Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 तीमुथियुस 2:7 बाइबल पद की व्याख्या
1 तीमुथियुस 2:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं सच कहता हूँ, झूठ नहीं बोलता, कि मैं इसी उद्देश्य से प्रचारक और प्रेरित और अन्यजातियों के लिये विश्वास और सत्य का उपदेशक ठहराया गया।
1 तीमुथियुस 2:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 तीमुथियुस 2:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 9:15 (HINIRV) »
परन्तु प्रभु ने उससे कहा, “तू चला जा; क्योंकि यह, तो अन्यजातियों और राजाओं, और इस्राएलियों के सामने मेरा नाम प्रगट करने के लिये मेरा चुना हुआ पात्र है।

इफिसियों 3:7 (HINIRV) »
और मैं परमेश्वर के अनुग्रह के उस दान के अनुसार, जो सामर्थ्य के प्रभाव के अनुसार मुझे दिया गया, उस सुसमाचार का सेवक बना।

1 तीमुथियुस 2:7 — संदर्भ में निहित उद्देश्य
यह पद पॉल के निजी उद्देश्य और उसकी विश्वासी सेवा के स्पष्ट संकेत देता है। एपोस्तल पॉल स्वयं को प्रचारक, प्रेरित और अन्यजातियों के लिये विश्वास और सत्य का उपदेशक ठहराने की बात करते हैं—यह तीनों योग प्रकट करते हैं कि उनका मुख्य दायित्व क्या है: सुसमाचार को विश्व भर में पहुँचाना और ईमानावाही को स्थिति देना। इस तत्त्व को 2:6-7 के संदर्भ में देखना उचित है, जहाँ पॉल बल देता है कि वह ऐसी सदा-चिन्नित योजना के भागीदार है जो उद्धार का मार्ग देता है और वह ईश्वर की दया से चुना गया है ताकि वह यकीन भर दे और सत्य का उपदेश करे।
केंद्रीय अर्थ
इस पद का मूल आशय यह है कि पॉल अपने आप को परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार स्थिर और प्रमाणिक साधक के रूप में प्रस्तुत करता है। वह यह पुष्टि करता है कि उसका मिशन भयभीत नहीं, बल्कि स्पष्ट और दृढ़ है—उद्धार के संदेश को सत्य और विश्वास के साथ प्रचारित करना। “विश्वास और सत्य का उपदेशक” के शब्द तीन बातें दर्शाते हैं: (1) विश्वास के सत्य को व्यक्त करना, (2) सत्य के ढांचे में शिक्षण देना, और (3) अन्यजातियों के लिये यह संदेश पहुँचाना ताकि सभी को उद्धार का अवसर मिले।
मुख्य विषय
संबद्ध पदों से संबंधित संकेत
– प्रेरित के रूप में नियुक्ति और प्रचार का दायित्व 3:1-7 में भी उजागर होता है, जहाँ परमेश्वर की इच्छा के अनुसार नेतृत्व और सुसमाचार का वितरण निर्देशित है।
– रोम 1:5 और 10:15 जैसे पाठ प्रचार की सार्वभौमिकता और विश्वास के आधार पर उद्धार के संदेश की स्थापना की पुष्टि करते हैं।
जामीक अनुप्रयोग (व्यावहारिक चिंतन)
क्या आप उद्धार का संदेश सचमुच दूसरे तक पहुँचाने के लिए तैयार हैं? इसी पद से सीख मिलती है कि संदेश कैसे प्रस्तुत किया जाना चाहिए: स्पष्टता, दृढ़ता और ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप सम्पन्नता। स्वयं के दायित्वों के प्रति ईमानदार रहना, प्रवचनों में सत्य को प्राथमिकता देना, और पंथिक विभेद से ऊपर उठकर हर पुरुष और महिला तक पहुंचना—ये सभी चीजें इस पाठ से निकलती हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस
- 2 कुरिन्थियों 4:2: सत्य और पारदर्शिता के साथ प्रचार का अनुरोध; - रोम 10:14-15: पवित्र संदेश के लिए गवाहों की आवश्यकता; - एफिसियों 3:8: “अन्यजातियों के लिये परम पवित्र अनुग्रह” की भूमिका।
व्याख्या से निष्कर्ष, ये क्रॉस-रेफरेंसेस दिखाती हैं कि प्रचार की सच्ची भूमिका कैसे एक खुला और पहुँच योग्य उद्धार का संदेश बनती है, जो सभी तक पहुँचे।
संक्षिप्त समेकन
1 तीमुथियुस 2:7 में पॉल अपने मिशन को स्पष्ट करता है: प्रचारक, प्रेरित, और अन्यजातियों के लिये विश्वास और सत्य का उपदेशक—ताकि ईश्वर की योजना सारी दुनिया तक पहुँचे। यह न सिर्फ उसकी व्यक्तिगत बुलाहट है, बल्कि सभी मसीही के लिए एक प्रेरक मॉडल है: सत्य और विश्वव्यापन के लिए तैयार रहना, ताकि हर नर-नारी को उद्धार का अवसर मिले।