Old Testament
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मत्ती 5:1 मत्ती 5:2 मत्ती 5:3 मत्ती 5:4 मत्ती 5:5 मत्ती 5:6 मत्ती 5:7 मत्ती 5:8 मत्ती 5:9 मत्ती 5:10 मत्ती 5:11 मत्ती 5:12 मत्ती 5:13 मत्ती 5:14 मत्ती 5:15 मत्ती 5:16 मत्ती 5:17 मत्ती 5:18 मत्ती 5:19 मत्ती 5:20 मत्ती 5:21 मत्ती 5:22 मत्ती 5:23 मत्ती 5:24 मत्ती 5:25 मत्ती 5:26 मत्ती 5:27 मत्ती 5:28 मत्ती 5:29 मत्ती 5:30 मत्ती 5:31 मत्ती 5:32 मत्ती 5:33 मत्ती 5:34 मत्ती 5:35 मत्ती 5:36 मत्ती 5:37 मत्ती 5:38 मत्ती 5:39 मत्ती 5:40 मत्ती 5:41 मत्ती 5:42 मत्ती 5:43 मत्ती 5:44 मत्ती 5:45 मत्ती 5:46 मत्ती 5:47 मत्ती 5:48



मत्ती 5:42 — "जो कोई तुझ से माँगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उससे मुँह न मोड़।"
यह वचन मत्ती 5 में ईसा के संदर्भित करुणा-सम्बन्धी शिक्षा का हिस्सा है। यातायात-उपदेशों के बीच यह एक व्यावहारिक नैतिक दायित्व के रूप में आता है: यह दिखाता है कि ईश्वर के राज्य के नागरिक कैसे दूसरे की आवश्यकता के प्रति उदार और सहज भाव रखें। यह सिर्फ क्षणिक दयालुता नहीं, बल्कि जरूरतमंद के साथ एक विश्वसनीय और सम्मानजनक सम्बन्ध बनाने की प्रेरणा है। इस कथन में हमारे लिये स्पष्ट है कि पैगंबरों के वचनों में भी आर्थिक और व्यक्तिगत ऋण-देने का व्यवहार ईमानदारी, उदारता और संतुलन की कसौटी पर आंका जाना चाहिए।
मुख्य अर्थ
ईसा बताते हैं कि दूसरों की माँग पर बाध्यकारी सहायतात्मक रवैया रखना चाहिए—यही प्रेम का व्यवहार है। साथ ही, जो उधार लेने आए, उसके प्रति एक मर्यादित, विनम्र प्रतिक्रिया भी आवश्यक है। यह दोनों बातों के जरिये सुझाव देता है कि हमारे संसाधन कैसे साझा हों और समाज में भरोसा कैसे बना रहे।
तीन प्रमुख विषय
संदर्भ पंक्तियाँ (cross-references)
यीशु के अलावा अन्य जगहों पर भी दयालु सहायता और ऋण-प्रबंधन पर सिद्धांत मिलते हैं:
आचरणीय पहलू (व्यावहारिक चिंतन)
- यदि किसी के पास देने की क्षमता हो, तो समय-सीमा और परिस्थिति का खयाल रखते हुए मदद करें।
- उधार में लेते समय साफ-तौर पर शब्द-समझौते रखें, ताकि निर्भरता और क़र्ज़ की जाँच स्पष्ट रहे।
- दयालुता को आत्मघाती नहीं बनायें; अपने परिवार और आवश्यकता को संतुलित रखें ताकि स्रोत स्थिर रहें।
संक्षेप निष्कर्ष
मत्ती 5:42 में यीशु ने समाज के भीतर प्रेमपूर्ण और व्यवहारिक दायित्व की भाषा प्रस्तुत की है—जो माँगे उसे देना, और उधार लेने में विवेक-संयम रखना। यह ईश्वर के राज्य के नागरिकों के लिए एक आंतरिक परिवर्तन का संकेत है: साधनों के सही उपयोग, समुदाय के प्रति उत्तरदायित्व, और करुणा भरे व्यवहार का संपूर्ण चित्र।
नोट: इस विचार को Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रकाश में संकलित किया गया है ताकि पाठ के भीतर की करुणा और व्यवहारिक नैतिकता स्पष्ट रहे। उनके समान विचारों के संकेत-उद्धरण के स्थान पर संक्षिप्त सार लिखा गया है।