Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 6:1 लूका 6:2 लूका 6:3 लूका 6:4 लूका 6:5 लूका 6:6 लूका 6:7 लूका 6:8 लूका 6:9 लूका 6:10 लूका 6:11 लूका 6:12 लूका 6:13 लूका 6:14 लूका 6:15 लूका 6:16 लूका 6:17 लूका 6:18 लूका 6:19 लूका 6:20 लूका 6:21 लूका 6:22 लूका 6:23 लूका 6:24 लूका 6:25 लूका 6:26 लूका 6:27 लूका 6:28 लूका 6:29 लूका 6:30 लूका 6:31 लूका 6:32 लूका 6:33 लूका 6:34 लूका 6:35 लूका 6:36 लूका 6:37 लूका 6:38 लूका 6:39 लूका 6:40 लूका 6:41 लूका 6:42 लूका 6:43 लूका 6:44 लूका 6:45 लूका 6:46 लूका 6:47 लूका 6:48 लूका 6:49



सीधे अर्थ का सार (Meaning at a glance)
लूका 6:19 में कहा गया है कि लोगों का समाज यीशु पर टूट पड़ा और प्रत्येक व्यक्ति उस पर छूना चाहता था, क्योंकि उसके भीतर से निकलने वाली शक्ति सब को चंगा कर देती थी। यह पाठ प्रभु की दिव्य सामर्थ्य के स्पष्ट प्रदर्शन का चित्रण है, जो उनके आस-पास के लोगों के लिए एक जीवन्त आशा बन गया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह उपदेश–संदेश लूका के Gospel में है, जो ईश्वर की कृपा और राज्य के प्रवेश को राजा के रूप में प्रस्तुत करता है। भीड़ की भीड़ में यीशु ने रोगियों और पीड़ितों के बीच रहते हुए उनका उपचार किया। लोग यीशु के स्पर्श से ही चंगाई की अनुभूति करते थे, यह दर्शाता है कि प्रभु के शरीर से निकलने वाला वरदान सहज, वास्तविक और सभी पर समान रूप से उपलब्ध है।
व्याख्यात्मक विचार
टेक्स्ट से जुड़े छोटे शीर्षक-चयन
स्पर्श और शक्ति: प्रभु के स्पर्श में वह चमत्कारिक प्रभाव है जो सभी के लिएAccessible है; चंगाई का स्रोत उनके पास है।
समुदाय में चंगाई की पहुँच: जैसे-जैसे लोग उत्साहपूर्वक उस स्पर्श को चाहते थे, चंगाई का फैलाव भी विस्तृत होता गया।
अन्य संदर्भ (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
यूहन्ना 14:12-14 में यीशु कहते हैं कि जो मुझ पर विश्वास करेगा, वही कार्य करेगा और उनसे greater works होगा; यह दर्शाता है किHis power कार्यरत रहती है और विश्वासियों के बीच प्रतिबिंबित होती है।
मार्क 5:29 की एक कहानी में रोगिणी को उसका स्पर्श संवेदक बनाता है; यहाँ भी एक व्यक्तिगत आस्था और स्पर्श से चंगाई मिलती है।
मती 14:36 लोग उसकी चंगाई के स्पर्श के लिए नहीं चुकते; यह दर्शाता है कि प्रभु की दया सभी के लिए खुली है, भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में भी।
संक्षिप्त निष्कर्ष (Practical takeaway)
हम विश्वास के स्पर्श से प्रभु की शक्ति को अनुभव कर सकते हैं। जब हम यीशु के पास आते हैं, तो न केवल हमारी बीमारी दूर होती है, बल्कि हमारे दिल भी उनके प्रेम से भर जाते हैं। जीवन के कठिन क्षण में भी परमेश्वर का स्पर्श हमारी दिशा और आशा तय करता है।
नोट: इस पाठ से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के प्रत्यक्ष उद्धरण यहाँ उपलब्ध नहीं हैं; आवश्यकता होने पर उनके सार्वजनिक-डायरेक्टिशन टिप्पणियाँ संदर्भ के साथ शामिल की जा सकती हैं, परंतु मूल संरचना इस हिन्दी संस्करण में उनके विचारों को एकीकृत और स्वच्छंद रूप से प्रस्तुत करती है।