Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 1:1 1 कुरिन्थियों 1:2 1 कुरिन्थियों 1:3 1 कुरिन्थियों 1:4 1 कुरिन्थियों 1:5 1 कुरिन्थियों 1:6 1 कुरिन्थियों 1:7 1 कुरिन्थियों 1:8 1 कुरिन्थियों 1:9 1 कुरिन्थियों 1:10 1 कुरिन्थियों 1:11 1 कुरिन्थियों 1:12 1 कुरिन्थियों 1:13 1 कुरिन्थियों 1:14 1 कुरिन्थियों 1:15 1 कुरिन्थियों 1:16 1 कुरिन्थियों 1:17 1 कुरिन्थियों 1:18 1 कुरिन्थियों 1:19 1 कुरिन्थियों 1:20 1 कुरिन्थियों 1:21 1 कुरिन्थियों 1:22 1 कुरिन्थियों 1:23 1 कुरिन्थियों 1:24 1 कुरिन्थियों 1:25 1 कुरिन्थियों 1:26 1 कुरिन्थियों 1:27 1 कुरिन्थियों 1:28 1 कुरिन्थियों 1:29 1 कुरिन्थियों 1:30 1 कुरिन्थियों 1:31



1 कुरिन्थियों 1:19 का संदर्भ और अर्थ
पद में प्रेरित पौलुस कुरिन्थियों के समुदाय को याद दिलाते हैं कि ईश्वर उन पाठशालाओं और ज्ञान को नहीं मानते जिनसे मानव-गौरव बढ़े; क्योंकि दिव्य ज्ञान वह है जो शिक्षा-प्रणालियों के पार जाकर परमतत्व की दृष्टि से देखा जाता है। उद्धृत व्यवस्था यह है कि जिस तरह भविष्यवाणी और तर्कों के केंद्र में ईश्वर का चमत्कार है, वही ज्ञान परमेश्वरीय है, और मानव-गुणों का आधार नहीं बनता। यह उद्धरण यशायाह से लिया गया है, जहां प्रभु यह संकेत देते हैं कि बुद्धिमानों की समझ को वे तुच्छ कर देंगे ताकि उनका उद्धार और सत्य ईश्वर के दिव्य उपहार के द्वारा प्रकट हो। यह संदेश नए नियम में भी जारी रहता है: ईश्वर का राज्य सांसारिक महिमा नहीं, बल्कि चमत्कारिक उपहार और पवित्र आत्मा की प्रेरणा से पहचाना जाता है।
मुख्य अर्थ
इस पद का केंद्र यह है कि ज्ञान-प्रधान दृष्टिकोण, जो मानवीय औचित्य और तर्क-सिद्धि पर टिके रहते हैं, वह परमेश्वर के सामने तुच्छ पड़ते हैं। ईश्वर उन्हें हराते हैं जो केवल अपनी समझ पर निर्भर रहते हैं; वे यह दिखाते हैं कि पवित्रता, क्रूस के उपहार और स्मरण-योग्य सच्चाई वह है जिसे परमेश्वर अपने दासों में उद्घाटित करता है।
तीन प्रमुख विषय
संबंदित आयतें
- उदाहरण: ईश्वर की कल्याणकारी योजना मानव की चालाकी से ऊपर है और उसे पवित्र आत्मा के प्रकाश से समझना होता है।
- अन्य संदर्भ: येशा 29:14 दर्शाता है कि प्रभु अपनी बुद्धिमत्ता को उलटफेर कर प्रस्तुत करते हैं; 1 कुरिन्थियों 2:6–8 में पवित्र आत्मा ही वह ज्ञान देता है जो संसार के ज्ञान के समान नहीं है।
- विश्लेषणात्मक संदेश: अगर किसी पवित्र पाठ में मानव-गुणों को ऊँचा ठहराया गया हो, तो उसे क्रूस से पक्का किया गया है जहाँ ईश्वर का उद्धार-कार्य स्पष्ट होता है।
व्यावहारिक विचार
हम अपने विश्वास में प्रत्यक्ष प्रमाण के पीछे नहीं, बल्कि परमेश्वर की प्रेरणा और आत्मा के प्रकाश के पीछे चलें। शिक्षा और बुद्धि अच्छी है, पर वह उद्धार के स्रोत ईश्वर के क्रूस और पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के बिना अधूरी है। जीवन में आप वही मानें जो आत्मा से उद्घाटित हो और जो क्रूस के संदेश के अनुरूप हो।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 कुरिन्थियों 1:19 यह स्मरण कराता है कि मानव ज्ञान की श्रेष्ठता की धारणा सीमित है; परमेश्वर उन्हें ध्वस्त कर देता है जो अपनी समझ पर निर्भर रहते हैं। ईश्वर का ज्ञान जीवंत है, जो क्रूस के माध्यम से प्रकट होता है और आत्मा से समझा जाता है।
क्रॉस-रेफरेंस सार
यशायाह 29:14 का संदर्भ बताता है कि दिव्य ज्ञान की परख देश-विदेश के मानकों से ऊपर है; 1 कुरिन्थियों 2:6–8 दर्शाता है कि आत्मा ही सही समझ देता है, मनुष्य के दिमागी विवेक से नहीं।
नोट: इस पाठ के लिए आवश्यक पूर्व-नोट्स में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हैं; विशेष उद्धरण नीचे नहीं दिए गए हैं, पर उनके विचार प्रगतिशील रूप से समाहित हैं।