Old Testament
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रोमियों 3:22 — धार्मिकता परमेश्वर की वह है जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करनेवालों के लिये है
प्रस्तावना: पथ-प्रदर्शक धर्म-न्याय के संदिग्ध तर्कों के बीच रोमियों 3:21-23 की गूँज हमें यह सिखाती है कि ανθρώπος के किये-कमायिश से नहीं, बल्कि परमेश्वर की धार्मिकता यीशु मसीह में प्रकट होती है। इस पंक्ति में नयी क्रिया-धर्म की भूमिका स्पष्ट होती है: धार्मिकता जो विश्वास पर आधारित है, वह सभी के लिए खुली है, बंधन-परिश्रम से नहीं, बल्कि विश्वास से प्राप्त होती है।
ईश्वर की यह धार्मिकता क्या है?
यह वाक्य बताता है कि परमेश्वर की धार्मिकता वह प्रतिफल है जो मसीह पर विश्वास से मिलती है—हर उस व्यक्ति के लिये जो मसीह को अपनाता है और विश्वास रखता है। यह धार्मिकता न्याय-परक (सिद्ध) नहीं कि हमने क्या किया, बल्कि यह है कि परमेश्वर ने क्या किया—यीशु के कर्म और उसकी पूर्णता के द्वारा हमारा ऋणी-खाता साफ हो जाता है। यह विश्वासी के लिए एक प्रवेशयोग्य अवस्था है, जिसमें भेदभाव नहीं रहा—न जाति, न जातीयता, न पाप की अंकों की अधिकता।
महत्वपूर्ण शब्दों की व्याख्या
अन्य पाठक-संदर्भ
- विषयगत संगति के लिए याद करें: रोमियों 1–3 में पाप की स्थिति और उसकी निष्कलंक चुकौती।
- गलातियों 2:16 और 3:11 में स्पष्ट किया गया है कि धर्मसत्यता: “क्योंकि मनुष्यअपने कर्मों से धर्मी ठहर नहीं सकता”—पर विश्वास से धारणीयता मिलती है।
- एब्राहम के विश्वास के कानून के बिना धर्मी ठहरना (रोमियों 4) की ओर संकेत करता है कि धार्मिकता विश्वास द्वारा प्राप्त होती है, निष्कलंक अभ्यास से नहीं।
प्राप्त करने योग्य निष्कर्ष
- परमेश्वर की धार्मिकता स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है, किसी खास परिश्रम या जातीयता पर निर्भर नहीं करती।
- विश्वास एक पवित्र निर्भीकता है जो उसे अपनाने वाले सभी के लिए उद्धार का मार्ग खोलती है।
- यह दया-प्रिय परमेश्वर के साथ भरोसे की सहभागिता है, न कि मनुष्यों की योग्यता पर आधारित योग्यता।
आज के संदर्भ में आवेदन
जीवन में हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारी स्थिति धार्मिकता के लिए कर्मों से नहीं, विश्वास की गहराई से निर्धारित होती है। आत्म-सम्मान और सुरक्षा केवल कर्म-सत्ता से नहीं मिलती, बल्कि मसीह में विश्वास से आती है। ईश्वर की यह धार्मिकता हमें नम्र बनाती है—हम उद्धार के प्रभुत्व को स्वीकारें, और यह विश्वास व्यवहार में प्रकट हो। साथ ही समुदाय-जीवन में समस्त विश्वासी एक समान अवसर पाते हैं, किसी भी भेदभाव के बिना, नवीन जीवन के साझा अनुभव में सहभागी होते हैं।
सरल सार
परमेश्वर की धार्मिकता वह विशाल दयालु योजना है जिसमें यीशु मसीह पर विश्वास करने वाले सभी लोग सम्मिलित होते हैं—यही वह चाबी है जो भेदभाव को हर लेती है और उद्धार के द्वार खोलती है।
उक्त उद्धरणों के वास्तविक स्रोत से संक्षिप्त नोट
अधिकृत टिप्पणीकारों के प्रकाशन से: - मैथ्यू हैनरी और ऐलबर्ट बार्न्स के संकलन में धार्मिकता के विश्वास-आधार के बारे में समान विचार मिलते हैं; केवल संक्षिप्त उल्लेख के लिए उनके शब्द यहाँ शॉर्ट-केस में नहीं दिए गए हैं, पर उनके प्रभावी कथन इस प्रकार हैं कि विश्वास से प्रतिष्ठा मिलती है, और कर्म-प्रधान धर्म नहीं।
क्रॉस-टेक्स्ट संदर्भ (संकेत मात्र, पूर्ण टेक्स्ट नहीं): रोमियों 1–3, गलातियों 2–3, रोमियों 4.