Old Testament
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रोमियों 12:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई को जीत लो।
रोमियों 12:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 12:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 3:9 (HINIRV) »
बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो; पर इसके विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।

लूका 6:27 (HINIRV) »
“परन्तु मैं तुम सुननेवालों से कहता हूँ, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उनका भला करो*।

नीतिवचन 16:32 (HINIRV) »
विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर को जीत लेने से उत्तम है।
बुराई से न हारो, परन्तु भलाई से बुराई को जीत लो — रोमियों 12:21 (HINIRV)
मुख्य interpretive point: प्रेरित पॉल इस पद में जीवन के व्यावहारिक संघर्ष को नये ढंग से प्रस्तुत करते हैं—हमारा उत्तर बुराई पर अहिंसात्मक, लेकिन दृढ़ भलाई से देना चाहिए। बुराई से न हारना अर्थात् दुष्कर्म की प्रतिक्रिया में न ऊपर नीचे जाना, बल्कि भरोसेमंद, सत्यनिष्ठ और प्रेमपूर्ण कार्यों से बुराई पर विजय पाना। यह न केवल व्यक्तिगत नैतिकता है, बल्कि समुदाय-जीवन में युवाओं, वृद्धों और हर वर्ग के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शक है: ईश्वर के प्रेम का ठोस प्रदर्शन ही शत्रु की चालों को मिटा सकता है।
साहित्यिक संदर्भ के अनुसार पथ और पाठ का क्रम
रोमियों 12 अध्याय में पॉल ईसाई समुदाय के भीतर सचेत, सेवाभावी जीवन की पंक्तियाँ देता है। इस verse को पढ़ते समय ध्यान रहता है कि यह प्रेरित एक सामाजिक आचार-व्यवहार का निर्देश दे रहा है: शनैः शनैः मतभेदों को भलाई से सुलझाएं, बदले की लालसा छोड़कर प्रेम-नियमन से व्यवहार करें। यह अनुशासन भक्ति-जीवन के प्राकृतिक परिणाम के रूप में आता है—जो व्यक्ति दया और नम्रता दिखाता है, वही वास्तविक विजय का भागीदार बनता है।
के theological significance — theological threads
यह वचन ईश्वरीय प्रतिदान और आत्मा द्वारा संचालित जीवन के दोनो रंग प्रस्तुत करता है: (1) बुराई के विरुद्ध नैतिक फर्क—शांति, धैर्य और क्षमा, (2) बुराई से भागना नहीं, बल्कि भलाई में कर्म करना। इसका तात्पर्य है कि ईश्वर की करुणा में आकर हम अपने दुश्मनों को भी अच्छाई से चकित कर सकते हैं। पॉल का चिंतन कहता है कि हमारी प्रतिक्रियाएँ ईश्वर के आशीष-प्रवाह को जीवित बनाती हैं; इसलिए नियमित भक्तिगमन और परोपकार ही असली युद्ध-योजना हैं।
पुराने और नए विधान के बीच संबंध
- पुराने नियम में प्रतिशोध की प्रवृत्ति पर रोकने के लिए हमदर्दी और न्याय का संतुलन मिला है; - नए नियम में यीशु के प्रेम-आचरण की मिसाल है, जो शत्रुओं के सामने भी आशीर्वाद देता है। रोमियों 12:21 एक व्यवहारिक अनुप्रयोग देता है: क्षमा-याचन और उन्नत भलाई से ही बुराई का राज समाप्त होता है।
कथन-आधारित cross-references
reflection questions
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 12:21 हमें बताता है कि ईश्वर की योजना में जीत भलाई से आती है, न बुराई की संगति से। यह भगवान के आत्मीय प्रेरणा के अनुकूल एक चुनौतीपूर्ण पर वास्तविक मार्गदर्शक है: धीरे-धीरे, प्रेमपूर्ण और सेवा-प्रधान उत्तर दें, तब हम शैतानी schemes को पीछे छोड़ते हुए सचमुच बदला नहीं, बल्कि विजय के साथ कदम बढ़ाते हैं।
उद्धरण के नोट: निम्न कथनों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रकाशित विचारों के संक्षिप्त, निर्गत उद्धरण (short quotations) अदल-बदल के रूप में हैं—ये मौलिक शब्द उनके पूर्ण टिप्पणी पाठ से लिए गये हैं, और यहां केवल संकेतिक रूप में समाहित हैं:
“Not overcome of evil, but overcome evil with good.” — Matthew Henry के विचार-वाक्य से प्रेरणा; उनके आशीर्वचन में यह दृष्टिकोण है कि दुष्कर्म से लड़ना नहीं, भलाई से जीतना क्रियात्मकतः पवित्र जीवन का संकेत है।
“Overcome evil with good” — Albert Barnes का सार, जिसमें वह बताने की कोशिश करते हैं कि वास्तविक विजय प्रेम और कर्म-प्रवृत्ति के द्वारा मिलती है, प्रतिशोध के मार्ग से नहीं।
“Resist not evil: but overcome evil with good” — Adam Clarke के अन्वेषण में, यह स्पष्ट किया गया है कि भलाई से मुकाबला करना एक सक्रिय, अनुशासित जीवन-योजना है, जो ईमानदारी और पवित्रता पर टिकी है।