मत्ती 5:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जाएँ, तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या बिन्दु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा।

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मत्ती 5:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 5:18 का संदर्भ और मूल nghĩa

इस पद में यीशु ने कानून की स्थिरता पर जोर दिया। जब वह पहाड़ पर शिक्ष देता है, तब वह कहता है कि परमेश्वर के विधान की मर्योयता अटल है। “आकाश और पृथ्वी टल न जाएँ” का तात्पर्य यह है कि परमेश्वर की व्यवस्था कितनी भी विस्तार पाए, उसका एक छोटा-सा भाग भी बिना पुरा हुए नहीं टलेगा। यह वाक्य सत्यानुभव की दृढ़ता दिखाता है: ईश्वर का वचन स्थिर और अपरिवर्तित है, और मनुष्य के कोई भी तर्क या परिवर्तन उसे कम नहीं कर सकते।

मुख्य तात्पर्य

कुल मिलाकर यह संदेश है कि कानून और शब्द परमेश्वर के सामने पूर्णता के साथ पूरा होना चाहिए। यीशु का यह कथन यह सिद्ध करता है कि न तो किसी लिपि-बंधु की शिथिलता, न मानवीय परिवर्तन इस क्रम को हल्का कर सकते हैं; न ही “कम से कम एक चिह्न” भी विनष्ट किया जा सकता है। यह आत्म-नियमन और धार्मिकता की गंभीरता की प्रबल चेतावनी है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • स्थायित्व बनाम परिवर्तन: परमेश्वर का वचन स्थिर रहता है, समय के साथ यह नहीं बदलता।
  • व्यवस्था की पूर्णता: हर अक्षर, हर मात्रा, हर बिंदु का उद्देश्य पूरा होता है।
  • धर्म के साथ साहचर्य: यीशु ने पुराने नियम के स्थान पर नया जीवन-उद्धार प्रदान करने की भूमिका उठा ली है; पर वह नियम की अवहेलना नहीं करते।

संबद्ध पदांश

1) रोमियों 3:31 – “हम व्यवस्था को मानते हैं, पर विश्वास से पूर्ण करते हैं;” यह दर्शाता है कि विश्वास के साथ कानून का उद्देश्य नहीं खोया जाता।

2) यिर्मयाह 33:20-21 – परमेश्वर के वचन की अटलता;

3) 2 तीम edit 3:16-17 – पवित्र शास्त्र हर सत्कार के लिए सक्षम बना देता है।

व्यावहारिक विचार

हम कैसे इस स्थिरता को अपनी दिनचर्या में देखते हैं? हर निर्णय में नये तर्कों से पहले, परमेश्वर के वचन के अनुरूप आचरण प्रतिष्ठित करें। छोटे-छोटे नियम भी आपके आंतरिक चरित्र को आकार देते हैं—क्योंकि परमेश्वर की व्यवस्था का प्रत्येक बिंदु उद्देश्यपूर्ण है।

संक्षिप्त समापन

मत्ती 5:18 हमें ਯहੂदी-धर्म और नये जीवन की दिशा देता है: परमेश्वर का वचन अचल है और पूर्णता तक पहुँचे, चाहे आकाश और पृथ्वी टल जाएँ। हमारी आध्यात्मिक यात्रा में यह चेतावनी है कि हम लचीलापन नहीं, बल्कि प्रेरित दृढ़ता के साथ नियमों के अनुरूप चलें।

पूर्वक उद्धरण (संदर्भित हिस्से)

माथि henry, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के समान विचारों में यह कठोरता और स्थायित्व का विषय बार-बार उभरता है: “यही व्यवस्था का मूल उद्देश्य है,” पर यदि उपलब्ध हो, तो नीचे वाले छोटे उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं:

“यही नियम की पूर्णता का तात्पर्य है; एक भी अक्षर बिना पूरा किए नहीं जायेगा।”

क्रॉस-रेफरेंसेस

1) रोम 3:31 – विश्वास के साथ व्यवस्था का पूर्ण होना; 2) यिर्मी 33:25-26 – वचन की अटलता; 3) 2 तीम 3:16-17 – शास्त्र से हर पथ पर मार्गदर्शन।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 5:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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