रोमियों 3:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनका गला खुली हुई कब्र है: उन्होंने अपनी जीभों से छल किया है: उनके होंठों में साँपों का विष है। (भज. 5:9, भज. 140:3)

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रोमियों 3:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 3:13 का अर्थ

इस पद के मूल अर्थ में कहा गया है: उनके गला खुली हुई कब्र है; उन्होंने अपनी जीभों से छल किया है; उनके होंठों में साँपों का विष है। इसका संकेत मानव दोष के गहरे चित्र को प्रस्तुत करता है—शास्त्र कहता है कि सभी ने पाप किया है और मार्ग में बाधा डालते हैं। यहां उद्धरित भजन के पद इस विचार को पुष्ट करते हैं कि मानव स्वभाव में छल, पिशाच-जैसी निन्दा और विषाक्त बोलचाल है, जो 하나님 के विश्वसनीय कानून से दूर ले जाती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

रोमियों की पांडुलिपि में पाप और विश्वास के नियमों के बीच स्पष्ट तुलना दी गई है। इस अंश में पवित्रशास्त्र दर्शाता है कि मानव जाति का नैतिक पतन सार्वभौमिक है और यह मृत्यु के पथ पर डग भरता है जब तक परमेश्वर का उद्धारक उपाय न हो। भजन 5:9 और भजन 140:3 के उद्धरण से यह संकेत मिलता है कि अतीत में यह प्रवृत्ति प्रचलित रही है—क्योंकि बोली के माध्यम से छल और विष फैलते रहे।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • तत्व की दृष्टि: "गला खुली हुई कब्र" एक कठोर प्रतीक है—कथन करता है कि शब्द कैसे आत्मा के गम्भीर रोग का मार्ग बनते हैं।
  • जीभ का प्रभाव: छल के माध्यम से व्यक्ति समाज को दूषित करता है; भाषण में हिंसा और पाप का नमूना प्रकट होता है।
  • विषयुक्त होंठ: शर्करा नहीं—यह पाप के विष की भाषा है जो लोगों के भीतर विष फैलाता है।

संक्षिप्त थीमैटिक सार

  1. समुदाय में पाप की समावेशी प्रकृति
  2. भाषा का नैतिक प्रभाव और परिणाम
  3. उद्धार की आवश्यकता और ईश्वर की कृपा

अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस

रोमियों 3:10–12 बनाम भजन 14:1–3 की समांतरता: मानव के भीतर बिना कर्म पराप्न नहीं का गुण बताती है कि सभी दिल से गलत हैं; यह प्रवृत्ति उद्धार के बिना स्थिर नहीं रह सकती।

याकूब 3:5–9: भाषण का दुष्प्रभाव और दुष्कर प्रभाव, भाषिक आचरण से भीतर के पाप का बहिर्गमन—बोलचाल की गड़बड़ी से भी चरित्र बनता-बिगड़ता है।

भजन 5:9 और भजन 140:3: शब्दों में छल व विष कैसे सामाजिक जीवन को नुकसान पहुँचाते हैं, इसका छायाचित्र मिलते हैं।

संवादी निष्कर्ष और व्यावहारिक अनुप्रयोग

यह शास्त्र बताता है कि मानव की नैतिक दुर्बलता को केवल धर्मशास्त्र के नियमों से नहीं बदला जा सकता। उद्धारकर्ता के विश्वास के द्वारा ही पुराने पाप के प्रभाव को मिटाया जा सकता है। हमारे बोले गए शब्दों/कथनों का परखना जरूरी है ताकि दया, सत्य और शुद्धता की दिशा में अग्रसर हों।

यदि आप जीवन में सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलना चाहते हैं, तो अपने शब्दों के निहितार्थ पर ध्यान दें, और ईश्वर की कृपा से उद्धार की अपेक्षा रखें।

मुख्य उद्धरण-आधार: इस पद के आस-पास के अभिधारणा में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संदर्भित विचार सामंजस्यपूर्ण रूप से सहायक रहते हैं—परन्तु यहाँ हम मूल पाठ के अर्थ पर केंद्रित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि उनके मुँह में कोई सच्चाई नहीं; उनके मन में निरी दुष्टता है। उनका गला खुली हुई कब्र है*, वे अपनी जीभ से चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं। (रोम. 3:13)

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उनका बोलना साँप के काटने के समान है, उनके मुँह में नाग का सा विष रहता है। (सेला) (रोम 3:13, याकू. 3:8)

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“हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम चूना फिरी हुई कब्रों* के समान हो जो ऊपर से तो सुन्दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं।

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