Old Testament
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इफिसियों 3:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और मैं परमेश्वर के अनुग्रह के उस दान के अनुसार, जो सामर्थ्य के प्रभाव के अनुसार मुझे दिया गया, उस सुसमाचार का सेवक बना।
इफिसियों 3:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इफिसियों 3:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इफिसियों 1:19 (HINIRV) »
और उसकी सामर्थ्य हमारी ओर जो विश्वास करते हैं, कितनी महान है, उसकी शक्ति के प्रभाव के उस कार्य के अनुसार।

इफिसियों 3:20 (HINIRV) »
अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है,

इफिसियों 3:2 (HINIRV) »
यदि तुम ने परमेश्वर के उस अनुग्रह के प्रबन्ध का समाचार सुना हो, जो तुम्हारे लिये मुझे दिया गया।
यो पद क्या कहता है (इफिसियों 3:7, HINIRV)
इस आयत का सीधा अर्थ है: परमेश्वर के अनुग्रह के एक विशिष्ट दान के अनुरूप, जो परमेश्वर के शक्ति-प्रभाव (सामर्थ्य) के अनुसार मुझे दे दिया गया, मैं वह दायित्व निभाने वाला सेवक बना। अर्थात प्रेरित पौलुस कहता है कि उसकी सेवकाई मानवीय योग्यता से नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और उसकी अदृश्य शक्ति के साथ सम्पन्न है।
परिप्रेक्ष्यात्मक पृष्ठभूमि
यह पंक्ति पौलुस इफिसियों के पत्र का हिस्सा है, जहाँ वे ईसाई विश्वास के गहरे रहस्यों को समझाते हैं—खासकर ईश्वर की योजना और मसीह के मवाद के अनुसारGentiles की स्थिति का समावेश। अध्याय 3 में पौलुस दिखाते हैं कि वह कैसे प्रभु द्वारा दिए गए नैतिक-रौशनी और प्रेरणा से सुसमाचार की सेवकई निभाते हैं। यह दायित्व उनकी आत्म-समर्पण और परमेश्वर के अनुग्रह के Invitational कॉल से प्रेरित है, न कि उनकी व्यक्तिगत योग्यता से।
व्याख्यात्मक बिंदु
मौलिक संदर्भों से संकलित साक्ष्य
इफिसियों 3:7 में स्पष्ट है कि सेवकाई का स्रोत दया-प्राप्त अनुग्रह है। पुराने वक्त के तल से प्रेरित क्लासिकल टिप्पणियाँ इसे निम्न प्रकार समझाती हैं:
प्लस, एपिगोलेटिकल विचारों में कहा गया है कि यह दुःख-सहनशीलता और प्रसार-कार्य का मिश्रण है, जिसमें सेवकाई का असली स्रोत परमेश्वर की कृपा है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा व्याख्या
1) इफिसियों 1:19-21: परमेश्वर की महिमा, शक्ति और प्रभुता के प्रभाव की अनुभूति—यह भी दिखाता है कि सर्वशक्तिमान कैसे सब कुछ नियन्त्रित करता है।
2) 2 कुरिन्थी 3:5: हमारी योग्यता खुद से नहीं, बल्कि परमेश्वर के द्वारा दी गई शक्ति से है; यह वही विचार पुनः स्थापित करता है कि सेवकाई नहीं मानवीय गुण, बल्कि दिव्यानुग्रह से संचालित है।
3) रोम 12:3: प्रत्येक को जो कुछ है, वह प्रभु की कृपा के अनुसार माप दे, ताकि हमारी भूमिका एक संतुलित और विनम्र सेवा बने।
संक्षिप्त विषयगत सूची
व्यावहारिक takeaway
हम भी अपनी सेवा में उस प्रेरणा को अपनाएं जो परमेश्वर की कृपा से आती है। यह याद रखें कि सफलता नहीं हमारे कसौटों से आनी है, बल्कि ईश्वर की शक्ति से—ताकि हमारी घोषणा में सत्य, आत्मविश्वास और नम्रता बनी रहे।
संक्षिप्त टिप्पणीकार-आउटलाइन
मैक्लॉन-स्टाइल विचार (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) के सार को एक साथ रखते हुए, यह पाठ यह दर्शाता है कि प्रेरित की सेवकाई एक दिव्य दायित्व है जो परमेश्वर की कृपा से आगे बढ़ती है और इसे सामर्थ्य से चलाया जाता है, ताकि मर्यादा-युक्त सुसमाचार विश्व में फैल सके।
उद्धरण संकेत: यदि नीचे के उद्धरण सीधे उनके लेखन से उद्धृत हों, तो वे यहां संक्षेप में उद्धृत होंगे:
“ईश्वर के अनुग्रह के अनुसार मुझे दिया गया ध्येय—सुसमाचार का सेवक बनना।”