1 कुरिन्थियों 1:29 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

ताकि कोई प्राणी परमेश्‍वर के सामने घमण्ड न करने पाए।

1 कुरिन्थियों 1:29 पद-दर-पद बाइबल टीका

संक्षिप्त अर्थ

1 कुरिन्थियों 1:29 में कहा गया है कि परमेश्वर के सामने जो घमण्ड करे वह प्राणी नहीं ठहर सकता, बल्कि सब कुछ परमेश्वर के कार्य और 그의 मानस के अनुसार होता है ताकि कोई भी अपने आप को ऊँचा न समझे।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

यह पत्र कोरोना-समूह के महत्त्वपूर्ण विषयों पर है—खासकर पवित्रता, क्रिस्तीय जीवन का प्रभुत्व, और मानवीय अहंकार के विरुद्ध प्रभु की योजना। पौलुस ने कुरिन्थियों को स्मरण दिलाया कि उद्धार का संदेश स्वर्गीय योजना के अनुसार हैं, मनुष्य की योग्यता या प्रभावशीलता के आधार पर नहीं, ताकि परमेश्वर को ही महिमा मिले।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- यहाँ “घमण्ड” से मतलब है आत्म-गौरव और अपनी क्षमताओं पर निर्भरता, जो ईश्वर के कार्य को विस्मृत कर देता है।

- उद्धार का स्रोत और योग्यताएं परमेश्वर के कारण हैं, न कि मानव के प्रयत्नों से। इसलिए कोई भी न तो महान दिखे और न छोटा; सबकी स्थिति परमेश्वर के पृथक चयन पर निर्भर है।

- यह शास्त्र यीशु मसीह की क्रॉस की विडंबना भी दर्शाता है: मसीह ही वह पदार्थ हैं जिसे भगवान ने चुना ताकि न घमण्ड हो और न किसी प्रकार का जातीय-उत्पादन।

थीमेटिक बिंदु

  1. परमेश्वर की महत्ता बनाम मानव की योग्यता
  2. उद्धार का केंद्र—येसु मसीह
  3. आत्म-घॉण और नम्रता की आवश्यकता

संदर्भ-क्रॉसरेफरेंसेस (संक्षेप)

- पौलुस पहले पेड कामों में बतलाते हैं कि क्रिस्तीय जीवन में प्रभुत्व और अग्रगामीता के स्थान पर मसीह का प्रभाव dominant है।

- फीलिप्पियों 2:5-8 में मसीह की विनय और आत्म-त्याग का उदाहरण दिया गया है, जो घमण्ड के विरुद्ध एक आदर्श नमूना है।

- रोम 12:3 में प्रत्येक को अपनी नींव और सीमा के अनुसार दायित्व मिलते हैं, ताकि अहंकार न बढे।

अवधारणात्मक टिप्पणी — एकीकृत सार

यह वाक्य उद्धार के ईश्वरीय स्रोत, मसीह के कार्य, और पापी मानवीय अहंकार के विरोध का सार प्रस्तुत करता है। इस शिक्षा का उद्देश्य बताता है कि हर क्रिया-प्रत्येक उपलब्धि परमेश्वर की योजना का भाग है, ताकि प्रभु की महिमा बढ़े, न कि किसी मानव-निर्भर सफलता का।

व्यावहारिक निष्कर्ष

  • यथार्थ समाज में humble posture बनाए रखें—स्व-गौरव से ऊपर उठकर क्रिस्तीय आत्म-त्याग अपनाएं।
  • क्रिस्तीय सेवा में अन्य लोगों की योग्यता पर निर्भर रहने के बजाय परमेश्वर के कारण और लोग-परस्पर प्रेम पर ध्यान दें।

कथन-उद्धरण (पूर्व-स्वतंत्र टिप्पणीकारों से संकेतन)

यदि आवश्यक हो, नीचे का संक्षेप दर्ज किया गया है: “घमण्ड के कारण मानव को भ्रम होता है; पर उद्धार सकलतः परमेश्वर की कृपा से है।” - Matthews Henry आदि के सामान्य टिप्पणियों में इसी प्रकार के सार उद्घाटित होते हैं।

नोट: यहां सीधे इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संपूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं, लेकिन उनकी विचार-रेखा के अनुरूप निष्कर्ष प्रस्तुत हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 1:29 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तो घमण्ड करना कहाँ रहा? उसकी तो जगह ही नहीं। कौन सी व्यवस्था के कारण से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, वरन् विश्वास की व्यवस्था के कारण।

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और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।

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हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के अधीन हैं इसलिए कि हर एक मुँह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्‍वर के दण्ड के योग्य ठहरे।

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