रोमियों 3:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनके पाँव लहू बहाने को फुर्तीले हैं।

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रोमियों 3:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य समझ: पाँवों का फूर्ति—आतुर और ध्वंसक पाप की तस्वीर

रोमियों 3:15 के पाठ में जिस वाक्यांश पर केंद्रित है वह यह बताता है कि मनुष्य के पाँव कितनी तीव्रता से हिंसा और नुकसान के रास्ते पर दौड़ पड़ते हैं। शास्त्र का यह कथन नहीं केवल किसी व्यक्तिगत दोष की बात है, बल्कि पाप की समग्र प्रवृत्ति को उजागर करता है—क्योंकि पाप के मार्ग पर चलना एक आम, सुविचारित और निरंतर प्रक्रिया है। यह वचन हमें चेतावनी देता है कि हमारे व्यवहार में भी कभी-कभी सहज धारा के साथ हरकत होती है, जो समाज को क्षति पहुँचाती है और उद्धार के मार्ग से दूर करती है।

कथानक संदर्भ ( literary context )

इस भाग में रोमियों के लेखक पाप की सार्वभौमिकता और परमेश्वर की पवित्रता के विरुद्ध मानव स्थिति की वास्तविकता को दर्शाते हैं। 3:15 जैसी पंक्तियाँ बताती हैं कि नर-मनुष्य कैसे अपने स्वार्थ को बढ़ावा देते हैं और हिंसात्मक, विरोधी रुख अपनाते हैं। यह स्पष्ट करता है कि उद्धार का संदेश केवल नैतिक सुधार नहीं, बल्कि यह पाप की गहराई और उसकी भयावहता के बारे में गहन जागरूकता है।

आध्यात्मिक महत्व (theological significance)

इस वाक्य का अभिप्राय यह है कि पाप की प्रवृत्ति सतह पर नहीं रुकती, बल्कि यह शोषण और अन्याय के मार्गों को प्रोत्साहित करती है। परमेश्वर के धर्म में न्याय के साथ-साथ करुणा है; इसलिए पाप की तीव्रता को समझना और उसका मुकाबला करना आवश्यक है। यह बतलाता है कि उद्धार केवल कानून की स्तुति नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय के परिवर्तन से जुड़ा है।

कॉननेक्शन across Scripture

  • यशायाह 59:7 — पाप की तीव्रता और हिंसा के मार्ग के संकेत; आत्मा-जीवन के विरुद्ध का संघर्ष।
  • यूहन्ना 8:44 — शैतान के प्रेरणास्त्रोत के रूप में हिंसा और झूठे मार्गों की भूमिका, जो पाप के मूल कारण को प्रकट करता है।
  • रोमियों 5:12 — पाप के प्रवेश से मृत्यु का प्रभाव, और उद्धार की आवश्यकता का तात्पर्य।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि पृथ्वी पर पाप की “फुर्ती” एक व्यवस्थित नीति नहीं, बल्कि एक टूटी-फूटी व्यवस्था है जिसका सामना उद्धार की प्रेरणा से ही संभव होता है।

चार-चरणीय चिंतन (questions for reflection)

  1. मेरे कदम किस दिशा में भागते हैं—उद्धार के मार्ग या स्वार्थ के रास्ते?
  2. किस तरह से समाज में हिंसा या अन्याय के प्रसार को रोकना संभव है?
  3. गहरे मनोभावों में परिवर्तन कैसे संभव है जिससे पाप के पथ से परहेज़ हो सके?

संक्षिप्त निष्कर्ष

रोमियों 3:15 के संकेत हमें यह याद दिलाते हैं कि पाप की तेज चाल केवल दुष्कार नहीं, मानव की प्राकृतिक प्रवृत्ति है जिसे परमेश्वर की अनुग्रहकारी कृपा से ही रोका जा सकता है। उद्धार का प्रभाव तभी है जब हृदय परिवर्तन हो, और हमारी गति हिंसा-प्रधान मार्ग से दूर होकर प्रेम-प्रधान मार्ग की ओर मोड़ ले।

पूर्वतः उद्धृत विचार (प्लेटफॉर्म से मिलते-जुलते सार)

धार्मिक-इतिहास के विद्वानों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों ने यह स्पष्ट किया है कि पाप की चाल सामान्य मनोवृत्ति का परिणाम है, तथा उद्धार केवल आचरण नहीं, बल्कि हृदय के परिवर्तन पर निर्भर है।

उद्धरण संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के ठोस शब्दों के छोटे-छोटे उद्धरण उपलब्ध होने पर नीचे दिए गए संदर्भों के अनुसार उपयोग किये जा सकते हैं: “...,” “...,” “...।”

cross-references (3) और उनके संकेत

यशायाह 59:7 — पाप की तीव्रता की भयावहता को दर्शाता है; मनुष्य का मार्ग हिंसा की ओर जाता है।

यूहन्ना 8:44 — पाप के स्रोत, शैतान की प्रेरणा से मार्गदर्शित गलत रास्ते।

रोमियों 5:12 — पाप के आने से मृत्यु का प्रवेश, उद्धार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 59:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 59:7 (HINIRV) »
वे बुराई करने को दौड़ते हैं, और निर्दोष की हत्या करने को तत्पर रहते हैं; उनकी युक्तियाँ* व्यर्थ हैं, उजाड़ और विनाश ही उनके मार्गों में हैं।

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क्योंकि वे बुराई ही करने को दौड़ते हैं, और हत्या करने को फुर्ती करते हैं। (रोम. 3:15-17)

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नीतिवचन 6:18 (HINIRV) »
अनर्थ कल्पना गढ़नेवाला मन, बुराई करने को वेग से दौड़नेवाले पाँव,

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