Old Testament
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रोमियों 12:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे प्रियों अपना बदला न लेना; परन्तु परमेश्वर को क्रोध का अवसर दो, क्योंकि लिखा है, “बदला लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूँगा।” (व्य. 32:35)
रोमियों 12:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 12:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 32:35 (HINIRV) »
पलटा लेना और बदला देना मेरा ही काम है, यह उनके पाँव फिसलने के समय प्रगट होगा; क्योंकि उनकी विपत्ति का दिन निकट है, और जो दुःख उन पर पड़नेवाले हैं वे शीघ्र आ रहे हैं। (लूका 21:22, रोमी. 12:19)

इब्रानियों 10:30 (HINIRV) »
क्योंकि हम उसे जानते हैं, जिस ने कहा, “पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूँगा।” और फिर यह, कि “प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा।” (व्य. 32:35-36, भज. 135:14)

नीतिवचन 20:22 (HINIRV) »
मत कह, “मैं बुराई का बदला लूँगा;” वरन् यहोवा की बाट जोहता रह, वह तुझको छुड़ाएगा। (1 थिस्सलुनीकियों. 5:15)
रोमियों 12:19 परिकलना: बदला न लेना और परमेश्वर की क्रोध
यह वचन रोमियों के पाठ में शांति और चित्त की स्थिरता पर केंद्रित है। प्रेरित पॉल शास्त्रिय-संबंधी संघर्षों के बीच विश्वसनीयता और भाईचारे की लगन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देता है।ョ इस परिच्छेद में पाठक को यह सीख दी जाती है कि दूसरे के लिये गलत व्यवहार होने पर भी हमारा रवैया नhabilitation नहीं होना चाहिए, वरन् परमेश्वर पर भरोसा करके उसको न्यायपूर्ण तरीके से छोड़ना चाहिए।
पद का पाठ और chapitre का संग्राम
रोमियों 12 अध्याय में पॉल ईमानदारी, विनम्रता और सेवकभाव की एक जीवनशैली का आह्वान करते हैं। यहाँ “हे प्रियों अपना बदला न लेना; परन्तु परमेश्वर को क्रोध का अवसर दो” कह कर यह स्पष्ट किया गया है कि क्षमा और विराम से ही सच्ची बंधुत्वता बनती है। यह उद्धृत भाग व्यवस्थावाक्यों 32:35 की याद दिलाता है, जहां परमेश्वर स्वयं न्याय और प्रतिशोध के ठिकाने को संभालने वाले हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य शास्त्रीय टिप्पणियों के अनुरूप तुलना
• मीठी दीर्घ-सहनशीलता और प्रेरित पॉल का विचार: हर परिस्थिति में प्रेम की परिपाटी बनाये रखना निर्भर करता है कि हम दर्द और आक्रोश के बीच किस मार्ग को चुनते हैं।
• पुराने नियम के संदेशन में न्याय का सिद्धांत: शृष्टि-कार्य में बदला देना परमेश्वर का अधिकार है, मनुष्य को उसका पालन करने की शिक्षा मिलती है।
• नई नियम की उक्ति: क्षमा, आशा और प्रेम—ये तीनों क्रिया-धाराएं एक साथ चलती हैं ताकि समुदाय में नयापन और मेल-जोल बना रहे।
क्रियात्मक अनुप्रयोग
– किसी ने आपको ठेस दी हो, तो प्रतिक्रिया में गृहस्थी, आक्रोश या बदला खोजने के बजाय प्रार्थना और शांति से व्यवहार करें।
– दोषी व्यक्ति के प्रति ईमानदार restitution के बजाय भी, अपनी आत्म-शांति के लिए समय दें, और यदि संभव हो तो व्यक्तिगत माफ़ी दें।
– परिस्थिति के अनुसार, समुदाय की सामर्थ्य बनाये रखने के लिए निर्भीक रूप से सच बोलें, पर क्रोध-आक्रामकता से बचें।
cross-references और उनके छोटा-सा परिप्रेक्ष्य
• रोमियों 12:17-19: अन्याय के विरोध में विद्वत्ता से निपटने का exhortation; प्रतिशोध की जगह शांति की राह दर्शाती है।
• प्रेरित 1 कुरिन्थियों 6:7: साहसी न्याय के बजाय गलत व्यवहार के प्रति क्रोध कम करने का संदर्भ।
• मत्ती 5:38-39: “तुम eye for an eye” से ऊपर प्रेम और क्षमा की उच्चता स्पष्ट होती है।
छोटा सारांश
रोम Romans 12:19 हमें बतलाता है कि द्वेष या बदला लेने से शांति नहीं आती; बल्कि परमेश्वर पर भरोसा कर उसकी न्याय व्यवस्था के पूर्ण होने का अवसर देना ही माफी और ईमानदारी की राह है। यह हमें व्यक्तिगत संबंधों और समुदाय के शांति-संतुलन के लिए प्रेरित करता है।
उद्धरण नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट शब्द सीधे यहां उद्धृत नहीं हैं; उनके विचार नीचे समेकित रूप में समाहित किये गये हैं।