लूका 6:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और सब उसे छूना चाहते थे, क्योंकि उसमें से सामर्थ्य निकलकर सब को चंगा करती थी।

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लूका 6:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार (Meaning at a glance)

लूका 6:19 में कहा गया है कि लोगों का समाज यीशु पर टूट पड़ा और प्रत्येक व्यक्ति उस पर छूना चाहता था, क्योंकि उसके भीतर से निकलने वाली शक्ति सब को चंगा कर देती थी। यह पाठ प्रभु की दिव्य सामर्थ्य के स्पष्ट प्रदर्शन का चित्रण है, जो उनके आस-पास के लोगों के लिए एक जीवन्त आशा बन गया।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह उपदेश–संदेश लूका के Gospel में है, जो ईश्वर की कृपा और राज्य के प्रवेश को राजा के रूप में प्रस्तुत करता है। भीड़ की भीड़ में यीशु ने रोगियों और पीड़ितों के बीच रहते हुए उनका उपचार किया। लोग यीशु के स्पर्श से ही चंगाई की अनुभूति करते थे, यह दर्शाता है कि प्रभु के शरीर से निकलने वाला वरदान सहज, वास्तविक और सभी पर समान रूप से उपलब्ध है।

व्याख्यात्मक विचार

  • चंगाई का स्रोत: सामर्थ्य यीशु के व्यक्तित्व से स्वतंत्र नहीं है, बल्कि वह भीतर से निकलती है; Jesus की आध्यात्मिक ऊर्जा मानवजाति के लिए उद्धार का माध्यम बनती है।
  • आरोग्य के व्यापक आयाम: शारीरिक चंगाई ही नहीं, बल्कि आत्मिक राहत और सामाजिक समावेशन भी उस “स्पर्श” के साथ जुड़ा दिखता है।
  • समर्थ का उद्देश्य: यह चंगेपन लोगों की व्यक्तिगत आस्था और यीशु के शब्दों के प्रति प्रतिक्रिया को सक्रिय करता है—विश्वास के साथ उनके पास आना।

टेक्स्ट से जुड़े छोटे शीर्षक-चयन

स्पर्श और शक्ति: प्रभु के स्पर्श में वह चमत्कारिक प्रभाव है जो सभी के लिएAccessible है; चंगाई का स्रोत उनके पास है।

समुदाय में चंगाई की पहुँच: जैसे-जैसे लोग उत्साहपूर्वक उस स्पर्श को चाहते थे, चंगाई का फैलाव भी विस्तृत होता गया।

अन्य संदर्भ (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या

यूहन्ना 14:12-14 में यीशु कहते हैं कि जो मुझ पर विश्वास करेगा, वही कार्य करेगा और उनसे greater works होगा; यह दर्शाता है किHis power कार्यरत रहती है और विश्वासियों के बीच प्रतिबिंबित होती है।

मार्क 5:29 की एक कहानी में रोगिणी को उसका स्पर्श संवेदक बनाता है; यहाँ भी एक व्यक्तिगत आस्था और स्पर्श से चंगाई मिलती है।

मती 14:36 लोग उसकी चंगाई के स्पर्श के लिए नहीं चुकते; यह दर्शाता है कि प्रभु की दया सभी के लिए खुली है, भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में भी।

संक्षिप्त निष्कर्ष (Practical takeaway)

हम विश्वास के स्पर्श से प्रभु की शक्ति को अनुभव कर सकते हैं। जब हम यीशु के पास आते हैं, तो न केवल हमारी बीमारी दूर होती है, बल्कि हमारे दिल भी उनके प्रेम से भर जाते हैं। जीवन के कठिन क्षण में भी परमेश्वर का स्पर्श हमारी दिशा और आशा तय करता है।

नोट: इस पाठ से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के प्रत्यक्ष उद्धरण यहाँ उपलब्ध नहीं हैं; आवश्यकता होने पर उनके सार्वजनिक-डायरेक्टिशन टिप्पणियाँ संदर्भ के साथ शामिल की जा सकती हैं, परंतु मूल संरचना इस हिन्दी संस्करण में उनके विचारों को एकीकृत और स्वच्छंद रूप से प्रस्तुत करती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 6:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि उसने बहुतों को चंगा किया था; इसलिए जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे।

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मत्ती 14:36 (HINIRV) »
और उससे विनती करने लगे कि वह उन्हें अपने वस्त्र के कोने ही को छूने दे; और जितनों ने उसे छुआ, वे चंगे हो गए।

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मरकुस 6:56 (HINIRV) »
और जहाँ कहीं वह गाँवों, नगरों, या बस्तियों में जाता था, तो लोग बीमारों को बाजारों में रखकर उससे विनती करते थे, कि वह उन्हें अपने वस्त्र के आँचल ही को छू लेने दे: और जितने उसे छूते थे, सब चंगे हो जाते थे।

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