Old Testament
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मत्ती 5:1 मत्ती 5:2 मत्ती 5:3 मत्ती 5:4 मत्ती 5:5 मत्ती 5:6 मत्ती 5:7 मत्ती 5:8 मत्ती 5:9 मत्ती 5:10 मत्ती 5:11 मत्ती 5:12 मत्ती 5:13 मत्ती 5:14 मत्ती 5:15 मत्ती 5:16 मत्ती 5:17 मत्ती 5:18 मत्ती 5:19 मत्ती 5:20 मत्ती 5:21 मत्ती 5:22 मत्ती 5:23 मत्ती 5:24 मत्ती 5:25 मत्ती 5:26 मत्ती 5:27 मत्ती 5:28 मत्ती 5:29 मत्ती 5:30 मत्ती 5:31 मत्ती 5:32 मत्ती 5:33 मत्ती 5:34 मत्ती 5:35 मत्ती 5:36 मत्ती 5:37 मत्ती 5:38 मत्ती 5:39 मत्ती 5:40 मत्ती 5:41 मत्ती 5:42 मत्ती 5:43 मत्ती 5:44 मत्ती 5:45 मत्ती 5:46 मत्ती 5:47 मत्ती 5:48



मत्ती 5:6 का अर्थ: धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं
नीतिवचन समूह के भीतर यह वचन यीशु के पहले आशीषों (बीटिट्यूड्स) में दिया गया है। यह बताता है कि ईश्वर के राज्य में प्रवेश के लिए एक विशेष आंतरिक आग्रह आवश्यक है: धार्मिकता से गहरी भूख और प्यास। यह भूख केवल सतही धर्मचर्चाओं से नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सत्य और पवित्रता की तृप्ति की चाह है। जब वे भौतिक आराम या सीधा सफलता की उम्मीद छोड़कर परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप जीने की आकांक्षा रखते हैं, तब परमेश्वर उन्हें तृप्त करेगा।
मुख्य बात का सार
धन्य वे हैं जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे रहते हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएँगे। यहाँ धार्मिकता से तात्पर्य है परमेश्वर की दृष्टि में सही जीवन-शैली, न्याय और पवित्रता की पूर्णता। ईश्वर के राज्य में प्रवेश के लिए न सिर्फ धार्मिक मान्यताओं का अभ्यास, बल्कि उसकी इच्छा के अनुरूप जीवन की निरंतर जिज्ञासा और आक्रामक खोज भी आवश्यक है।
मुख्य थीम्स
संबंधित पवित्र ग्रंथ
रिचार्जिंग संदर्भ जिनमें इस धारणा से मिली-जुली धारणा मिलती है:
व्यावहारिक चिंतन
कैसे यह भूख हमारी दैनिक जिंदगी में दिखे? खुद के आत्म-आकलन से शुरू करें: क्या मैं सत्य, न्याय और दया के लिए प्रेरित रहता हूँ? क्या मेरी इच्छाएँ उन चीजों से चलती हैं जो परमेश्वर के राज्य के साथ संगत हैं? जब मुझे असुविधा या परिश्रम लगे, क्या मैं उसी भूख से प्रेरित होकर ईश्वर की इच्छा को पहले मानता हूँ?
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वचन हमारे लिए एक उन्नत आह्वान है: परमेश्वर की धार्मिकता की वास्तविक भूख ही वास्तविक आशीष की कुंजी है। जो लोग परमेश्वर की righteousness के लिए ज्वलंत इच्छा रखते हैं, वे निश्चित रूप से उसके राज्य के आंतरिक तृप्ति से सम्बद्ध होते हैं।
शोध-संदर्भ उद्धरण (संक्षेप): मूर्तभाषा में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से निम्नलिखित विचार पहले से उद्धृत मिले हैं—
— “धार्मिकता के भूखे-तृष्णु इनका आचरण प्रबुद्ध और प्रत्यक्ष हो, क्योंकि वे वास्तविक तृप्ति के लिए ईमानदारी से seek करते हैं।”
नोट: ऊपर दी गयी पंक्तियाँ उन इतिहासिक टिप्पणीकारों के सामान्य विचार-धाराओं का सार हैं; विशिष्ट मौलिक वाक्य सीधे उद्धृत नहीं हैं क्योंकि यह पाठ विशिष्ट उद्धरण-रेखाओं के लिए पर्याप्त सुरक्षित प्रकाशन नहीं है।
Cross-references से थोड़ा दिलचस्पी
यूहन्ना 6:35—खाद्य प्रतीक में आत्म-तृप्ति; धार्मिकता की भूख को मीठी संतुष्टि देता है।
याकूब 4:8—ईश्वर के पास आने से निष्कलंक जीवन का आरम्भ; आंतरिक भूख के साथ तात्पर्य है कि हमारे संबंध सीधे परमेश्वर से जुड़ें।
यहोशू 1:8—धर्मशास्त्र का नियमित अध्ययन और मनन, ताकि धार्मिकता की भूख बढ़े और तृप्ति पाई जा सके।