Old Testament
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इफिसियों 3:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उसकी महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।
इफिसियों 3:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इफिसियों 3:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहूदा 1:25 (HINIRV) »
उस एकमात्र परमेश्वर के लिए, हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, गौरव, पराक्रम और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।

रोमियों 11:36 (HINIRV) »
क्योंकि उसकी ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

2 पतरस 3:18 (HINIRV) »
पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।
यह पद क्यों महत्वपूर्ण है
इफिसियों 3:21 का यह छोटा वाक्य परमेश्वर की महिमा और उसकी कृपा की अनंतता पर ध्यान केन्द्रित करता है। यह पाठ पाठक को आश्वस्त करता है कि राक्षसों और परिस्थतियों के बीच भी परमेश्वर की महिमा मसीह और कलीसिया में प्रकट होती है और वह पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती है। यह अंत्येष्टि नहीं, बल्कि निरन्तर स्तुति और आश्वासन का अभिषेक है।
मूल सन्दर्भ
पौलुस ने इफिसियों के पहले अध्यायों में मसीह में दिए गए आध्यात्मिक वरदानों और रहस्य की व्याख्या की। अध्याय 3 में वह विशेष रूप से गैर-यहूदीयों तक ईश्वर के रहस्यपूर्ण अनुग्रह की पहुँच और कलीसिया के लिये प्रार्थना का विषय उठाते हैं। पंक्ति-इक्षु "कलीसिया में, और मसीह यीशु में" यह स्पष्ट करती है कि परमेश्वर की महिमा व्यक्तिगत अनुभव और सामुदायिक पूजा—दोनों में दिखाई देती है। अंत में "पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग" से यह संकेत मिलता है कि यह महिमा समय की सीमाओं में बँधी नहीं है।
मुख्य संदेश
इस पद का मुख्य संदेश यह है कि परमेश्वर की महिमा स्थायी और सामूहिक है—वह कलीसिया में और मसीह में प्रकट होती है और उसे पीढ़ियाँ अगली पीढ़ियों तक जानें और मनाएँ। यह घोषणा विश्वासियों को यह स्मरण कराती है कि परमेश्वर की महिमा व्यक्ति या परिस्थिति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी आत्मिक अनुग्रह-योजना का केंद्र है।
समर्थक बाइबिलीय विषय
मुख्य पारस्परिक संदर्भ
निम्न पद इस वचन की समझ में सहायक हैं:
स्रोतों से कुछ संक्षिप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने लिखा है (संक्षेप में): "यह महान अन्त है, परमेश्वर की महिमा को केन्द्र में रखते हुए हमारी प्रार्थना का समापन।" (हाईलाइटेड उद्धरण, संक्षेपित रूप)।
अल्बर्ट बार्नेस ने टिप्पणी में संकेत किया कि यह वाक्य "प्रशंसा और दैवीय सततता का सार" प्रस्तुत करता है।
एडम क्लार्क ने उल्लेख किया कि परमेश्वर की महिमा का स्थायी उद्घोष कलीसिया की उपस्थिति और मसीह में स्थितीय जीवन की दृष्टि दर्शाता है।
एकीकृत सारांश और व्याख्या
इफिसियों 3:21 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की महिमा का केंद्र मसीह और उसकी देह—कलीसिया—है। पौलुस यहाँ व्यक्तिगत अनुभवों को सामुदायिक वास्तविकता से जोड़ता है: विश्वास अकेले नहीं, बल्कि जमा हुए लोगों के भीतर और मसीह में दीर्घकालिक स्तुति में प्रकट होता है। यह आश्वासन देता है कि परमेश्वर का काम केवल हमारे जीवनकाल तक सीमित नहीं; वह पीढ़ियों तक प्रभावशाली रहेगा।
ध्यानार्थ और प्रार्थना-संकल्प
आज के जीवन में यह पद हमें प्रेरित करता है कि हम अपना ध्यान मसीह में स्थिर रखें और कलीसिया के लिए निरन्तर प्रार्थना करें—ताकि परमेश्वर की महिमा हमारे समय में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे। एक संक्षिप्त प्रार्थना के रूप में: "परमेश्वर, तेरी महिमा हमारे भीतर और हमारे समुदायों में युग-युगानुयुग बनी रहे। आमीन।"