Old Testament
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सीधे अर्थ का स्पष्ट उद्घाटन
इफिसियों 2:1 में कहता है कि परमेश्वर ने μας को जीवन दिया—जो पहले पापों और अपराधों के कारण मरे पड़े थे—उसी प्रकार हमारे भीतर आत्मिक जीवन का संचार किया है। इसका मतलब यह है कि उद्धार वही है जो ईश्वर की कृपा से होता है, न कि हमारे अपने प्रयासों से।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
पत्र एफिसियों में खालीपन, मसीही जीवन की दिशा-निर्धारण, और ईश्वरीय कृपा की गरिमा पर जोर है। पॉल यहाँ बताना चाहते हैं कि पहले पाप के कारण लोग "मरे हुए" थे—शारीरिक जीवितता से जो निकट नहीं, बल्कि परमेश्वर के सम्बन्ध से दूर—परंतु परमेश्वर की अनुग्रह से वे अब जीवन में लौटते हैं। यह उद्धार का केंद्र है, न कि मानवीय योग या अच्छे कर्मों का परिणाम।
Interpretive observations (मुख्य विचार)
एक-लाइन थीम
संदर्भ-विवेचन (Related passages)
1) इफिसियों 1:4-5: परमेश्वर ने चहते हुए हमें अति पवित्र बुलाहट दी, जिसमें उद्धार शुरू होता है।
2) कुलुस 2:13-14: वह हमारे अपराधों को क्षमाकर के हमारे साथ नया जीवन देता है, और ऐसी चीजों को भी जो हमें दंडित कर रहीं थीं, उन्हें मिटाता है।
3) रोम 6:4: उसी प्रकार जैसे मसीह मरे के साथ पुनर्जीवित हुआ, उसी पर हम भी नये जीवन में चलें।
व्यापक संदर्भ में पाठ के अन्वय
यह वाक्य उस व्यापक सिद्धांत को प्रमाणित करता है कि ईश्वर की कृपा से ही ईमानदार व्यक्ति नया जीवन पाता है। यह बचाव, परिवर्तन, और कर्तव्य के बीच संतुलन को स्पष्ट करता है—हम पहले मरे थे, पर अब वह जीवन जो यीशु में है, हमारे भीतर काम कर रहा है।
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
नोट्स और उद्धरण (public-domain से संदर्भ)
हेनरी, Barnes, Clarke जैसे प्रचलित टिप्पणीकारों के संकलित विचारों से आवश्यक अंश संक्षेप में स्मरणयोग्य हैं; यदि उनके स्पष्ट शब्द-उद्धरण मिलते हैं, उन्हें यहाँ संकेत किया जाएगा।
संचित्रित उद्धरण-आलय
यदि उपलब्ध हो, तो इन विद्वानों के संक्षिप्त और उपयुक्त विचार नीचे सम्मिलित किए जाएंगे, किन्तु पूर्ण पाठ नहीं दोहराया जाएगा।