Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 12:1 1 कुरिन्थियों 12:2 1 कुरिन्थियों 12:3 1 कुरिन्थियों 12:4 1 कुरिन्थियों 12:5 1 कुरिन्थियों 12:6 1 कुरिन्थियों 12:7 1 कुरिन्थियों 12:8 1 कुरिन्थियों 12:9 1 कुरिन्थियों 12:10 1 कुरिन्थियों 12:11 1 कुरिन्थियों 12:12 1 कुरिन्थियों 12:13 1 कुरिन्थियों 12:14 1 कुरिन्थियों 12:15 1 कुरिन्थियों 12:16 1 कुरिन्थियों 12:17 1 कुरिन्थियों 12:18 1 कुरिन्थियों 12:19 1 कुरिन्थियों 12:20 1 कुरिन्थियों 12:21 1 कुरिन्थियों 12:22 1 कुरिन्थियों 12:23 1 कुरिन्थियों 12:24 1 कुरिन्थियों 12:25 1 कुरिन्थियों 12:26 1 कुरिन्थियों 12:27 1 कुरिन्थियों 12:28 1 कुरिन्थियों 12:29 1 कुरिन्थियों 12:30 1 कुरिन्थियों 12:31



पाठ का सीधा अर्थ
1 कुरिन्थियों 12:28 में पवित्र आत्मा के विविध अनुदान और कलीसिया के संस्थानों की क्रमबद्ध व्यवस्था दर्शाई गई है। परमेश्वर ने कलीसिया में विभिन्न प्रतिभाओं को नियुक्त किया है—पहले प्रेरित, फिर भविष्यद्वक्ता, फिर शिक्षक, फिर शक्तियों के कर्म करनेवाले, फिर चंगा करनेवाले, फिर सहायता करनेवाले, फिर प्रधान, और विभिन्न प्रकार की भाषा बोलनेवाले। यह क्रम दिखाता है कि सेवकई के क्षेत्र में एक दूसरे के सहयोग से कुल मिलाकर कलीसिया का कार्य संचालित होता है, न कि एक अकेले व्यक्ति से सब कुछ संभव होता है।
पृष्ठभूमि और संतुलन
पलस्तीन-युग की सामाजिक-धार्मिक संरचना में मायने यह है कि चर्च निर्माण के लिए विविध उपहार आस्तित्व में हैं। इस पाठ के लेखक पौलुस ने Corinth goto चर्च में विभाजन और अंधविश्वास के दौर से गुजरते हुए स्पष्ट किया कि ईश्वर ने विविध ग्रहणयोग्य लोक-कार्य बाँट दिए हैं ताकि प्रेम से संगत रूप से काम चले। यह स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर का क्रम और विविधता दोनों एक साथ चलते हैं; हर दूरी पर प्रेम और व्यवस्था आवश्यक है।
interpretiveObservations
थीमेटिक सूची
अन्य शास्त्रीय टिप्पणियाँ (cross-references)
यद्यपि ये क्रॉस-रेफरेंसेस पूर्ण श्लोक नहीं देते, वे संकेत देते हैं कि—
संवहनीय आवेदन
कलीसिया के हर सदस्य को अपने दायित्व के प्रति जागरूक होना चाहिए। पहले यह याद रखें कि परमेश्वर की दृष्टि में हर भूमिका आवश्यक है—चाहे वह प्रेरित हो, शिक्षक हो या भाषा बोलने वाला। सामूहिक उपलब्धि के लिए एक दूसरे की सेवाओं की कदर करें, ताकि प्रेम से बने एकात्म कलीसिया बन सके।
सबक और सांकेतिक उद्धरण
यह पाठ प्रेरणा देता है कि साहस, स्पष्टता, और सेवाभाव हमें एक साथ जोड़ते हैं।
मरियम-हेनरी या एलबर्ट बर्न्स के समान पूर्व-प्रकाशन टिप्पणीकारों के विशिष्ट उद्धरण: प्रस्तुत पाठ में उनके पूर्ण शब्दों के उद्धरण नहीं हैं, किन्तु उनके विचार—विविध प्रतिभाओं का संयुक्त कार्य और Church leadership की temp—इन विचारों के अनुसार प्रस्तुत हैं।
संक्षिप्त आवश्यक संदर्भ
1 कुरिन्थियों 12:28-29 के आसपास के अवसरों में प्रतिभाओं की विविधता और कलीसिया की एकता के सिद्धांतों को समाहित किया गया है।