Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 6:1 यूहन्ना 6:2 यूहन्ना 6:3 यूहन्ना 6:4 यूहन्ना 6:5 यूहन्ना 6:6 यूहन्ना 6:7 यूहन्ना 6:8 यूहन्ना 6:9 यूहन्ना 6:10 यूहन्ना 6:11 यूहन्ना 6:12 यूहन्ना 6:13 यूहन्ना 6:14 यूहन्ना 6:15 यूहन्ना 6:16 यूहन्ना 6:17 यूहन्ना 6:18 यूहन्ना 6:19 यूहन्ना 6:20 यूहन्ना 6:21 यूहन्ना 6:22 यूहन्ना 6:23 यूहन्ना 6:24 यूहन्ना 6:25 यूहन्ना 6:26 यूहन्ना 6:27 यूहन्ना 6:28 यूहन्ना 6:29 यूहन्ना 6:30 यूहन्ना 6:31 यूहन्ना 6:32 यूहन्ना 6:33 यूहन्ना 6:34 यूहन्ना 6:35 यूहन्ना 6:36 यूहन्ना 6:37 यूहन्ना 6:38 यूहन्ना 6:39 यूहन्ना 6:40 यूहन्ना 6:41 यूहन्ना 6:42 यूहन्ना 6:43 यूहन्ना 6:44 यूहन्ना 6:45 यूहन्ना 6:46 यूहन्ना 6:47 यूहन्ना 6:48 यूहन्ना 6:49 यूहन्ना 6:50 यूहन्ना 6:51 यूहन्ना 6:52 यूहन्ना 6:53 यूहन्ना 6:54 यूहन्ना 6:55 यूहन्ना 6:56 यूहन्ना 6:57 यूहन्ना 6:58 यूहन्ना 6:59 यूहन्ना 6:60 यूहन्ना 6:61 यूहन्ना 6:62 यूहन्ना 6:63 यूहन्ना 6:64 यूहन्ना 6:65 यूहन्ना 6:66 यूहन्ना 6:67 यूहन्ना 6:68 यूहन्ना 6:69 यूहन्ना 6:70 यूहन्ना 6:71



यूहन्ना 6:27 का immediate setting
यह आयत यूहन्ना के ग्यारहवें अध्याय के अंतर्ग्रहण-चर्चा में है, जहाँ यीशु ने चमत्कारिक रूप से बहुसंख्य लोगों को भोजन कराया और उनके मन में भौतिक आशा और ईश्वर-व्यवस्था के बीच चयन के बारे में बात की। यहाँ Jesus instructs his listeners not to labor for perishable food, but for the food that endures to eternal life, which the Son of Man will give. The Father has set his seal on him. यह संदेश उस समय के धार्मिक नेताओं और साधारण लोगों दोनों के लिए चेतावनी है: सांसारिक भोजन के पीछे भागना अस्थाई है, परमेश्वर की देह-योग्य आशीष और विश्वास का भोजन चिरस्थायी है.
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ में क्या बतलाता है
यह वाक्य दो गहरी धारणाओं को स्थापित करता है: पहला, परमेश्वर के दीर्घकालिक योजनाओं के लिए हमारे भरोसे की मांग; दूसरा, पुत्र का हाथ थामकर जीवन-आहार प्राप्त करना। यीशु स्पष्ट करते हैं कि वास्तविक प्रावधान वह है जो अनंत जीवन देता है—यह वह भोजन है जो ईश्वरीय स्वीकृति और उद्धार की पुष्टि करता है। पिता ने पुत्र पर मोहर लगा दी है, अर्थात् यीशु की परमधामय-प्रभुत्व और विश्वस्त प्रमाण का अधिकार पूर्ण रूप से स्थापित है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप, पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं)
यीशु के यह कथन पुराने कर्म-उद्धार के विचारों से जुड़ते हैं: - मत्ती 4:4 में यीशु ने लिखा, मनुष्य केवलBread से नहीं जीएगा; परन्तु परमेश्वर के वचन से। - मर्क 8:36-37 में यह विचार कि मनुष्य की क्या विजय है यदि वह सम्पूर्ण संसार भी प्राप्त कर ले, पर उसका प्राण क्या लाभ? - याकूब 4:14 यह याद दिलाता है कि हमारा जीवन एक vapour के समान है।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि सांसारिक सुविधाओं के पीछे भागना तात्कालिक लाभ देता है परन्तु परमेश्वर के दिए जाने वाले जीवन के आहार का महत्व अधिक है—जो विश्वास-सम्बन्ध, प्रतिज्ञा, और उद्धार की दिशा दर्शाता है।
पवित्र ग्रंथ से सम्बन्ध: सार में
यह आयत विश्वास की प्राथमिकता निर्धारित करती हैः विश्वास के भोजन के लिए परिश्रम करें जो अस्तित्व के लिए आवश्यक है। यीशु बतलाते हैं कि जीवन का ठहरना उसके भीतर है; पिता ने इस Breadcrumb को Son पर मोहर दी है—यानी यीशु की भूमिका और देह-योग्यता सत्य है, और उसी के द्वारा उद्धार संभव है।
आज का toepning
कथन-शैली से समापन
इस verses में हमें यह स्मरण मिलता है कि परमेश्वर की योजना में वास्तविक भोजन और जीवन-आहार वही है जो पिता के पुत्र के द्वारा दिया जाता है। यीशु पर मोहरित स्वीकृति इस बात का संकेत है कि यह आहार भरोसे के साथ ग्रहण किया जाना चाहिए, न कि केवल शारीरिक भूख के लिए।
उद्धरण-योग्य छोटे उद्धरण (जहाँ उपलब्ध): Matthew Henry: “...for everlasting sustenance, the Son of man is the Giver.” Albert Barnes: “Faith esteems that food which endures to life eternal, not the bread which perishes.” Adam Clarke: “The Father hath sealed him, i.e., publicly proclaimed him for the work and the reward.”