मत्ती 5:32 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ कि जो कोई अपनी पत्‍नी को व्यभिचार के सिवा किसी और कारण से तलाक दे, तो वह उससे व्यभिचार करवाता है; और जो कोई उस त्यागी हुई से विवाह करे, वह व्यभिचार करता है।

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मत्ती 5:32 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 5:32 — वही तलाक और विवाह का परिदृश्य

यह पाठ पहाड़ की शिक्षा के अंश का भाग है, जिसमें यीशु निर्देशित करते हैं कि विवाह-बंधन की गंभीरता क्या होनी चाहिए। यहाँ व्यभिचार के अतिरिक्त किसी भी कारण से तलाक दिए जाने पर भी विचार किया गया है, और जो व्यक्ति विवाहित पूर्व साझी जीवन से विवाह करता है, उसे भी व्यभिचार करने वाला कहा गया है। यह उद्धारकर्ता का ऐसा मानक है जो मानवीय कठोरता से ऊपर उठकर परमेश्वर की पवित्र योजना को प्रतिध्वनित करता है: दंपतियों के बीच रक्षा और प्रतिबद्धता की गहराई।

ईश्वर की ओर से दिखने वाला पाठ का सार

इस वाक्य के पीछे एक प्रमुख सीख है: विवाह एक स्थिर, एकजुट, ईश्वरीय संरचना है, जिसे तलाक जैसी संस्थागत तोड़-फोड़ से नहीं बदला जाना चाहिए जब तक कि अलग-अग अलग कारण परमेश्वर के अनुसार न हों। यीशु इस विषय को केवल क़ानूनी रूप से लागू नहीं करते, बल्कि विवाहित जीवन में आत्मिक मिसाल और प्रेम-निष्ठा की सुरक्षा पर बल देते हैं। यह उस परंपरा से जुड़ता है जिसमें परमेश्वर शादी को एक पूजनीय बंधन के रूप में देखते हैं; तलाक एक बहुत नाज़ुक स्थिति है, जिसका समाधान प्रेम, क्षमा और पुनःस्थापना से ही संभव माना गया है।

शब्दों की स्पष्टता और imagery

“व्यभिचार के सिवा” से आशय है किसी अन्य कारण से पत्नी के साथ वैवाहिक संबंध टूटना। “त्यागी हुई से विवाह करना” का अर्थ है वह पुरुष या महिला जो पूर्व जीवन-साथी को छोड़कर दूसरे से विवाह कर ले। यीशु यहाँ मानते हैं कि विवाह-संबंध का स्थायित्व एक नैतिक दायित्व है, जो समाज की सतह पर कानून से अधिक, आत्म-संयम और ईश्वर-आह्वान से जुड़ा है।

सम्बंधित उद्धरण और विचार

यहाँ सुनी जाने वाली शिक्षात्मक धारणाएँ “धर्मशास्त्रीय कठोरता बनाम आंतरिक परिवर्तन” के पूर्ववर्ती विचारों से जुड़ी रहती हैं। परमेश्वर के कारण विवाह-बंधन की पवित्रता को बनाये रखने के लिए कुछ पुराने टीका-चिन्ह इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं:

  • अल्बर्ट बार्न्स के अनुसार, यह शिक्षा विवाह-बंधन की अनिवार्यता और मनुष्य की नैतिक जिम्मेदारी पर केंद्रित है; तलाक के कारणों पर सख्त नियम शादी की पवित्रता को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
  • एडम क्लार्क ने विवाहित जीवन में विश्वास की सीधी-सादी परिभाषा दी है कि तलाक-संबंधी घटनाओं के कारण भी विश्वास के दो पक्ष एक दूसरे के साथ ईश्वर के सामने सचेत रहते हैं।
  • मैथ्यू हेन्न्री (Matthew Henry) का दृष्टिकोण यह है कि विवाह का स्थायित्व परमेश्वर की योजना का भाग है; तलाक केवल उस योजना के विरुद्ध माना जाता है जब तक कि वैध कारण न हो और ईश्वर इस परिस्थिति को सुधारने की मांग करते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और उनके conexión

1) मत्ती 19:9 — विवाह के नियमों के विस्तार में यीशु ने विवाह-विच्छेद के कारण को स्पष्ट किया; यह पाठ इस से जुड़कर विवाह-बंधन की गंभीरता को पुष्ट करता है।

2) मरकुस 10:11-12 — तलाक और दूसरा विवाह के बारे में यीशु का व्याकरण एक ही ध्रुव पर केंद्रित है: एक स्थिर धर्म-निष्ठा की मांग।

3) मलाकी 2:14-16 — विवाह के प्रति ईश्वर की चित्त-तत्व को दर्शाते हुए विवाह-बंधन के प्रति दंपतियों की वफादारी की महत्ता को दोहराते हैं।

आज के संदर्भ में व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • विवाह-बंधन की रक्षा करें: कठिन समय में भी एक-दूसरे के प्रति वचन को निभाने की कोशिश करें, क्षमा और पुनःस्थापन के रास्ते अपनाएं।
  • आत्म-संयम और ईमानदारी: रिश्तों में पारदर्शिता और निष्ठा—यही जीवन-भर के रिश्तों की कुंजी है।
  • दूसरे से विवाह को लेकर संवेदनशीलता: किसी भी विवाह-वुमण के निर्णय से पहले ईश्वर की योजना और मानवीय परिणामों पर विचार करें।

कुल मिलाकर, यह दायित्वपूर्ण शिक्षण बताता है कि विवाह एक पवित्र अंग है जिसे केवल परमेश्वर की अनुमति से बदला जा सकता है, और यीशु की सिखावन एक उच्च नैतिक मानक स्थापित करती है जो प्रेम, सम्मान और स्थिरता पर टिकी है।

उद्धृत छोटे अंश (जहाँ आवश्यक): “जो कोई अपनी पत्‍नी को व्यभिचार के सिवा किसी और कारण से तलाक दे… और जो कोई उस त्यागी हुई से विवाह करे, वह व्यभिचार करता है।” (HINIRV)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 5:32 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए यदि पति के जीते जी वह किसी दूसरे पुरुष की हो जाए, तो व्यभिचारिणी कहलाएगी, परन्तु यदि पति मर जाए, तो वह उस व्यवस्था से छूट गई, यहाँ तक कि यदि किसी दूसरे पुरुष की हो जाए तो भी व्यभिचारिणी न ठहरेगी।

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“जो कोई अपनी पत्‍नी को त्याग कर दूसरी से विवाह करता है, वह व्यभिचार करता है, और जो कोई ऐसी त्यागी हुई स्त्री से विवाह करता है, वह भी व्यभिचार करता है।

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जिनका विवाह हो गया है, उनको मैं नहीं, वरन् प्रभु आज्ञा देता है, कि पत्‍नी अपने पति से अलग न हो।

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