Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मतलब का सीधा सार
यही वचन कहता है: उद्धार विश्वास के द्वारा अनुग्रह से होता है—यह परमेश्वर का दान है, न हमारा कोई प्रयत्न बतौर परिणाम। इसका मतलब यह है कि उद्धार स्वयं परमेश्वर की कृपा से मिलता है, और मानवीय प्रयासों या धर्म-कामों से नहीं कमाया जा सकता।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
एphesians 2:8-9 तीन भागों में उद्धार की योजना को स्पष्ट करते हैं: पूर्व-स्थिति, अनुग्रह, और विश्वास। प्रेरित पौलुस इस ईमानदार रचना में बतलाते हैं कि हम पहले मृत थे, परन्तु ईश्वर के अनुग्रह से जीवित हुए। यह उद्धार मनुष्य की योग्यता पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा पर टिका है।
व्याख्यात्मक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संकेत मात्र)
1) अन्य उपदेश जो बतलाते हैं कि उद्धार कृपा से है: “क्योंकि हमने उद्धार स्वयं से नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह से पाया है”—यह पंक्ति विचार में समरूपी है।
2) विश्वास का स्थान: विश्वास सीधे उद्धार के साधन के रूप में है, न मानवीय उपयोगिता के कारण।
3) दान के स्वरूप: उद्धार परमेश्वर की देन है, न हमारी योग्यता।
संबद्ध विचार-धाराएं (संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी के अनुसार (संरक्षित विचार), उद्धार मोक्ष का आरम्भ ईश्वर की कृपा से होता है और कर्मों का योग नहीं; अब्राहम की आस्था से जुड़ी सिद्धांत में यह स्पष्ट होता है कि विश्वास ही परमेश्वर की कृपा को आश्वासन बनाता है।
एलेबर्ट बार्न्स के अनुसार, उद्धार का मूल तत्त्व यह है कि मानव के पास पहले से ही दोष है और अनुग्रह से उसे नवजीवन मिलता है, कर्मों की योग्यता नहीं।
एडम क्लार्क के अनुसार, उद्धार मुक्त देह-परिष्ठित स्थिति से आता है और यह ईश्वर के दयालु प्रतिफल का परिणाम है; मानव-उत्साह के अभाव में भी परमेश्वर की कृपा प्रभावी रहती है।
छोटी थीम-सूची
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम में से हर किसी को स्मरण रखना चाहिए कि उद्धार मात्र विश्वास से आता है और यह परमेश्वर के दान के रूप में है। दैनिक जीवन में इसका प्रभाव इस प्रकार दिखना चाहिए: ईश्वर के प्रति आभार, परमप्रियता और आत्म-निर्भरता से मुक्त रहते हुए दूसरों की सहायता। अपनी सुरक्षा न मानकर, विश्वास के साथ खुशी-खुशी ईश्वर की कृपा के साथ जीना सीखें।