Old Testament
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रोमियों 12:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो*।
रोमियों 12:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 12:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 12:14 (HINIRV) »
सबसे मेल मिलाप रखो, और उस पवित्रता के खोजी हो जिसके बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा*। (1 पत. 3:11, भज. 34:14)


रोमियों 12:18: जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो
पद के इस छोटे से वाक्य में प्रकट होता है कि ईमानदार जीवन वह है जो व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के बीच विश्वास और प्रेम की मिसाल बनता है। रोमियों के पाठ में पॉल ने बहुविध सामाजिक परिस्थितियों में ঈश्वरवाचित जीवन के दृष्टांत दिए हैं—आत्म-समर्पण, सौहार्दता, और विवेकपूर्ण संयम। यहाँ 12:18 हमें कहता है कि यदि संभव हो, तो हम हर किसी के साथ शांतिपूर्ण मेल-मिलाप बनाए रखें।
पद के संदर्भ में समझना
यह अध्याय प्रेरितों के नैतिक-आचरण पर केंद्रित है: अपनी आवाज़, इच्छाएँ और प्रतिक्रियाओं को शांति और करुणा के साथ संयमित रखना। 12:18 उस व्यवहार की दिशा दिखाता है जो बाहरी परिर्वतन के बजाय आंतरिक परिवर्तन से शुरू होता है—हम अपने पड़ोसियों, मित्रों और यहां तक कि विपक्षियों के साथ भी सकारात्मक रिश्ते बनाने का प्रयास करें।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मौलिक सिद्धांत यह है कि हमारा आदर्श जीवन शांति की खेती है—जहाँ तक संभव, हर व्यक्ति के साथ शांतिपूर्ण संपर्क बनाए रखना। इसका आधार प्रेम है, जो दोनों पक्षों के लिए सम्मान और सुरक्षा की भावना बनाता है। भेदभाव या अधिक-उद्धार की भावना से नहीं, बल्कि एक जीवनशैली के रूप में दिखाई देता है जो सामाजिक बन्धनों को मजबूत बनाती है।
अनुशंसा-सम्बन्धी दृष्ठिकोण (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि मेल-जोली का असली मापक संसारिक समझौते नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रेम के अनुसार जीवन के व्यवहार में है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- तौल-तोड़कर मत बोलिए; कठिन परिस्थितियों में भी सम्मान से जवाब दें।
- आपसी मतभेदों के बावजूद, सीमा-रेखा बनाए रखें ताकि आपकी प्रस्तुति शांतिपूर्ण रहे।
- दूसरों की गरिमा का ख्याल रखें; छोटे-छोटे कदमों से भरोसा बनाएं, जैसे गली-नुक्कड़ों में नम्र मुस्कान या समय पर मदद।
सार-सारिणी निष्कर्ष
रोमियों 12:18 का संदेश है: सामाजिक शांति और सुसंगत संबंध बनाए रखना कठिन, पर संभव है—जब हम प्रेम से कदम उठाते हैं, और परिस्थितियों के साथ समझौते के बजाय, ईश्वर की राह के अनुरूप व्यवहार को प्राथमिकता देते हैं। यह जीवन-यात्रा हर एक के लिए अधिक स्वस्थ समाज की कुंजी है।
क्या लिखना चाहिए: पंक्ति-संश्लेषण
“जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो” का अर्थ है—परस्पर सम्मान, निष्पक्षता, और समय-समय पर क्षमा सहित वह संबंध बनाएं जो भय, बनावटी दिखावें या द्वेष से मुक्त हों। यह शिक्षण व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण के लिए एक ठोस मार्गदर्शक है।
महत्वपूर्ण उद्धरणधारा: इस पवित्र पाठ के समालोचनात्मक सार में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरी टिप्पणियों से उद्धरण मिलते हैं; नीचे संक्षेप में उल्लेख किया गया है:
• “जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो”—अनुवादित विचार में Henry का दृष्टिकोण था कि यह शांति-उन्मुख आचरण हमारी आत्म-समर्पण और परमेश्वर के प्रेम का परिणाम है।
• Albert Barnes और Adam Clarke ने भी इस वाक्य को सामाजिक सन्तुलन और बीच-बीच में सहिष्णुता की आवश्यकता के रूप में व्याख्यान किया है, प्रायः यह उद्धृत करते हैं कि यह सरल नहीं पर वाजिब जीवन-शैली की मांग है।