Old Testament
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रोमियों 12:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न-भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिसको भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
रोमियों 12:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 12:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 7:7 (HINIRV) »
मैं यह चाहता हूँ, कि जैसा मैं हूँ, वैसा ही सब मनुष्य हों; परन्तु हर एक को परमेश्वर की ओर से विशेष वरदान* मिले हैं; किसी को किसी प्रकार का, और किसी को किसी और प्रकार का।

1 पतरस 4:10 (HINIRV) »
जिसको जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए।

रोमियों 12:3 (HINIRV) »
क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूँ, कि जैसा समझना चाहिए, उससे बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे; पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बाँट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
रोमियों 12:6 पर दृश्य-भाषा से तात्पर्य: अनुग्रह के अनुसार विविध वरदान
मुख्य interpretive बिंदु: ईश्वर के अनुग्रह के अनुसार हर विश्वासी को मेज पर एक-से-एक वरदान दिए जाते हैं, ताकि समुदाय एक दूसरे के कर्म और सेवा से परिपूर्ण होकर परमेश्वर की महिमा करें। जैसे-जैसे विश्वास बढ़ता है, वैसे-वैसे ये वरदान भी बढ़ सकते हैं या परिभाषित हो सकते हैं; महत्त्वपूर्ण यह है कि हर वरदान समुदाय के लाभ के लिए हो, ego नहीं।
साहित्यिक संदर्भ ( Literary Context )
पद 6-8 में पवित्र लेखन प्रेरित रूप से विविधताओं को दिखाता है—भिन्न-भिन्न उपाय और क्षमताएं जो एक शरीर के अंगों के समान मिलकर काम करती हैं। रोमियों की सूची में “भविष्यद्वाणी, विश्वास, कृपा के अनुसार” आदि सेवाओं की विविधता दर्शाई गयी है। यह अध्याय नैतिक-आचार की जगह सबसे पहले सेवक-समुदाय के ढांचे की नींव रखता है: हर सदस्य अपने-अपने दायित्व में योगदान दे।
थेओलॉजिकल सिम्निफिकेन्स (Theological significance)
यह संदेश दर्शाता है कि आस्तिक समाज “ग्रेस-आधारित ड्यूटी” के साथ चलता है—अनुग्रह परमेश्वर से है और वरदान उसी ग्रेस की कृपा से प्रभावी होते हैं। यहाँ परिषद यह भी संकेत देती है कि वरदान विश्वास के परिमाण के अनुसार प्रयोग में लाने चाहिए; मतलब, निर्बाध आत्म-विश्वास और जिम्मेदारी के साथ।
पूर्ववर्ती और पश्चाताप्रेरक संबंध (Cross-references) – संक्षिप्त चर्चा
संक्षेप में, इन संदर्भों से पता चलता है कि वरदान केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि समुदाय-कार्य के लिए है ताकि चेलों की सामूहिक प्रगति हो।
क्यों यह दायित्व महत्वपूर्ण है? (Application)
प्रश्न- reflection prompts
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 12:6 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के अनुग्रह से मिले विविध वरदान मिलकर एक नया समुदाय बनाते हैं—जहाँ विश्वास, दायित्व और प्रेम एक साथ चलते हैं। हर वरदान को परखा जाए कि वह क्यों और कैसे एक साथ कार्य कर सकता है, ताकि प्रभु की महिमा बढ़े और शरीर में एकत्व बना रहे।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण-नोट: यदि उपलब्ध हों, नीचे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठीक-ठीक संकलित शब्द नीचे उद्धृत हैं—पर पूर्ण पाठ के बजाय संदर्भ-उद्धरण/संवेदी पंक्तियाँ ली जाएँगी।