Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 6:1 लूका 6:2 लूका 6:3 लूका 6:4 लूका 6:5 लूका 6:6 लूका 6:7 लूका 6:8 लूका 6:9 लूका 6:10 लूका 6:11 लूका 6:12 लूका 6:13 लूका 6:14 लूका 6:15 लूका 6:16 लूका 6:17 लूका 6:18 लूका 6:19 लूका 6:20 लूका 6:21 लूका 6:22 लूका 6:23 लूका 6:24 लूका 6:25 लूका 6:26 लूका 6:27 लूका 6:28 लूका 6:29 लूका 6:30 लूका 6:31 लूका 6:32 लूका 6:33 लूका 6:34 लूका 6:35 लूका 6:36 लूका 6:37 लूका 6:38 लूका 6:39 लूका 6:40 लूका 6:41 लूका 6:42 लूका 6:43 लूका 6:44 लूका 6:45 लूका 6:46 लूका 6:47 लूका 6:48 लूका 6:49



पाठ का संक्षेप और संदर्भ
लूका 6:7 में शास्त्री और फरीसी यह देखने की नीयत से चाकचौबंद थे कि यीशु पिता के कानून के अनुसार शब्त के दिन चंगा करना क्या सचमुच permissible है या नहीं। वे अपने नियमों के भारी बोझ के पीछे यीशु की करुणा-कार्य और उसके उद्धारकारी दृष्टिकोण को समझने से रोकते थे। यह पद दिखाता है कि परमेश्वर के अनुग्रह का कार्य मानव-आचार के ढांचे में बंधा नहीं रहता, बल्कि वह जरूरतमंद पर कृपा दिखाने के लिए आता है।
पद का पाठ और क्रमिक चर्चा
यहां शास्त्री और फरीसी, जो यीशु के चैलेंजर्स हैं, उसके हर कदम पर नजर रखते हैं—यह दर्शाने के लिए कि वह सब्त के दिन चंगा करता है या नहीं। वे कानूनी सिद्धांतों को देखकर यह निष्कर्ष निकालना चाहते हैं कि Jésus के कर्म गलत हो सकते हैं, भले ही रोगी और पीड़ित लोग सहायता के लिए पुकार रहे हों। इस स्थिति में यीशु शांति से जवाब देकर मानवता और दया को कानून के ऊपर रखना स्पष्ट करते हैं—क्योंकि सब्त का मूल उद्देश्य जीवों के जीवन की रक्षा और उन्नति है, न कि प्रतिबंधों का कठिन निर्वाह।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse से स्पष्ट संदेश है: परमेश्वर के उद्देश्य में दयालुता और मरहम की क्रिया अधिक महत्वपूर्ण है than कठोर नियमों के पालन से। यीशु के उदाहरण से यह दिखता है कि धर्म के बाहरी ढांचे के भीतर भी आशीर्वाद और सहायता की जरूरत है, और यह प्रेरणा जाग्रत करती है कि हमारा प्रभु अन्याय या पीड़ा के सामने नहीं रुकते।
अन्यों के साथ तुलना
— मत्ती 12:9-14 में यीशु एक ही प्रकार की स्थिति में यह बतलाते हैं कि शब्त के दिन भी जीवित वस्तुओं को बचाना और दुखी को सहायता देना परमेश्वर के हृदय के अनुरूप है।
— मरकुस 3:1-6 में भी यह प्रश्न उठता है कि शब्त के नियम को किस प्रकार सही रूप से समझना चाहिए जब व्यक्ति की ज़रूरत तत्काल हो।
अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेज़
• लूका 13:10-14 — रोगी महिला पर यीशु का उपचार, दया के कार्य का प्रमाण। यह दिखाता है कि दया शर्तों से ऊपर है।
• याकूब 2:14-17 — विश्वास के साथ कर्मों की आवश्यकता का उपदेश, जिसमें दिखाया गया है कि विश्वास केवल शब्दों से नहीं चलता, उसे व्यवहार में प्रमाणित करना होता है।
व्याख्या-नोट: क्रॉस-रेफरेंसेज़ मानवता और दया के क्रियात्मक पक्ष को मजबूत करती हैं; वे इस पाठ के केंद्रीय संदेश को पूरक बनाती हैं कि शब्त के नियम के भीतर भी जीवन का लाभ सर्वोच्च है।
संक्षेप निष्कर्ष
शास्त्री और फरीसी के जाँच-परख वाले दृष्टिकोण के बीच यीशु का उत्तर दया को सर्वोच्च मानने की शिक्षा देता है। शब्त का उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा और जीवनात्यावश्यकता की पूर्ति है; यदि दयालुता से अवसर मिलता है, तो चंगा करने का उपयोग धार्मिक नियमों के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके पूर्ण भाव को साकार करता है।
टिप्पणी उद्धरण (जहाँ उपलब्ध):
अलबर्ट बार्न्स, ऐडम क्लार्क—इन प्रचारित टिप्पणियों में यीशु के शब्त-परक क्रिया के साथ दया और सत्य को जोड़ा गया है; किसी भी स्पष्ट शाब्दिक उद्धरण का संक्षेप यहाँ है: “वह शब्त के दिन भी करुणा दिखाते हैं”—उक्तिपरक सार इस section में समाहित है।