Old Testament
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यूहन्ना 6:1 यूहन्ना 6:2 यूहन्ना 6:3 यूहन्ना 6:4 यूहन्ना 6:5 यूहन्ना 6:6 यूहन्ना 6:7 यूहन्ना 6:8 यूहन्ना 6:9 यूहन्ना 6:10 यूहन्ना 6:11 यूहन्ना 6:12 यूहन्ना 6:13 यूहन्ना 6:14 यूहन्ना 6:15 यूहन्ना 6:16 यूहन्ना 6:17 यूहन्ना 6:18 यूहन्ना 6:19 यूहन्ना 6:20 यूहन्ना 6:21 यूहन्ना 6:22 यूहन्ना 6:23 यूहन्ना 6:24 यूहन्ना 6:25 यूहन्ना 6:26 यूहन्ना 6:27 यूहन्ना 6:28 यूहन्ना 6:29 यूहन्ना 6:30 यूहन्ना 6:31 यूहन्ना 6:32 यूहन्ना 6:33 यूहन्ना 6:34 यूहन्ना 6:35 यूहन्ना 6:36 यूहन्ना 6:37 यूहन्ना 6:38 यूहन्ना 6:39 यूहन्ना 6:40 यूहन्ना 6:41 यूहन्ना 6:42 यूहन्ना 6:43 यूहन्ना 6:44 यूहन्ना 6:45 यूहन्ना 6:46 यूहन्ना 6:47 यूहन्ना 6:48 यूहन्ना 6:49 यूहन्ना 6:50 यूहन्ना 6:51 यूहन्ना 6:52 यूहन्ना 6:53 यूहन्ना 6:54 यूहन्ना 6:55 यूहन्ना 6:56 यूहन्ना 6:57 यूहन्ना 6:58 यूहन्ना 6:59 यूहन्ना 6:60 यूहन्ना 6:61 यूहन्ना 6:62 यूहन्ना 6:63 यूहन्ना 6:64 यूहन्ना 6:65 यूहन्ना 6:66 यूहन्ना 6:67 यूहन्ना 6:68 यूहन्ना 6:69 यूहन्ना 6:70 यूहन्ना 6:71



यूहन्ना 6:45 पर टिप्पणी — पथप्रदर्शक व वाणी की आधिकारिक शिक्षा
पवित्र ग्रंथ में यूहन्ना 6:45 में यीशु यह बतलाते हैं कि भविष्यद्वक्ताओं के लेखों के अनुसार शिक्षित और प्रेरित होने की राह परमेश्वर की ओर से है। यह उद्धरण यशायाह 54:13 के संदर्भ से प्रेरित है, जिसमें कहा गया है कि लोग परमेश्वर की शिक्षा से संतुष्ट होंगे और उनकी शिक्षा उनके प्रवाह में होंगी। यह वाक्य बताता है कि अगर कोई व्यक्ति पिता से सुने और सीखे, तो वह यीशु के पास आता है—यानी सच्ची शिक्षा के स्रोत तक पहुँचना परमेश्वर के साथ सम्बद्ध होना है।
केंद्रीय विचार
यह परमेश्वर के आह्वान और सिखाने की कड़ी को उजागर करता है: जो व्यक्ति पिता से सुनता और सीखता है, वह यीशु के पास सीधे आकर सत्य को पहचान लेता है। मानव-कल्पना के बजाय, यह व्यवस्था ईश्वर की प्रेरणा और उद्धारकर्ता के साथ असतत् संबद्धता पर आधारित है।
मुख्य विषय
संबंधित संदर्भ
1) यशा 54:13 — एक समान दयालु शिक्षा का भविष्यवाणी स्वरूप, जिसमें योग्य शिक्षण का स्रोत परमेश्वर है।
2) यूहन्ना 5:37-40 — पिता का पाठ और निश्चय कि परमेश्वर के अभास से सीखा गया ज्ञान यीशु में प्रत्यक्ष होता है।
3) याकूब 1:5 — ज्ञान माँगने की आवश्यकता और परमेश्वर की असीम कृपा से मार्गदर्शन की पुष्टि।
व्यावहारिक दृष्टिकोण
- यदि आप सचमुच धार्मिक जीवन में प्रगति करना चाहते हैं, तो पहले परमेश्वर की शिक्षण-यात्रा को ग्रहण करें: प्रार्थना, पठन-प्रतिरोध और आत्म-समर्पण।
- ईश्वर की शिक्षा से अपने विचार-धाराओं को जांचें; जो कुछ भी यीशु तक ले जाता है, वही जीवन के मूल मार्ग को दिखाता है।
- समुदाय में सत्य की खोज में सहयोग लें; शिक्षक और साथी विश्वासी भी इस मार्ग में सहायता देते हैं, पर अंतिम प्रेरणा परमेश्वर से ही आती है।
संक्षिप्त समापन
यूहन्ना 6:45 में दिखाया गया है कि असली ज्ञान परमेश्वर से आता है और वह ज्ञान यीशु के साथ मिलने-जलाने से प्रत्यक्ष हो जाता है। पिता से सुना और सीखा हुआ व्यक्ति उसी मार्ग पर चलता है जो यीशु का है, और वह सत्य की ओर बढ़ता है।
एहतियाती नोट और उद्धरण संकेत
नोट: इस प्रवचन में नीचे उद्धृत प्रमुख टीका-आधार के विचार में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मानक निष्कर्षों से प्रेरणा ली गई है। नीचे उनके वास्तविक छोटे उद्धरण अगर उपलब्ध हों, उद्धृत किए गए हैं:
- "The prophets wrote by the Spirit of God, and their doctrine is the Father's doctrine." (कथन-सार) — आवश्यक शब्द-स्तर पर सार का उल्लेख।
- "All true knowledge comes from God the Father, who teaches by His Spirit." (संक्षिप्त विचार) — संदर्भित विचार।
- "They that have heard of the Father, and have learned of Him, come to me." (उद्धृत विचार) — सार-संरेखण।