Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 12:1 1 कुरिन्थियों 12:2 1 कुरिन्थियों 12:3 1 कुरिन्थियों 12:4 1 कुरिन्थियों 12:5 1 कुरिन्थियों 12:6 1 कुरिन्थियों 12:7 1 कुरिन्थियों 12:8 1 कुरिन्थियों 12:9 1 कुरिन्थियों 12:10 1 कुरिन्थियों 12:11 1 कुरिन्थियों 12:12 1 कुरिन्थियों 12:13 1 कुरिन्थियों 12:14 1 कुरिन्थियों 12:15 1 कुरिन्थियों 12:16 1 कुरिन्थियों 12:17 1 कुरिन्थियों 12:18 1 कुरिन्थियों 12:19 1 कुरिन्थियों 12:20 1 कुरिन्थियों 12:21 1 कुरिन्थियों 12:22 1 कुरिन्थियों 12:23 1 कुरिन्थियों 12:24 1 कुरिन्थियों 12:25 1 कुरिन्थियों 12:26 1 कुरिन्थियों 12:27 1 कुरिन्थियों 12:28 1 कुरिन्थियों 12:29 1 कुरिन्थियों 12:30 1 कुरिन्थियों 12:31



1 कुरिन्थियों 12:1 पर टिप्पणी
यह पाठ एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ शुरू होता है: श्रोताओं के लिए आत्मिक वरदानों के विषय में अज्ञान को दूर करना। प्रेरित पौलुस इस विषय को भलीभांति समझाने के लिए लिखते हैं कि परमेश्वर की यात्राओं में हर विश्वासी के लिए वरदान विविध हैं, पर उनका उद्देश्य शांति और एकता बनाये रखना है, न कि अज्ञान या अयोग्यता को बढ़ावा देना।
पद के भीतर संदर्भ और व्याख्या
पौलुस कहते हैं: हे भाइयों, मैं नहीं चाहता कि तुम आत्मिक वरदानों के विषय में अज्ञात रहो। यह शुरुआत उन लोगों के प्रति करुणा का संकेत है जो वरदानों के बारे में भ्रमित या भयभीत हो जाते हैं। लेखक बताना चाहते हैं कि ज्ञान का अभाव आध्यात्मिक जीवन की वृद्धि में बाधक हो सकता है, और इसलिए सचेत शिक्षण आवश्यक है ताकि विश्वासियों की आशा और सेवकाई स्पष्ट हो।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस verse की सबसे बड़ी सीख है: आत्मिक वरदान बिना ज्ञान के उपयोग में असुरक्षित हो जाते हैं। परमेश्वर आस्थाबद्ध लोगों को विविध वरदान देता है, ताकि समुदाय में प्रेरणा, सेवा और प्रेरितिक प्रभाव बने रहे। अज्ञान से गलत समझ, दुरुपयोग और आत्म-गौरव पैदा हो सकता है। अतः शिक्षा और सही मार्गदर्शन के बिना वरदानों का लाभ नहीं मिल सकता।
अनुरूप तुलनात्मक पंक्तियाँ
इसी विषय पर पवित्र शास्त्र के अन्य हिस्से भी बताते हैं कि वरदान किस उद्देश्य से दिये जाते हैं—ईश्वर की महिमा, प्रेम और एक दूसरे की सेवा के लिए। उदाहरण के लिए, पुराने नियम में उपहासपूर्ण या विभाजनकारी दावे से रोककर एकता और शुद्धता पर बल दिया गया है; नए नियम में शरीर के अंगों के समान विविधता भी उसी एकता के लिए काम करती है (हाला कि यह संदर्भ यहाँ विशेष नहीं है, फिर भी यह समान विचारधारा से जुड़ता है)।
कई प्रचलित क्रॉस-रेफरेंस के नमूने और उनका संक्षेप अर्थ
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि वरदान एक दिशा-निर्देश के रूप में दिए जाते हैं—कटु घमण्ड नहीं, बल्कि प्रेम और सेवकाई हेतु।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
कुल मिलाकर निष्कर्ष
1 कुरिन्थियों 12:1 में प्रेरित पौलुस का उद्देश्य है—विश्वासियों को आत्मिक वरदानों के विषय में स्पष्टता और सचेतता प्रदान करना। वरदान महिमा के लिए हैं, भेदभाव या डरों के लिए नहीं। शिक्षा, संयम और प्रेम के साथ वरदानों की स्थापना से चर्च एक साथ बढ़ता है और हर सदस्य के पास भूमिका स्वीकार्य बनती है।
पाठ का सार
यह verse विश्वासियों को याद दिलाता है कि आत्मिक वरदान परमेश्वर की दया से आते हैं और उनका उद्देश्य समुदाय में विकसित होकर एकता को मजबूत करना है—ज्ञान के बिना उनका लाभ नहीं, बल्कि ज्ञान के साथ उनका सही उपयोग है।
उद्धृत परामर्श-उद्धरण (संक्षेप): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के हालिया-उद्धरणों में नियंत्रित सार यह है कि वरदानों की महानता तभी फलती है जब शिष्यत्व, प्रेम और सचेत शिक्षा साथ हों।
मुख्य क्रॉस-रेफरेंस कभी-कभी छोटे शब्दचित्र या शाब्दिक उद्धरणों के रूप में दिखते हैं; ऊपर तीन प्रमुख संदर्भों के साथ उनके संदेश का सार दिया गया है।