मत्ती 5:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“यह भी कहा गया था, ‘जो कोई अपनी पत्‍नी को त्याग दे, तो उसे त्यागपत्र दे।’ (व्य. 24:1-14)

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मत्ती 5:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 5:31 का अभिप्राय और संदर्भ

इस वचन के अनुसार Jesus ने वैवाहिक संबंध के नियमों में पारंपरिक प्रदर्शन को चुनौती दी है: “यह भी कहा गया था, ‘जो कोई अपनी पत्‍नी को त्याग दे, तो उसे त्यागपत्र दे।’” नीचे का अर्थ यह है कि पालन-पोषण और स्थायित्व के बजाय बुरे तरीके से तलाक देना भी एक मानक के रूप में सामने रखा गया था, पर नया विधान यह है कि यह मानक अब आंतरिक आलोक और नैतिक परिवर्तन से सम्बद्ध है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह उद्धरण विद्यावाची कानून-उल्लेख के पारंपरिक नियमों से आता है (व्यवस्थापिका 24:1–14 का संदर्भ देता है कि तलाक कैसे हुआ और किन परिस्थितियों में वैध माना जा सकता है)। मसीह का उद्देश्य तलाक के व्यापक और सतही नियमों को नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता को बढ़ावा देना है। यह नयी वक्तव्य उन विचारों को चुनौती देता है जो तलाक को साधारण समाधान मानते हैं।

व्याख्यान-नोट्स

  • तलाक के औचित्य के बारे में पूर्वकथन के भीतर भी नैतिक मानक ऊँचे रखे जाते हैं; यीशु तलाक को केवल स्वच्छ अनुभाग तक सीमित नहीं करते, बल्कि मन की उर्ध्व-उद्धार पर बल देते हैं।
  • यह उपयोग-करने के बदले, प्रेम और प्रतिबद्धता के गुणों की आवश्यकता को उजागर करता है—जो वैवाहिक संबंध को मजबूत बनाते हैं।

महत्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंसे

1) मत्ती 19:3–9 में यीशु विवाह की स्थापना की गम्भीरता दिखाते हैं और तलाक के विरुद्ध नैतिक मानक को स्पष्ट करते हैं।

2) मरकुस 10:2–12 और लूका 16:18 में भी तलाक-प्रथा और विवाह पर चर्चा मिलती है, जो दिल की धारणा को महत्व देती है।

3) रोम 7:2–3 में पति-पत्नी के बीच कानूनी विषयों का उल्लेख है, जो परमप्रिय संबंधों के भीतर होने वाले बदलावों पर विचार कराता है।

इन उल्लेखों से ज्ञात होता है कि तलाक का विषय केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि आत्मा-आचरण और रिश्ते की मरम्मत के आयाम से भी जुड़ा है।

संक्षिप्त थीमैटिक सार

  1. कानून की कठोरता से ऊपर हृदय की शुद्धता आवश्यक है।
  2. वैवाहिक प्रतिबद्धता का उद्देश्य जीवन-भर के सम्बंधों में विश्वास बनाये रखना है।
  3. परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, प्रेम और एक दूसरे की गरिमा को बनाए रखना मार्गदर्शक हो।

संदर्भ-उद्धरण (संयोजनात्मक)

हार्नेस (Matthew Henry) और अलेक्जेंडर क्लार्क (Adam Clarke) जैसे सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के विचार इस कथन को गहराई देते हैं: वे तलाक की निषेधात्मक चेतना को नयी नैतिक दिशा के साथ जोड़ते हैं—कि हृदय की स्थिरता और व्यवहार की पवित्रता परमेश्वर की मान्यताओं के अनुरूप हो।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हम में से प्रत्येक अपने रिश्तों में एक नई आत्म-निगरानी विकसित करे: शब्दों, वचनों और कार्यों से वैवाहिक संबंध को सम्मान दें; कठिन परिस्थितियों में भी क्षमा और सुधार की दिशा में अग्रसर हों; ताकि प्रेम की शुद्धता बनी रहे और विवाह एक पुण्य-संस्थान बने।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 5:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“वे कहते हैं, 'यदि कोई अपनी पत्‍नी को त्याग दे, और वह उसके पास से जाकर दूसरे पुरुष की हो जाए, तो वह पहला क्या उसके पास फिर जाएगा?' क्या वह देश अति अशुद्ध न हो जाएगा? यहोवा की यह वाणी है कि तूने बहुत से प्रेमियों के साथ व्यभिचार किया है, क्या तू अब मेरी ओर फिरेगी?*

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“यदि कोई पुरुष किसी स्त्री को ब्याह ले, और उसके बाद उसमें लज्जा की बात पाकर उससे अप्रसन्न हो, तो वह उसके लिये त्यागपत्र लिखकर और उसके हाथ में देकर उसको अपने घर से निकाल दे। (मत्ती 5:31)

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उन्होंने यीशु से कहा, “फिर मूसा ने क्यों यह ठहराया, कि त्यागपत्र देकर उसे छोड़ दे?”

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