रोमियों 3:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए; कोई भलाई करनेवाला नहीं, एक भी नहीं। (भज. 14:3, भज. 53:1)

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रोमियों 3:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 3:12 — क्यों यह वाक्य आज भी अहम है

यह पद बताता है कि मानव सितंबर की तरह भटकाव और निराशा का शिकार है। पतरस-उत्पत्ति की रोशनी में भी यह बात साफ हो उठती है कि सभी लोग परमेश्वर की उदार क़र्ज़ से वंचित नहीं होते, परन्तु प्रकृति के कारण हर व्यक्ति के भीतर भलाई की कामना दुर्लभ और दुर्बल रह जाती है। रोमियों 3:12 में कवितामय रूप से लिखा गया है कि “सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए; कोई भलाई करनेवाला नहीं, एक भी नहीं।” यह निष्कर्ष कड़ी वास्तविकता है, जिससे प्रेरित होकर उद्धार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

original context का सार

यह पवित्रशास्त्र का भाग एपस्टल पौलुस के एक विशाल तर्क का हिस्सा है जो धार्मिक-जातीय मान्यताओं के पार जीवन के सत्य को उजागर करता है: मनुष्य अपने आप में न्यायसंगत नहीं है और शास्त्र में बताये गए कानून के बावजूद भीतर से पाप की प्रवृत्ति से मुक्त नहीं हो पाते। पौलुस का उद्देश्य है कि लोग यह स्वीकार करें कि उद्धार केवल ईश्वर की कृपा और विश्वास के द्वारा संभव है, न कि स्व-उद्धार से।

मुख्य संदेश

इस वाक्य का मुख्य संदेश यह है कि इंसानी कर्म अगर सही दिखते भी हों, फिर भी वे परमेश्वर के मानक के अनुरूप नहीं पहुँचते। सभी की भलाई से जुड़ी कल्पनाएं क्षणभंगुर हैं; niemand (कोई नहीं) जो निष्कपटता के साथ और शुद्ध हृदय से परमेश्वर के सामने खड़ा हो सके। अतः मानवजाति को कृपा-प्रधान उद्धार की आवश्यकता है।

समर्थन बाइबल थीम्स

  • पूर्ण निर्भरता परमेश्वर पर: मानवीय योग्यता से उद्धार नहीं मिल सकता।
  • पाप की सार्वभौमिकता: हर व्यक्ति पाप से प्रभावित है, चाहे उसका नज़रिया कितना भी धार्मिक क्यों न हो।
  • उद्धार की आवश्यकता: न्याय से पहले दया और विश्वास की रास्ते खुलते हैं; योहन्ना 3:16 जैसी घोषणाएं मार्ग दिखाती हैं।

संकेतक cross-references

इन संदर्भों से इस तर्क के व्यापक स्वरूप को समझना आसान बनता है:

  • भज 14:3; भज 53:1 — समान सामाजिक-मानव स्थिति का पुराना उल्लेख, जिसमें कर्म से न्याय संभव नहीं दिखाया गया।
  • रोमियों 3:10-12 — पवित्रशास्त्र का समान नैतिक निष्कर्ष और सभी की कमी की पुष्टि।
  • रोमियों 5:8-9 — परमेश्वर की कृपा से उद्धार की आवश्यकता और उपलब्धि का मार्ग।

पुनरावलोकन और देवotional विचार

यहाँ एक सरल ध्यान है: जब हम अपनी स्थिति को सही तरीके से देखते हैं, तब हम घटी नितांत आवश्यकता की ओर जाते हैं—कृपा और विश्वास द्वारा उद्धार। आत्म-आत्मा के अनुसार जीना तब संभव होता है जब हम अपने प्रयासों को नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा को केंद्र में रखते हैं।

संक्षिप्त समेकन

रोमियों 3:12 हमें यह याद दिलाता है कि सभी मानव प्रवृत्ति में भलाई की वास्तविकता कम है और उद्धार केवल ईश्वर की अनुग्रह से संभव है। यह संदेश न केवल एक तत्त्वज्ञानी निष्कर्ष है, बल्कि हर दिन के व्यवहार और विश्वास की दिशा तय करने वाला है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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