रोमियों 3:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

कदापि नहीं! वरन् परमेश्‍वर सच्चा और हर एक मनुष्य झूठा ठहरे, जैसा लिखा है, “जिससे तू अपनी बातों में धर्मी ठहरे और न्याय करते समय तू जय पाए।” (भज. 51:4, भज. 116:11)

पिछला पद
« रोमियों 3:3
अगला पद
रोमियों 3:5 »

रोमियों 3:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 3:4 पर दृष्टि: परम सत्य तो परमेश्वर ही है

रोमियों के पाठ में यह दृढ़ कथन है कि मानवीय कोशिशों के बावजूद परमेश्वर सत्य ही है और वह कभी झूठा नहीं ठहर सकता। विषयगत संदर्भ में बाइबल उस महान सत्य पर केंद्रित है कि ईमानदारी, प्रतिपूर्ति और धर्मसत्य में परमेश्वर ही अंतिम न्यायी है। इस पद के बहाने प्रेरित पॉल यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि शास्त्रों के अनुसार मानव के भीतर जो भी संदेह या निराशा है, उसे दूर करने का ठोस मार्ग ईश्वर की सच्चाई है, न कि मनुष्यों की मान्यताएं या बहाने।

पद का केंद्रित पाठ और उसका संदेश

“कदापि नहीं! वरन् परमेश्‍वर सच्चा और हर एक मनुष्य झूठा ठहरे, जैसा लिखा है, ‘जिससे तू अपनी बातों में धर्मी ठहरे और न्याय करते समय तू जय पाए।’ (भज. 51:4, भज. 116:11)”

यहाँ नकार-उद्धरण एक ध्वनि-आधार बनाते हैं: परमेश्वर सच्चा है, और मनुष्य मिथ्या हो सकता है; शास्त्र बताता है कि ईश्वर के सामने हर आरोप सत्य के साथ टिकता है—कि वह अपनी कथन में धर्मी है और न्याय की कसौटी पर जय प्राप्त करता है। यीशु के साथ-साथ पॉल यह सिद्ध करते हैं कि मानव-उद्धार का आधार न मानवीय धर्म-युक्ति है, बल्कि परमेश्वर की पवित्रता, दयालुता और संहिता-पूर्ण न्याय है।

पढ़ने के चक्र: अध्याय के साथ यह verse कैसे जुड़ता है

रोमियों 3 में पॉल इस बात को पुनः स्थापित करते हैं कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा के योग्य नहीं रहे; परन्तु न्याय-तत्व के साथ ईश्वर ने पवित्र सुधायक योजनाओं के माध्यम से उद्धार को खोल दिया है। यह verse यह बताता है कि परमेश्वर ही सत्य है, और मानव-झूठ का परीक्षण वही कर सकता है—न कि मानव-धर्म, कल्पनाओं या आत्म-तुष्टि से।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • ईश्वर की सच्चाई बनाम मानव की ढालें: परमेश्वर के तरफ सत्य-आधार है; मनुष्य की स्व-शीर्षण असार्थक हो सकती है।
  • धर्म और न्याय की कसौटी: परमेश्वर के न्याय में ही सच्चाई और जय है; धर्मी वही कहलाते हैं जो उसकी दृष्टि में मान्य हैं।

अनुभव-सन्निकट अनुप्रयोग

- हमारी आत्म-विश्वास से भरी बातें अक्सर मानव-स्वार्थ से प्रभावित होती हैं; पर हमें रोगनिरपेक्ष सत्य की ओर आना चाहिए।

- जीवन के निर्णयों में, कटाक्ष-याचना, पाप-तोड़, और उद्धार-योजना के बारे में, परमेश्वर के दायरे में ही निर्णय लेना चाहिए; उसकी सच्चाई पर टिके रहें।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त)

कई बार भज 51:4 और 116:11 जैसे भाव दिखाते हैं कि आत्म-विश्वास से परे, धर्म और सत्य की ठिकाने वही परमेश्वर देता है। इस संदर्भ में अन्य उपदेशक लेखक इस सिद्धांत को देखते हैं:

युद्ध-स्थिति में भक्ति, पाप का परिहार, और उद्धार की राह परमेश्वर के सत्य के ऊपर टिकती है—यहां से स्पष्ट है कि मनुष्य की अच्छाई उसके तर्क तक सीमित है, जबकि परमेश्वर की सत्यता हर परिस्थिति में अडिग है।

संक्षिप्त सार

रोमियों 3:4 यह याद दिलाता है कि परम सत्य वही है जो हर परिस्थिति में वरदान है; मनुष्य चाहे कितना भी झूठ बोले, ईश्वर की सच्चाई के सामने उसका तर्क असफल रहता है। यह verse शास्त्र-आधारित जीवन की दिशा देता है—धर्म, न्याय और उद्धार के लिए परमेश्वर की सच्चाई को केंद्र मानना।

प ട്വक्ति

इस पाठ पर आधारित स्पष्ट उद्धरण: अगर आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणी से जुड़ना चाहें, तो उनके संकल्पनात्मक शब्द आम तौर पर ईश्वर की सच्चाई और मानव झूठ के परस्पर विरोध को रेखांकित करते हैं; नीचे उनके सन्निकट विचारों के संक्षिप्त सार दिए जाते हैं:

Matthew Henry ने कहा है कि परमेश्वर की सच्चाई हर दावे पर भारी है; मानव का कोई तर्क उसके विरुद्ध नहीं टिक पाता।

Albert Barnes ने स्पष्ट किया है कि शास्त्र के साथ हमारा आधार परमेश्वर की स्वीकृति है, न कि मानव-परिकल्पना; उसका न्याय निष्कलंक और पूर्ण है।

Adam Clarke ने बार-बार यह माना है कि ईश्वर ही न्याय-सत्य का स्रोत है और मानव-झूठ, चाहे कितना भी तर्क दे, उसकी तुलना में नगण्य है।

—यह तीनों टिप्पणीकार स्पष्ट करते हैं कि ईश्वर की सच्चाई परम सत्य की ठोकर है, और हमारे जीवन के निर्णयों में इसे सर्वोच्च मानना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

भजन संहिता 51:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 51:4 (HINIRV) »
मैंने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे। (लूका 15:18,21, रोम. 3:4)

भजन संहिता 116:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 116:11 (HINIRV) »
मैंने उतावली से कहा, “सब मनुष्य झूठें हैं।” (रोम. 3:4)

गलातियों 2:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गलातियों 2:17 (HINIRV) »
हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं!

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें