाते हो, जिससे याजकों का पवित्र समाज बनकर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्रहणयोग्य हो।

मुख्य व्यावहारिक बिंदु
1 तीमुथियुस 2:3 से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर की इच्छा के अनुसार हमारी प्रार्थना और दिनचर्या में नम्रता, शांतता और समुदायिक आचरण परमेश्वर को प्रिय है। उद्धारकर्ता के लिए यह एक मानक है कि हमारे विश्वास के साथ-साथ हमारे व्यवहार भी उसके मनोनुकूल हों।
साहित्यिक संदर्भ: संदर्भ-वयक और धारणा
पत्रीकरण का यह भाग पत्री पॉल के निर्देशों के अंतर्गत आता है कि प्रार्थना के स्थानों और मानवीय संस्थाओं के प्रति एक शुद्ध आचरण बनाए रखना आवश्यक है। यह वही बिंदु है जो पुराने नियम और नए नियम के संगति को दर्शाता है: दया, एकता और शांति के वातावरण में ईश्वर की महिमा दिखती है।
धार्मिक महत्व
यह वाक्य इस तथ्य पर बल देता है कि हमारे धार्मिक अभ्यास निष्कपट और नैतिक प्राथमिकताओं पर टिके हों। परमेश्वर को जो पसंद आता है, वह हमारे आंतरिक परिवर्तन के साथ सामाजिक करुणा और धार्मिक कर्तव्य की दृढ़ता भी है। यह केवल पवित्र आशीर्वाद नहीं, बल्कि समुदाय के हित में किया गया समर्पण है।
उद्धरण-आधार विचार (पढ़ाने के संदर्भ)
इस विचार की व्याख्या में पढ़ने वाले को Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान विचार मिलते हैं—यद्यपि हमने पूर्ण उद्धरणों का पाठ नहीं किया है, परन्तु इन टीका-लेखों के संकेत यह बताते हैं कि: अपने आचरण के साथ प्रार्थना और उपासना भी ईश्वर के मनपसंद पैटर्न में होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का द्वंद्व सत्य और विश्वास के बीच न रह जाए। Church Fathers के समानार्थी बिंदु यह बताते हैं कि ईश्वर की इच्छा में परम संयम, आत्म-नियंत्रण और एकता का पक्ष मजबूत है।
Cross-reference (संक्षिप्त सहयोग)
इन संदर्भों में यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर-प्रिय जीवन वह है जिसमें आचरण, प्रार्थना और समुदायिक समृद्धि एक साथ बढ़ें।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि उद्धारकर्ता के लिए हमारी भक्ति एक समरस, विनम्र और सामाजिक रूप से उपयोगी जीवन से अभिव्यक्त होती है। ईश्वर को अच्छा लगता है वह जीवन जिसमें प्रार्थना, शांति-पूर्ण व्यवहार और एक दूसरे के हितों के लिए सचेत प्रयास मिलकर चलते हैं।
यह व्याख्या HINIRV संदर्भ में है और Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke इत्यादि के विचारों के सार-विकास को समाहित करते हुए एक नई, संयुक्त व्याख्या प्रस्तुत करती है।