लूका 6:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“परन्तु मैं तुम सुननेवालों से कहता हूँ, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उनका भला करो*।

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लूका 6:27 पद-दर-पद बाइबल टीका

का अर्थ तुरंत स्पष्ट: अपने शत्रुओं से प्रेम करो

यहोशयार सुननेवाले! लूका 6:27 में यीशु यह स्पष्ट निर्देश देते हैं कि परम प्रेम वह है जो शत्रुओं के बीच भी दिखे। यहाँ प्रेम का मंशा-पूरक व्यवहार Shalom का मार्ग है—दुष्टों के प्रति प्रतिक्रियात्मक बदला लेने के बजाय मुक्ति का आह्वान।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह भाग उस समय के सामाजिक और धार्मिक वातावरण को उजागर करता है जिसमें यीशु ने उन लोगों को संबोधित किया जो राजनीतिक, सामाजिक दबावों के बीच रहते थे। लूका के ईश्वरीय राज्य के संदेश में यह विशेष रूप से ग्राम-स्तर पर व्यवहारिक चैलेंज देता है: किस प्रकार प्रेम और करुणा वास्तव में जीवन को नया बना सकते हैं।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • प्रेम का दायरा व्यापक है: केवल अपने मित्रों के लिए नहीं, बल्कि वे जो हमारे शत्रु हैं, उनके लिए भी आचरण की प्रेरणा है।
  • करुणा-कृत्य का उद्देश्य बदले की भूख को कम करना और समाज में समानता की नई खिड़कियाँ खोलना है।
  • प्रतिउत्तर में भलाई करना यह नहीं कि गलत को स्वीकार किया जाए, बल्कि यह कि जीवन का न्यायपूर्ण क्रम प्रेम से प्रेरित नया रूप ले।

पौराणिक-संदर्भ से जुड़ाव (Cross-references)

कई अन्य पार्श्व ग्रंथ भी प्रेम की ऐसी विस्तृत उड़ान को बल देते हैं:

  • रोमियों 12:14, 17-21 में भलाई के साथ प्रतिशोध-न करने की प्रेरणा; शत्रुओं के लिए बुरे-तक नहीं, बल्कि उनके लिए सुधर की राह दिखाने का आह्वान मिलता है।
  • यहोशा 6:15 जैसी कहानी शत्रु की रक्षा और दयालुता के बीच संतुलन दिखाती है—परित्राण गीतों में भी प्रेम का व्यवहार स्पष्ट है।
  • मत 5:44-45 में स्वयं यीशु के आकाशीय मानक के अनुरूप प्यार, ताकि आप अपने ईश्वर के बच्चों की तरह बनें।

स्टेटिक थीम का छोटा संकलन

  1. शत्रुओं से प्रेम: नफरत नहीं, बल्कि उद्धार की बाट।
  2. भलाई का अभ्यास: दुष्ट के भी कल्याण में समर्पण।
  3. आंतरिक परिवर्तन: यही वास्तविक आध्यात्मिक उन्नति है।

संभावित पाठ-उपयोग (Takeaway)

जीवन में वास्तविक शक्ति वह है जो अहंकार नहीं, प्रेम से संचालित हो। शत्रुओं के प्रति करुणा दिखाने से समाज की सोच बदलेगी, और यह प्रेम वह प्रभाव बनता है जो ईश्वरीय राज्य के नमूनों को बनाता है।

अभिधेय संदर्भ (Notes on classic commentaries)

यदि आप पुराने भूमिकाओं से प्रेरणा लेना चाहें, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचार पारंपरिक ईमानदारी से इस teaching को व्याख्या करते हैं, कि प्रेम और शांति की यह आह्वान न केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया है, बल्कि व्यवहारिक क्रिया है। उनके विश्लेषण में प्रकाशन-भाष्यों के अनुसार यह दिखाया गया है कि शत्रुओं के साथ भी नैतिक क्रियाओं से ही प्रेम की सच्ची परख होती है।

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लूका 6:27 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 थिस्सलुनीकियों 5:15 (HINIRV) »
देखो की कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्पर रहो आपस में और सबसे भी भलाई ही की चेष्टा करो। (1 पत. 3:9)

लूका 6:35 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लूका 6:35 (HINIRV) »
वरन् अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो, और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्तान ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है। (लैव्य. 25:35-36, मत्ती 5:44-45)

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नीतिवचन 25:21 (HINIRV) »
यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना; और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना;

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