रोमियों 3:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तो घमण्ड करना कहाँ रहा? उसकी तो जगह ही नहीं। कौन सी व्यवस्था के कारण से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, वरन् विश्वास की व्यवस्था के कारण।

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रोमियों 3:27 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 3:27 का संदर्भ और अर्थ

पद रोमियों 3:27 में प्रेरित पॉल बतलाते हैं कि बलीदान या कर्म-आधारित तर्क से घमण्ड करना निष्क्रिय है, क्योंकि उद्धार के कारण और व्यवस्था "विश्वास की व्यवस्था" द्वारा है। यह ईमानदार माफी-भूत शास्त्र के परिप्रेक्ष्य में है कि परमेश्वर के न्यायसंगत संहिता के भीतर कर्मों के आधार पर नहीं, बल्कि विश्वास के माध्यम से चुकता उद्धार मिलता है। इस संदर्भ में पॉल यह स्पष्ट करते हैं कि नीचे लिखित व्यवस्था का सार—कर्म के कारण नहीं—विश्वास है, ताकि महिमा मात्र परमेश्वर की हो और न मानवीय घमण्ड बने।

मुख्य भावार्थ

इस आयत का केंद्र बिंदु यह है कि उद्धार कर्मों के द्वारा नहीं, बल्कि विश्वास के कारण है। जो लोग विश्वास में हैं, वे न तो किसी महान पराक्रम, न धार्मिक कर्मों के कारण अपने आप को उँचा मानते हैं, क्योंकि चढ़ाई का नियम पहले से निर्धारित है: यह नियम विश्वास-परक उद्धार है, जो परमेश्वर के कृपामय गुण को display करता है।

मुख्य विषय

  • उद्धार परमेश्वर की कृपा से होता है, जिसे विश्वास के द्वारा स्वीकार किया जाता है; कर्म केवल परिणामस्वरूप परिवर्तन की मिसाल देते हैं, न कि आधार बने।
  • अगर उद्धार कर्मों के बल पर होता, तो मनुष्य अपने आत्म-उत्कृष्टता पर टिका होता; परन्तु ईमानदार विश्वास से उद्धार मिलना परमेश्वर की महिमा को उभारता है, न कि मानव की कला को।
  • विश्वास के कारण न्याय मिलता है; यह कानूनी मान्यता है न कि सामाजिक या धार्मिक दिखावे की।

घटित अन्य संदर्भ (cross-references) और उनका संक्षिप्त अर्थ

  • — कर्मों के भरोसे नहीं, बल्कि मसीह में आत्म-धारण का न्याय; विश्वास से प्राप्त उद्धार की दिशा।
  • — न कि कर्मों से, किन्तु परमेश्वर की कृपा से उद्धार; यीशु मसीह में विश्वास से न्याय पाया जाता है।
  • — जो विश्वास पर भरोसा रखता है, उसे कर्म के आधार पर नहीं, बल्कि विश्वास की मान्यता मिलती है।

पारंपरिक टिप्पणी से समेकित अवलोकन

हेनरी (Matthew Henry) और क्लार्क (Adam Clarke) आदि की पुरानी व्याख्याओं में उद्धार का यह मॉडल विश्वास की सत्ता पर जोर देता है। वे कहते हैं कि यदि कोई अपने कर्मों के आधार पर भगवान के सम्मुख घमण्ड करे, तो वह समझे कि उद्धार की कोई व्यवस्था मनुष्य की योग्यता पर नहीं है। Barnes भी इसी विवेक का समर्थन करते हैं कि कानून और कर्म केवल प्रकाश डालते हैं, पर उद्धार का प्रमाण विश्वास है।

इस प्रकार, असल सत्य यह है कि परमेश्वर की व्यवस्था विश्वास-आधारित है ताकि महिमा मात्र उसकी हो; मनुष्य के भीतर गर्व बनकर न रह जाए और वह न मान्यता पाये जो केवल कृपा से आती है।

व्यावहारिकreflection

अपने जीवन के निर्णयों में आप कैसी घमण्ड से बचते हैं? क्या आप अपने कर्मों पर अत्यधिक भरोसा कर लेते हैं या आप विश्वास से उद्धार और परिवर्तन को अपनाते हैं? प्रतिदिन के असफलताओं में भी, विश्वास पर टिके रहें: उद्धार परमेश्वर की कृपा से है, न कि अपने अच्छे कामों से।

संक्षिप्त निष्कर्ष

रोमियों 3:27 बताता है कि घमण्ड की जगह विश्वास-आधारित उद्धार है। कर्म नहीं, बल्कि विश्वास वह मार्ग है जो हमें परमेश्वर की चमत्कारी कृपा में प्रवेश देता है, ताकि महिमा केवल परमेश्वर की हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:27 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तू जो व्यवस्था के विषय में घमण्ड करता है, क्या व्यवस्था न मानकर, परमेश्‍वर का अनादर करता है?

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क्योंकि यदि अब्राहम कामों से धर्मी ठहराया जाता*, तो उसे घमण्ड करने का कारण होता है, परन्तु परमेश्‍वर के निकट नहीं। (उत्प. 15:6)

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ताकि कोई प्राणी परमेश्‍वर के सामने घमण्ड न करने पाए।

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