लूका 6:34 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यदि तुम उसे उधार दो, जिनसे फिर पाने की आशा रखते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी पापियों को उधार देते हैं, कि उतना ही फिर पाएँ।

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लूका 6:34 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 6:34 परिप्रेक्ष्य और अर्थ

पद: और यदि तुम उसे उधार दो, जिनसे फिर पाने की आशा रखते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी पापियों को उधार देते हैं, कि उतना ही फिर पाएँ।

सूत्र का तत्काल संदर्भ

यह उद्धरण लूका के बहुभाषी, व्यवहारिक उपदेशों का हिस्सा है, जहाँ यीशु चक्रवाती सोच के विरुद्ध वास्तविक प्रेम और योगदान की परख कराते हैं। यहाँ उधार देना एक साधन के रूप में लिया गया है—पर वह संकेत है कि हमारी नियत क्या है: क्या हम केवल फायदे के लिए,akeun समय पर लौट आता है, या हम हर चीज को परम प्रेम और उदारता के ढांचे में देखते हैं?

ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है

यह पाठ बताता है कि विश्वास में आस्था सिर्फ धारणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार में उभरे हुए प्रकट होता है। परम पिता परमेश्वर के प्रेम की नज़र से, उधार देना और सहायता करना एक आचरण है जो ईश्वर के चरित्र के अनुरूप है। ईश्वर स्वयं दयालु और निर्भर करने योग्य है; हमारा आचरण भी उसे प्रतिबिंबित करता है।

शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

- उधार देना: सीधे-सीधे आर्थिक देनदारी से आगे बढ़ कर यह एक अलौकिक प्रेम की क्रिया है, जिसमें नियत यह हो कि हम सहयोग और सहायता करें, भले ही उसे पुनः प्राप्त करने की कोई सुनिश्चितता न हो।

- जिनसे फिर पाने की आशा रखते हो: यहाँ लाभ-लाभ के बजाए आत्मीयता और न्याय की दृष्टि है; ईश्वर उसी आत्मीयता की शिक्षा देते हैं।

अनुरूप विविध संदर्भ

- मैथ्यू हेनरी ( Matthew Henry ) का निष्कर्ष: दयालुता का आचार वह है जो किसी भी शर्त से मुक्त है; यह बताता है कि उधार देकर हम परमेश्वर के हृदय के साथ सहभागिता करते हैं।

- एलबर्ट बार्न्स ( Albert Barnes ) का विचार: ओढ़नी और प्रतिफल के बजाय उदारता की प्रेरणा पर ध्यान दें; यहाँ उधार देना एक धार्मिक गुण है जो संसार से ऊपर है।

- एडम क्लार्क ( Adam Clarke ) का टिप्पणी: यह शास्त्र बताता है कि प्रेम के नियम को से अधिक, निःस्वार्थता से प्रेरित क्रिया उधार देने में सत्यापित होती है; इससे समाज में स्थिरता और भरोसा बनता है।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)

- लूका 6:35: प्रेम और दयालुता के कार्य किसी के साथ नहीं, बल्कि एक दयालु चरित्र के प्रति सम्मान पैदा करते हैं।

- रोमियों 12:13: भाइचारे के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता का आह्वान।

-यरम 22:16: न्याय और करुणा के साथ एक समाज की नींव बनती है; उधार देना भी इसी नैतिक ढांचे का हिस्सा है।

आज के लिए निचोड़, व्यवहारिक अनुप्रयोग

- विनम्र आचरण: उधार देना मात्र आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि समय, शक्ति और संसाधन साझा करने की इच्छा है।

- निर्भरता और विश्वास: ऐसी क्रिया से हम अपने समुदाय में भरोसा बनाते हैं कि सहायता हमेशा उपलब्ध है—भले ही हमें वापसी की निश्चितता न लगे।

- विकल्प और शब्द: जब वित्तीय सहयोग संभव न हो, तब अन्य तरह से सहायता दें—उदाहरण के लिए समय-समय पर सहारा व्यवस्था बनाएं, अनुशासन से नहीं, बल्कि करुणा से करें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह पाठ यह बताता है कि उधार देना केवल लेन-देन नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास की मिसाल है। परमेश्वर के चरित्र के अनुरूप, हमारा आचरण उदार और निष्कामी होना चाहिए—ताकि समाज में भरोसा और करुणा बढ़े।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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